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Uddhav Thackeray की पार्टी में सबसे बड़ी बगावत! 9 में से 6 सांसदों ने छोड़ा साथ; जानिए क्या दलबदल कानून बचा पाएगा सांसदी?

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महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर भूचाल आ गया है। उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (UBT) में चार साल के भीतर यह दूसरी सबसे बड़ी टूट मानी जा रही है। पार्टी ने अपने सभी 9 लोकसभा सांसदों को व्हिप जारी कर गुरुवार सुबह 11 बजे संसद भवन स्थित कार्यालय में होने वाली संसदीय दल की महत्वपूर्ण बैठक में अनिवार्य रूप से उपस्थित रहने का निर्देश दिया था। लेकिन इस बैठक से ठीक पहले खबर आ रही है कि 9 में से 6 सांसदों ने बगावत कर दी है और बुधवार सुबह ही लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को शिंदे गुट में विलय के लिए चिट्ठी सौंप दी है। हालांकि, अभी तक स्पीकर कार्यालय या शिंदे गुट की ओर से इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।

संजय राउत का गुस्सा और प्रेस कॉन्फ्रेंस में गाली-गलौज

इस संभावित बगावत की खबरों के बीच दिल्ली में शिवसेना (UBT) के राज्यसभा सांसद संजय राउत ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई, जिसमें उनका गुस्सा सातवें आसमान पर दिखा। राउत ने बागी सांसदों के लिए अपशब्दों का इस्तेमाल करते हुए उन्हें बेईमान करार दिया और कहा कि बेईमानी उनके खून में है। हालांकि, बाद में सफाई देते हुए उन्होंने कहा कि मराठी में ऐसे शब्द आम बोलचाल का हिस्सा हैं। गौर करने वाली बात यह है कि इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में पार्टी के 9 में से सिर्फ 3 सांसद (अनिल देसाई, राजाभाऊ वाजे और अरविंद सावंत) ही मौजूद रहे। बागी गुट में नागेश पाटिल आष्टीकर और संजय दीना पाटिल जैसे बड़े नाम शामिल बताए जा रहे हैं, जबकि संजय दीना पाटिल ने पहले इन खबरों का खंडन किया था।

Analysis: क्या कहता है दल-बदल कानून और क्यों सुरक्षित हैं बागी?

राजनीतिक और कानूनी विश्लेषकों के अनुसार, यह बगावत पूरी रणनीति के तहत की गई है। भारतीय संविधान के **दल-बदल विरोधी कानून** के तहत यदि किसी पार्टी के निर्वाचित सदस्यों में टूट होती है, तो अयोग्यता से बचने के लिए कम से कम दो-तिहाई (2/3) सदस्यों का एक साथ अलग होना अनिवार्य है। लोकसभा में शिवसेना (UBT) के कुल 9 सांसद हैं और अयोग्यता से बचने के लिए 6 सांसदों का आंकड़ा बिल्कुल सटीक बैठता है।

यदि ये 6 सांसद एक साथ स्पीकर को चिट्ठी सौंपते हैं, तो उनकी सांसदी जाने का कानूनी खतरा खत्म हो जाएगा और वे खुद को वैध गुट घोषित करने का दावा कर सकते हैं। हालांकि, जानकारों का मानना है कि कानूनी रूप से अपनी स्थिति और मजबूत करने के लिए इन सांसदों को आगे चलकर किसी दूसरे दल (जैसे शिंदे गुट) में औपचारिक विलय की प्रक्रिया को भी पूरा करना होगा।

कांग्रेस का अमित शाह पर करारा हमला: इस पूरे राजनीतिक ड्रामे पर कांग्रेस ने केंद्र सरकार को घेरा है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह विपक्षी सांसदों को प्रलोभन देकर लोकतंत्र को कमजोर कर रहे हैं। रमेश के अनुसार, शाह 17 अप्रैल, 2026 को लोकसभा में परिसीमन विधेयकों के पास न हो पाने के कारण हुई अपनी राजनीतिक हार की भरपाई करने के लिए विपक्ष को तोड़ने की कोशिश कर रहे हैं।

Impact: महाराष्ट्र चुनाव और विपक्षी गठबंधन पर क्या होगा असर?

इस बगावत का असर केवल दिल्ली की संसद तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका सीधा और गहरा असर महाराष्ट्र की राजनीति पर पड़ने वाला है:

  1. उद्धव ठाकरे के नैतिक मनोबल को झटका: साल 2022 में एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में 39 विधायकों की बगावत के बाद उद्धव ठाकरे के लिए यह दूसरा सबसे बड़ा कूटनीतिक झटका है। चुनाव से ठीक पहले सांसदों का इस तरह साथ छोड़ना पार्टी कार्यकर्ताओं के मनोबल को कमजोर कर सकता है।
  2. महा विकास अघाड़ी (MVA) में सीट शेयरिंग पर दबाव: आगामी विधानसभा चुनावों के लिए विपक्षी गठबंधन (MVA) में सीट शेयरिंग को लेकर बातचीत चल रही है। शिवसेना (UBT) के कमजोर होने से कांग्रेस और एनसीपी (शरद पवार) गठबंधन में अधिक सीटों पर अपना दावा मजबूत कर सकते हैं।
  3. शिंदे गुट और एनडीए की बढ़ती ताकत: यदि ये 6 सांसद औपचारिक रूप से मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के साथ जाते हैं, तो राष्ट्रीय स्तर पर एनडीए का संख्या बल बढ़ेगा और महाराष्ट्र के भीतर असली शिवसेना की लड़ाई में शिंदे गुट का पलड़ा और भारी हो जाएगा।

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RiNews टेकअवे (Takeaway): महाराष्ट्र की सियासत में ‘स्क्रिप्ट’ पुरानी है, बस किरदार नए हैं। 2022 में जो खेल विधायकों के साथ हुआ था, 2026 में वही खेल सांसदों के स्तर पर दोहराया जा रहा है। कानूनी दांव-पेंच में भले ही 6 का आंकड़ा बागी सांसदों को जीवनदान दे दे, लेकिन लोकतंत्र के इस अखाड़े में असली फैसला आगामी विधानसभा चुनावों में राज्य की जनता की अदालत में ही होगा।

स्रोतः आरआई न्यूज फीड नेटवर्क (एकीकृत) | संपादक मंडल: आरआई न्यूज डेस्क (RI News Desk)

📅 प्रकाशित तिथि: 18 Jun 2026 को 06:41 AM बजे | गाजीपुर, उत्तर प्रदेश

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