Sanjeev Kumar Rai | Kolkata
कोलकाता: West Bengal सरकार ने राज्य के सभी सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में वंदे मातरम को अनिवार्य कर दिया है। शिक्षा विभाग द्वारा 14 मई 2026 को जारी आदेश के अनुसार अब सुबह की प्रार्थना सभा में जन गण मन के साथ वंदे मातरम भी गाना सभी छात्रों के लिए जरूरी होगा। यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है।
राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह निर्णय केंद्र सरकार द्वारा जारी उन दिशानिर्देशों के अनुरूप लिया गया है, जिनमें वंदे मातरम के 150 वर्ष पूरे होने के अवसर पर स्कूलों और सरकारी कार्यक्रमों में इसके नियमित गायन पर जोर दिया गया था। इसके साथ ही पश्चिम बंगाल का राज्य गीत “बांग्लार माटी बांग्लार जल” भी पहले की तरह जारी रहेगा।
केंद्र सरकार के दिशानिर्देश क्या कहते हैं?
जनवरी 2026 में गृह मंत्रालय ने राज्यों और शैक्षणिक संस्थानों को निर्देश जारी कर कहा था कि वंदे मातरम के सभी छह छंदों को राष्ट्रीय सांस्कृतिक कार्यक्रमों और स्कूल सभाओं में प्राथमिकता दी जाए। केंद्र का तर्क था कि यह गीत भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन की ऐतिहासिक पहचान रहा है और नई पीढ़ी को इसके महत्व से परिचित कराना आवश्यक है।
पश्चिम बंगाल इस दिशा में कदम उठाने वाले प्रमुख राज्यों में शामिल हो गया है। शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि राज्य में इसे “राष्ट्रीय चेतना और सांस्कृतिक विरासत” के रूप में देखा जा रहा है।
वंदे मातरम का इतिहास और महत्व
वंदे मातरम की रचना प्रसिद्ध साहित्यकार Bankim Chandra Chattopadhyay ने 19वीं शताब्दी में की थी। यह गीत उनके उपन्यास आनंदमठ में शामिल था और बाद में भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन का प्रमुख प्रतीक बन गया। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान कई क्रांतिकारी आंदोलनों और सभाओं में इस गीत का उपयोग हुआ।
1950 में संविधान सभा ने जन गण मन को राष्ट्रगान और वंदे मातरम को राष्ट्रीय गीत का दर्जा दिया था। हालांकि दोनों की संवैधानिक स्थिति अलग है, लेकिन सांस्कृतिक और ऐतिहासिक दृष्टि से वंदे मातरम का विशेष महत्व माना जाता है।
स्कूल प्रिंसिपल्स की चिंता
राज्य के कई स्कूल प्रिंसिपलों और शिक्षकों ने व्यावहारिक कठिनाइयों को लेकर चिंता जताई है। उनका कहना है कि यदि राष्ट्रगान, राष्ट्रगीत और राज्य गीत — तीनों का नियमित गायन किया जाएगा तो मॉर्निंग असेंबली का समय 10 से 12 मिनट तक बढ़ सकता है। इससे पहली कक्षा की शुरुआत में देरी होने की आशंका है।
कुछ शिक्षाविदों ने सुझाव दिया है कि सप्ताह के अलग-अलग दिनों में गीतों का विभाजन किया जाए, ताकि पढ़ाई के समय पर असर कम पड़े। हालांकि शिक्षा विभाग ने अभी तक इस पर कोई संशोधित निर्देश जारी नहीं किया है।
राजनीतिक प्रतिक्रिया तेज
इस फैसले को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रिया भी सामने आने लगी है। Bharatiya Janata Party ने राज्य सरकार के कदम का स्वागत करते हुए कहा कि इससे छात्रों में राष्ट्रभक्ति की भावना मजबूत होगी। वहीं All India Trinamool Congress के कुछ नेताओं ने इसे केंद्र सरकार के दबाव का परिणाम बताया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले समय में यह मुद्दा शिक्षा और सांस्कृतिक पहचान की बहस के केंद्र में आ सकता है, खासकर ऐसे समय में जब कई राज्यों में स्कूल पाठ्यक्रम और सांस्कृतिक प्रतीकों को लेकर चर्चा तेज है।
अन्य राज्यों में क्या स्थिति है?
देश के कई राज्यों में पहले से ही मॉर्निंग असेंबली में राष्ट्रगान और प्रार्थना गीत अनिवार्य हैं। कुछ राज्यों में वंदे मातरम विशेष अवसरों और राष्ट्रीय पर्वों पर गाया जाता है, जबकि कुछ शैक्षणिक संस्थानों ने इसे नियमित रूप से अपनाया हुआ है। पश्चिम बंगाल का यह फैसला अब राष्ट्रीय स्तर पर नई बहस को जन्म दे सकता है कि क्या राष्ट्रीय गीत को पूरे देश में समान रूप से अनिवार्य किया जाना चाहिए।




