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तमिल नाडु फ्लोर टेस्ट में विजय की ऐतिहासिक जीत, 144 विधायकों ने TVK सरकार का समर्थन किया

14 May 2026 | By RI News Desk | Chennai

चेन्नई: अभिनेता से राजनेता बने थलापति विजय की तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) सरकार ने तमिल नाडु विधानसभा में विश्वासमत हासिल कर अपनी राजनीतिक स्थिति मजबूत कर ली है। विधानसभा में हुए फ्लोर टेस्ट में सरकार के पक्ष में 144 वोट पड़े, जबकि 22 विधायकों ने विरोध में मतदान किया। 5 विधायक वोटिंग से दूर रहे और DMK ने सदन से वॉकआउट कर दिया।

यह फ्लोर टेस्ट केवल संख्या बल की परीक्षा नहीं बल्कि तमिल नाडु की बदलती राजनीति का संकेत भी माना जा रहा है। लंबे समय तक DMK और AIADMK के बीच सीमित रही राज्य की राजनीति में अब TVK एक बड़े राजनीतिक केंद्र के रूप में उभरती दिखाई दे रही है।

फ्लोर टेस्ट में क्या हुआ?

तमिल नाडु विधानसभा में विश्वासमत प्रस्ताव पर हुई वोटिंग के दौरान TVK सरकार को अपेक्षा से अधिक समर्थन मिला। सरकार के पक्ष में कुल 144 वोट पड़े। विपक्ष के 22 विधायकों ने सरकार के खिलाफ मतदान किया जबकि 5 सदस्य मतदान प्रक्रिया से अनुपस्थित रहे।

  • सरकार के पक्ष में: 144 वोट
  • सरकार के विरोध में: 22 वोट
  • अनुपस्थित/वोटिंग से दूर: 5 विधायक
  • DMK ने सदन से वॉकआउट किया

फ्लोर टेस्ट के दौरान सदन में भारी राजनीतिक तनाव देखने को मिला। विपक्ष ने सरकार पर विधायकों को तोड़ने और राजनीतिक दबाव बनाने के आरोप लगाए। हालांकि TVK ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उन्हें “जनता के जनादेश और विकास की राजनीति” का समर्थन मिला है।

AIADMK में फूट ने बदला समीकरण

इस फ्लोर टेस्ट की सबसे बड़ी राजनीतिक घटना AIADMK के भीतर दिखाई दी फूट रही। पार्टी नेतृत्व और EPS गुट के विरोध के बावजूद 24 AIADMK विधायकों ने विजय सरकार के पक्ष में मतदान किया। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार यही समर्थन सरकार की स्थिरता का निर्णायक कारण बना।

AIADMK के अंदर लंबे समय से नेतृत्व संघर्ष की स्थिति बनी हुई थी। फ्लोर टेस्ट के बाद अब पार्टी के भीतर और बड़ा विभाजन होने की संभावना जताई जा रही है। कई राजनीतिक पर्यवेक्षक इसे तमिल नाडु की राजनीति में AIADMK के कमजोर पड़ने का संकेत मान रहे हैं।

विजय की राजनीति का सफर

थलापति विजय लंबे समय तक तमिल फिल्म उद्योग के सबसे लोकप्रिय अभिनेताओं में रहे हैं। उनकी फिल्मों में सामाजिक न्याय, भ्रष्टाचार विरोध और युवाओं की समस्याओं जैसे मुद्दे लगातार दिखाई देते रहे। यही कारण रहा कि राजनीति में आने के बाद उन्हें युवाओं और शहरी मतदाताओं का बड़ा समर्थन मिला।

2024 के बाद विजय ने सक्रिय राजनीतिक अभियान शुरू किया और TVK को एक क्षेत्रीय विकल्प के रूप में प्रस्तुत किया। 2026 विधानसभा चुनाव में पार्टी ने आश्चर्यजनक प्रदर्शन करते हुए बड़ी संख्या में सीटें हासिल कीं। हालांकि स्पष्ट बहुमत को लेकर शुरुआती असमंजस बना रहा, लेकिन फ्लोर टेस्ट के बाद सरकार की स्थिति अब मजबूत मानी जा रही है।

तमिल नाडु की राजनीति का इतिहास

तमिल नाडु की राजनीति पिछले पांच दशकों से मुख्य रूप से द्रविड़ दलों के इर्द-गिर्द घूमती रही है। DMK और AIADMK ने लंबे समय तक राज्य की सत्ता पर कब्जा बनाए रखा। एमजी रामचंद्रन, करुणानिधि और जयललिता जैसे नेताओं ने राज्य की राजनीति को गहराई से प्रभावित किया।

फिल्म और राजनीति का संबंध तमिल नाडु में हमेशा मजबूत रहा है। एमजीआर और जयललिता जैसे फिल्म सितारे पहले भी सत्ता तक पहुंचे। विजय की राजनीतिक सफलता को उसी परंपरा का आधुनिक विस्तार माना जा रहा है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि आज की राजनीति में सोशल मीडिया, युवा मतदाता और रोजगार जैसे मुद्दों की भूमिका पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।

DMK की रणनीति पर सवाल

फ्लोर टेस्ट के दौरान DMK का वॉकआउट भी चर्चा का विषय बना रहा। पार्टी नेताओं का कहना था कि सरकार ने “अनैतिक तरीके” से बहुमत जुटाया है। हालांकि राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सदन में मौजूद रहकर मतदान करने के बजाय वॉकआउट करना DMK की रणनीतिक कमजोरी भी माना जा सकता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि DMK और AIADMK दोनों ही कमजोर होते हैं तो TVK आने वाले वर्षों में राज्य की मुख्य राजनीतिक शक्ति बन सकती है।

विश्लेषण

तमिल नाडु का यह फ्लोर टेस्ट केवल सरकार बचाने की प्रक्रिया नहीं बल्कि राज्य की राजनीति में पीढ़ीगत परिवर्तन का संकेत भी है। विजय ने अपनी फिल्मी लोकप्रियता को राजनीतिक समर्थन में बदलने में सफलता हासिल की है। AIADMK के भीतर टूट और DMK की रक्षात्मक राजनीति ने TVK को अतिरिक्त लाभ दिया। यह स्थिति बताती है कि तमिल नाडु की राजनीति अब पारंपरिक द्रविड़ दलों से आगे बढ़कर नए नेतृत्व की ओर बढ़ रही है।

प्रभाव

फ्लोर टेस्ट में जीत के बाद विजय सरकार को प्रशासनिक स्थिरता मिल गई है। इससे निवेश, उद्योग और रोजगार से जुड़े बड़े फैसलों को आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है। दूसरी ओर AIADMK में संभावित टूट राज्य की विपक्षी राजनीति को कमजोर कर सकती है। यदि TVK अपनी लोकप्रियता बनाए रखने में सफल रहती है तो दक्षिण भारतीय राजनीति में एक नया शक्ति केंद्र उभर सकता है।

आगे क्या?

फ्लोर टेस्ट जीतने के बाद अब विजय सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती चुनावी वादों को पूरा करने की होगी। बेरोजगारी, उद्योग निवेश, शिक्षा और शहरी विकास जैसे मुद्दों पर सरकार के प्रदर्शन पर जनता की नजर रहेगी।

राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि आने वाले महीनों में तमिल नाडु की राजनीति और अधिक दिलचस्प हो सकती है, क्योंकि विपक्ष सरकार को घेरने के लिए नई रणनीति तैयार कर सकता है।

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