रिन्यूज डेस्क | 12 मई 2026
फोटो: भाजपा कार्यक्रम के दौरान नेताओं ने असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा का स्वागत और सम्मान किया।
असम की राजनीति में आज एक नया अध्याय लिखा जा रहा है। डॉ. हिमंत बिस्वा सरमा मंगलवार को गुवाहाटी में लगातार दूसरी बार असम के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत कई गणमान्य हस्तियां इस ऐतिहासिक समारोह में शामिल होंगी। यह शपथ महज औपचारिकता नहीं, बल्कि असम की राजनीति में कांग्रेस-विरोधी युग की मजबूत नींव का प्रतीक है। हिमंत बिस्वा सरमा असम के पहले गैर-कांग्रेसी मुख्यमंत्री बन गए हैं, जो लगातार दो पूर्ण कार्यकाल संभालने जा रहे हैं। 2026 के विधानसभा चुनाव में एनडीए की भारी जीत (102 सीटें) के बाद यह उपलब्धि और भी चमकदार हो गई है।
लेकिन यह कहानी सिर्फ सत्ता की नहीं, एक साधारण परिवार से निकले वकील, छात्र नेता और रणनीतिकार की है, जिसने असम को कांग्रेस के 70 साल के वर्चस्व से मुक्त कराकर भाजपा का गढ़ बना दिया। इस 1500 शब्दों के विश्लेषण में हम हिमंत बिस्वा सरमा के व्यक्तिगत इतिहास, राजनीतिक सफर, पहले कार्यकाल की उपलब्धियों, 2026 की जीत के पीछे की रणनीति और आने वाले पांच सालों की चुनौतियों-सम्भावनाओं पर गहन चर्चा करेंगे।
बचपन, शिक्षा और परिवार: एक साधारण असमिया परिवार से उभरा नेता
फोटो: असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा अपने परिवार के साथ एक पारिवारिक पल साझा करते हुए।
हिमंत बिस्वा सरमा का जन्म 1 फरवरी 1969 को जोरहाट के मिशन अस्पताल में हुआ था। पिता कैलाश नाथ सरमा और मां मृणालिनी देवी एक साहित्यिक परिवार से थे। उन्होंने गुवाहाटी के गांधी बस्ती, उलुबाड़ी में बचपन बिताया। 1985 में कमरूप एकेडमी स्कूल से सीनियर सेकेंडरी पास करने के बाद उन्होंने कॉटन कॉलेज से पॉलिटिकल साइंस में ग्रेजुएशन (1990) और पोस्ट-ग्रेजुएशन (1992) पूरा किया। कॉटन कॉलेज स्टूडेंट्स यूनियन के जनरल सेक्रेटरी रह चुके हिमंत ने छात्र राजनीति में ही अपनी नेतृत्व क्षमता दिखाई।
इसके बाद गुवाहाटी लॉ कॉलेज से एलएलबी और गौहाटी विश्वविद्यालय से पीएचडी की डिग्री हासिल की। 1996 से 2001 तक उन्होंने गौहाटी हाईकोर्ट में वकालत की। यहीं से उनकी राजनीतिक पारी शुरू हुई। 7 जून 2001 को उन्होंने रिनिकी भूयान सरमा से शादी की। रिनिकी एक सफल मीडिया उद्यमी हैं। दंपति के दो बच्चे हैं – बेटा नंदील बिस्वा सरमा और बेटी सुकन्या सरमा। परिवार की निजी जिंदगी हमेशा सादगी भरी रही, लेकिन राजनीति ने इसे चुनौतियों से भर दिया। हिमंत अक्सर कहते हैं, “मेरा परिवार ही मेरी सबसे बड़ी ताकत है।”
यह व्यक्तिगत पृष्ठभूमि महत्वपूर्ण है क्योंकि हिमंत ने कभी ‘वंशवादी’ राजनीति नहीं की। वे खुद को ‘आम असमिया’ का प्रतिनिधि बताते हैं, जो शिक्षा और मेहनत से आगे बढ़ा।
कांग्रेस से भाजपा तक: 24 साल का सफर जो असम की राजनीति बदल गया
2001 में हिमंत पहली बार जालुकबारी विधानसभा सीट से कांग्रेस के टिकट पर विधायक चुने गए। उन्होंने एजीपी उम्मीदवार भृगु कुमार फुकन को हराया। इसके बाद 2006, 2011, 2016 और 2021 – पांच बार लगातार जालुकबारी से जीत हासिल की। तरुण गोगोई सरकार में वे कृषि, योजना, वित्त, स्वास्थ्य, शिक्षा और असम समझौता लागू करने जैसे अहम विभाग संभाल चुके हैं।
लेकिन 2015 में कांग्रेस से मोहभंग हो गया। अगस्त 2015 में 10 अन्य विधायकों के साथ उन्होंने भाजपा जॉइन कर ली। अमित शाह के नेतृत्व में यह कदम असम में भाजपा की नींव रखने वाला साबित हुआ। 2016 में भाजपा की पहली सरकार बनी, लेकिन हिमंत मुख्यमंत्री नहीं बने। फिर भी वे एनईडीए (नॉर्थ ईस्ट डेमोक्रेटिक अलायंस) के कन्वीनर बने और पूरे पूर्वोत्तर में भाजपा का विस्तार किया।
