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‘हम महिला आरक्षण के समर्थन में लेकिन…’, परिसीमन बिल पर गौरव गोगोई ने उठाए सवाल

संसद में महिला आरक्षण और परिसीमन पर बोलते गौरव गोगोई

महिला आरक्षण विधेयक पर चर्चा के दौरान संसद में अपनी बात रखते कांग्रेस नेता गौरव गोगोई।

महिला आरक्षण परिसीमन विवाद 2026: संसद में महिला आरक्षण को लेकर चर्चा के बीच कांग्रेस नेता गौरव गोगोई ने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी इस बिल के समर्थन में है, लेकिन इसके साथ जुड़े परिसीमन (Delimitation) को लेकर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।

महिला आरक्षण पर समर्थन, लेकिन शर्तें भी

गौरव गोगोई ने कहा कि महिला आरक्षण देश की राजनीति में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। कांग्रेस पार्टी लंबे समय से महिलाओं को उचित प्रतिनिधित्व देने की पक्षधर रही है। लेकिन उन्होंने यह भी जोड़ा कि इस कानून के साथ जो परिसीमन की प्रक्रिया जुड़ी है, वह पूरी तरह स्पष्ट नहीं है।

परिसीमन प्रक्रिया पर उठे सवाल

महिला आरक्षण परिसीमन विवाद 2026 का मुख्य मुद्दा यही है कि परिसीमन कब और कैसे लागू होगा। गोगोई ने संसद में सवाल उठाया कि क्या सरकार ने इस प्रक्रिया की स्पष्ट समयसीमा तय की है या नहीं।

उन्होंने कहा कि यदि परिसीमन को बिना पारदर्शिता के लागू किया गया, तो यह कुछ राज्यों के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है। खासकर दक्षिण और पूर्वोत्तर राज्यों पर इसका अधिक प्रभाव पड़ सकता है, जहां जनसंख्या वृद्धि दर अपेक्षाकृत कम रही है।

राज्यों के प्रतिनिधित्व पर असर

गोगोई ने यह भी चेतावनी दी कि परिसीमन के कारण संसद में राज्यों का प्रतिनिधित्व असंतुलित हो सकता है। इससे उन राज्यों को नुकसान हो सकता है जिन्होंने जनसंख्या नियंत्रण में बेहतर प्रदर्शन किया है।

महिला आरक्षण परिसीमन विवाद 2026 के संदर्भ में यह एक महत्वपूर्ण मुद्दा बनता जा रहा है, क्योंकि इससे राजनीतिक समीकरण बदल सकते हैं।

सरकार से पारदर्शिता की मांग

कांग्रेस नेता ने सरकार से मांग की कि वह परिसीमन की पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाए और स्पष्ट करे कि महिला आरक्षण कब लागू किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि केवल बिल पास कर देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह भी जरूरी है कि उसका क्रियान्वयन निष्पक्ष और संतुलित तरीके से हो।

राजनीतिक प्रभाव और भविष्य

महिला आरक्षण परिसीमन विवाद 2026 अब केवल एक विधायी मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि यह राजनीतिक संतुलन और संघीय ढांचे से भी जुड़ गया है। आने वाले समय में यह मुद्दा और अधिक गहराई से चर्चा में रहेगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि परिसीमन को सही तरीके से लागू किया गया, तो यह भारतीय लोकतंत्र को मजबूत कर सकता है। लेकिन यदि इसमें असंतुलन हुआ, तो यह विवाद और बढ़ सकता है।

निष्कर्ष: महिला आरक्षण पर सभी दलों में व्यापक सहमति दिख रही है, लेकिन परिसीमन को लेकर उठ रहे सवाल इस प्रक्रिया को जटिल बना रहे हैं। सरकार के लिए जरूरी है कि वह इन चिंताओं का समाधान करे, ताकि सभी राज्यों और वर्गों के साथ न्याय हो सके।


स्रोत: Aaj Tak

— Saranash Kumar | National & Business Correspondent, Lucknow

प्रकाशन तिथि: 16 अप्रैल 2026

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