
नागपुर, 14 जून 2026 | RI News Desk
देश में सस्ते और स्वदेशी ईंधन की दिशा में एक बड़े कदम के तहत केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने 100 फीसदी एथेनॉल ईंधन को कानूनी मान्यता देने संबंधी नियमों की फाइल को मंजूरी दे दी है। इस फैसले को भारत की ऊर्जा सुरक्षा, पेट्रोलियम आयात में कमी और किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
100% एथेनॉल ईंधन को लेकर गडकरी ने क्या कहा?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार के 12 वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित संवाददाता सम्मेलन में नितिन गडकरी ने बताया कि उन्होंने शुक्रवार रात 8 बजे 100 प्रतिशत एथेनॉल ईंधन के लिए नियम बनाने और उसे कानूनी मान्यता देने वाली फाइल पर हस्ताक्षर किए हैं।
गडकरी ने कहा कि यह कदम देश को आयातित पेट्रोलियम उत्पादों पर निर्भरता कम करने में मदद करेगा और वैकल्पिक ईंधनों के उपयोग को बढ़ावा देगा।
क्या बाजार में आएंगे 100% एथेनॉल से चलने वाले वाहन?
केंद्रीय मंत्री के अनुसार कई ऑटोमोबाइल कंपनियां पूरी तरह एथेनॉल ईंधन पर चलने वाले वाहनों को बाजार में उतारने की तैयारी कर रही हैं। नियम लागू होने के बाद ऐसे वाहनों के उत्पादन और बिक्री को नई गति मिलने की संभावना है।

किसानों और अर्थव्यवस्था को कैसे होगा फायदा?
एथेनॉल मुख्य रूप से गन्ना, मक्का और अन्य कृषि उत्पादों से तैयार किया जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि एथेनॉल की मांग बढ़ने से किसानों के लिए नए बाजार तैयार होंगे और कृषि आधारित उद्योगों को भी लाभ मिलेगा।
इसके साथ ही कच्चे तेल के आयात पर खर्च होने वाली विदेशी मुद्रा में कमी आने की संभावना है, जिससे देश की अर्थव्यवस्था को दीर्घकालिक लाभ मिल सकता है।
क्या सचमुच सस्ता होगा वाहन चलाना?
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि 100 फीसदी एथेनॉल ईंधन का बड़े पैमाने पर उत्पादन और वितरण शुरू होता है, तो पेट्रोल की तुलना में ईंधन लागत कम हो सकती है। हालांकि इसका वास्तविक प्रभाव उत्पादन लागत, कर संरचना और बाजार उपलब्धता पर निर्भर करेगा।
भारत की ऊर्जा नीति में बड़ा बदलाव
भारत पहले ही एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल कार्यक्रम को तेजी से आगे बढ़ा रहा है। अब 100 प्रतिशत एथेनॉल ईंधन को कानूनी मान्यता मिलने से स्वच्छ ऊर्जा, हरित परिवहन और आत्मनिर्भर ऊर्जा नीति को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।
प्रभाव
- पेट्रोलियम आयात पर निर्भरता घट सकती है।
- किसानों के लिए एथेनॉल उत्पादन का बड़ा बाजार तैयार हो सकता है।
- स्वच्छ और हरित ईंधन को बढ़ावा मिलेगा।
- ऑटोमोबाइल कंपनियों के लिए नए अवसर पैदा होंगे।
- भारत की ऊर्जा आत्मनिर्भरता को मजबूती मिल सकती है।
स्रोत: ANI
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