2021 में भाजपा-एनडीए की जीत के बाद 10 मई को वे असम के 15वें मुख्यमंत्री बने। अब 2026 में तीसरी बार भाजपा की सरकार (एनडीए 102 सीटें) और हिमंत का दूसरा लगातार कार्यकाल। यह उपलब्धि ऐतिहासिक है क्योंकि कांग्रेस के बाद कोई भी गैर-कांग्रेसी मुख्यमंत्री दो पूर्ण टर्म नहीं चला पाया था।
फोटो: असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा परिवार के साथ यात्रा और निजी पलों का आनंद लेते हुए।
गहन विश्लेषण: हिमंत का कांग्रेस से भाजपा जाना सिर्फ पार्टी बदलना नहीं था। यह असम की जनता की नाराजगी का प्रतीक था – भ्रष्टाचार, बेरोजगारी, घुसपैठ और पहचान के संकट से। हिमंत ने ‘असमिया अस्मिता’ को भाजपा के हिंदुत्व और विकास एजेंडे से जोड़ा। उन्होंने ‘3Gs’ (गोगोई, कांग्रेस और घुसपैठ) को ध्वस्त किया और भाजपा को असम का स्थायी विकल्प बना दिया।
पहले कार्यकाल की उपलब्धियां: ‘ट्रेलर’ से ‘फुल मूवी’ की ओर
2021-2026 का कार्यकाल हिमंत के लिए ‘ट्रेलर’ साबित हुआ।
- आर्थिक विकास: असम का जीएसडीपी तेजी से बढ़ा। औद्योगिक निवेश आए, चाय-तेल-बांस उद्योग को बूस्ट मिला।
- कल्याण योजनाएं: ओरुनोदई स्कीम ने महिलाओं को सीधा लाभ दिया। मिशन बसुंधरा ने भूमि विवाद सुलझाए।
- स्वास्थ्य और शिक्षा: कोविड प्रबंधन में सराहना बटी। नए मेडिकल कॉलेज, आईआईटी, आईआईएम जैसे संस्थान स्थापित।
- कानून-व्यवस्था: घुसपैठ पर सख्ती, NRC और CAA का मजबूत समर्थन। बंगाली मुस्लिम बहुल इलाकों में डेमोग्राफिक बदलाव रोकने की कोशिशें।
- इंफ्रास्ट्रक्चर: सड़क, ब्रिज, एयरपोर्ट और पर्यटन को बढ़ावा।
विश्लेषण: हिमंत ने ‘स्मार्ट गवर्नेंस’ का मॉडल दिया – डेटा-ड्रिवन फैसले, डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन और जन-सम्पर्क। लेकिन आलोचना भी हुई – कुछ मुस्लिम समुदायों में ‘डर का माहौल’ और विपक्ष द्वारा ‘ध्रुवीकरण’ के आरोप। फिर भी 2026 में जनता ने फिर भरोसा जताया। असम में भाजपा अब ‘फोर्ट्रेस’ बन चुकी है।
2026 चुनाव: रणनीति, जीत और शपथ समारोह
अप्रैल 2026 के चुनाव में एनडीए ने 126 में से 102 सीटें जीतीं। हिमंत खुद जालुकबारी में 89,000+ वोटों से जीते। उन्होंने ‘असम को विकसित असम’ का नारा दिया। विपक्ष (कांग्रेस-महागठबंधन) को सिर्फ 21 सीटें मिलीं।
12 मई को गुवाहाटी में शपथ समारोह होगा। पीएम मोदी मुख्य अतिथि रहेंगे। यह समारोह पूर्वोत्तर में भाजपा की मजबूती का संदेश देगा। हिमंत ने कहा, “पहला टर्म ट्रेलर था, अब फुल मूवी शुरू होगी – विकास, सुरक्षा और अस्मिता का।”
आगे की चुनौतियां और भविष्य की दिशा: गहन विश्लेषण
सकारात्मक सम्भावनाएं:
- पूर्वोत्तर में भाजपा का विस्तार (नेडा मजबूत)।
- आर्थिक हब बनना – निवेश, युवा रोजगार, पर्यटन।
- सांस्कृतिक संरक्षण – असमिया भाषा, परंपराएं।
- क्लाइमेट चेंज और ब्रह्मपुत्र बाढ़ पर फोकस।
चुनौतियां:
- विपक्षी एकता और क्षेत्रीय दलों का पुनरुत्थान।
- घुसपैठ, सीमा सुरक्षा और अंतर-समुदाय संतुलन।
- युवा बेरोजगारी और माइग्रेशन।
- पर्यावरण और आदिवासी मुद्दे।
हिमंत की रणनीति स्पष्ट है – ‘सबका साथ, सबका विकास’ लेकिन असमिया पहचान को केंद्र में रखकर। वे राष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा में रहते हैं। कई भाजपा कार्यकर्ता उन्हें ‘पीएम मटेरियल’ मानते हैं।
निष्कर्ष: हिमंत बिस्वा सरमा का सफर साबित करता है कि मेहनत, रणनीति और जन-सम्पर्क से कोई भी चोटी हासिल की जा सकती है। आज का शपथ समारोह सिर्फ एक नेता का नहीं, पूरे असम का उत्सव है। असम अब विकास की नई ऊंचाइयों को छूने को तैयार है।
रिन्यूज डेस्क की ओर से हिमंत बिस्वा सरमा को बधाई। असम का भविष्य उज्ज्वल हो।




