खोजें लोड हो रहा है...
राष्ट्रीय डिजिटल समाचार मंच
ACADEMY
BREAKING
बंगाल में महा-विभाजन: बागी TMC सांसदों का बड़ा कदम, NCPI में विलय से दिल्ली तक मचा हड़कंप NASA का बड़ा धमाका: अंतरिक्ष स्टेशन में स्थापित हुई सबसे ठंडी ‘क्वांटम लैब’, खुलेंगे ब्रह्मांड के अनसुलझे रहस्य मेडिकल साइंस में महा-क्रांति: सिर्फ 12 मिनट में ब्रेन ट्यूमर पकड़ेगा नया AI सिस्टम, अब महंगे DNA टेस्ट से मिलेगी मुक्ति कागजों पर बदले गए खंभे, जमीन पर बांस के सहारे दौड़ रहा मौत का तार TMC के इतिहास की सबसे बड़ी बगावत! जानें क्यों आधी रात के बाद कलकत्ता हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाने पहुंचीं ममता ईरानी फुटबॉल टीम बोली- हमें तुरंत अमेरिका छोड़ने को कहा गया: मैच के तुरंत बाद मेक्सिको जाना पड़ा; ईरानी खिलाड़ी ने गन सेलिब्रेशन किया था बंगाल में महा-विभाजन: बागी TMC सांसदों का बड़ा कदम, NCPI में विलय से दिल्ली तक मचा हड़कंप NASA का बड़ा धमाका: अंतरिक्ष स्टेशन में स्थापित हुई सबसे ठंडी ‘क्वांटम लैब’, खुलेंगे ब्रह्मांड के अनसुलझे रहस्य मेडिकल साइंस में महा-क्रांति: सिर्फ 12 मिनट में ब्रेन ट्यूमर पकड़ेगा नया AI सिस्टम, अब महंगे DNA टेस्ट से मिलेगी मुक्ति कागजों पर बदले गए खंभे, जमीन पर बांस के सहारे दौड़ रहा मौत का तार TMC के इतिहास की सबसे बड़ी बगावत! जानें क्यों आधी रात के बाद कलकत्ता हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाने पहुंचीं ममता ईरानी फुटबॉल टीम बोली- हमें तुरंत अमेरिका छोड़ने को कहा गया: मैच के तुरंत बाद मेक्सिको जाना पड़ा; ईरानी खिलाड़ी ने गन सेलिब्रेशन किया था
×

TMC के इतिहास की सबसे बड़ी बगावत! जानें क्यों आधी रात के बाद कलकत्ता हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाने पहुंचीं ममता

 

देश / राजनीति / बंगाल

TMC Split: TMC में टूट के बीच कलकत्ता हाईकोर्ट क्यों पहुंची ममता बनर्जी?

लेखक/स्रोत: राजनीतिक डेस्क | आरआई न्यूज (RiNews)

पश्चिम बंगाल की राजनीति में भारी भूचाल, दो फाड़ हुई तृणमूल कांग्रेस

कोलकाता: पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी पार्टी ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (TMC) इस समय अपने इतिहास के सबसे बड़े आंतरिक संकट और बिखराव से गुजर रही है। पार्टी के भीतर विधायकों और सांसदों की भारी बगावत के बाद मामला अब सड़क से निकलकर सीधे अदालत के दरवाजे पर पहुंच गया है। टीएमसी में मची इस ऐतिहासिक टूट के बीच पार्टी सुप्रीमो ममता बनर्जी को अचानक कलकत्ता हाईकोर्ट का रुख करना पड़ा है, जिसने देश भर के राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है।

ऋतब्रत बनर्जी की बगावत और स्पीकर के फैसले को चुनौती

दरअसल, इस पूरे विवाद की शुरुआत टीएमसी के निष्कासित विधायक ऋतब्रत बनर्जी (Ritabrata Banerjee) की अगुवाई में हुई बड़ी बगावत से हुई। विधानसभा के कुल 80 विधायकों में से करीब 58 से 65 विधायकों के समर्थन का दावा करते हुए बागी गुट ने खुद को पार्टी का असली बहुमत गुट घोषित कर दिया। इसके बाद, विधानसभा स्पीकर रतींद्र बोस ने बागी नेता ऋतब्रत बनर्जी को सदन में आधिकारिक तौर पर ‘नेता प्रतिपक्ष’ (Leader of Opposition) के रूप में मान्यता दे दी और उन्हें बकायदा कमरा भी अलॉट कर दिया।

स्पीकर के इसी फैसले ने ममता बनर्जी के खेमे में खलबली मचा दी है। ममता बनर्जी की अगुवाई वाली टीएमसी ने स्पीकर के इस फैसले को असंवैधानिक और नियमों के खिलाफ बताते हुए इसके खिलाफ कलकत्ता हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। टीएमसी ने कोर्ट से स्पीकर के आदेश पर तुरंत अंतरिम रोक (Interim Stay) लगाने की मांग की है। हालांकि, हाईकोर्ट की वैकेशन बेंच ने इस मामले पर तुरंत स्टे देने से इनकार करते हुए कहा है कि पहले स्पीकर का पूरा रिकॉर्ड सामने आए, उसके बाद ही विस्तृत सुनवाई होगी।

RI विश्लेषण: क्या ममता के हाथ से फिसल रही है टीएमसी?

पश्चिम बंगाल की मौजूदा राजनीतिक स्थिति को अगर गहराई से समझा जाए, तो यह संकट केवल किसी एक पद या नेता प्रतिपक्ष की कुर्सी की लड़ाई नहीं है। यह सीधे तौर पर पार्टी के अस्तित्व और उसकी कमान को लेकर छिड़ा हुआ युद्ध है। इतिहास गवाह है कि जब भी किसी क्षेत्रीय दल के भीतर दो-तिहाई से अधिक विधायक बगावत करते हैं, जैसा कि हमने हाल के वर्षों में महाराष्ट्र में शिवसेना और एनसीपी के मामलों में देखा है, तो असली पार्टी और चुनाव चिह्न का मालिकाना हक दांव पर लग जाता है।

आरआई न्यूज़ के विश्लेषण के अनुसार, ममता बनर्जी का तुरंत हाईकोर्ट पहुंचना यह साफ दिखाता है कि कानूनी मोर्चा उनके लिए कितना महत्वपूर्ण हो चुका है। अगर बागी गुट को विधानसभा और फिर संसद में (जहां करीब 20 सांसदों के टूटने की खबर है) अलग गुट के रूप में मान्यता मिल जाती है, तो ममता बनर्जी के लिए अपनी पार्टी पर नियंत्रण बनाए रखना बेहद मुश्किल हो जाएगा। विरोधी गुट का यह दावा कि वे ‘असली टीएमसी’ हैं, ममता बनर्जी के राजनीतिक करियर की अब तक की सबसे बड़ी अग्निपरीक्षा है।

निष्कर्ष

कुल मिलाकर, कलकत्ता हाईकोर्ट में लंबित यह मामला अब बंगाल की राजनीति की दशा और दिशा तय करेगा। यदि कोर्ट से ममता बनर्जी को जल्द बड़ी राहत नहीं मिलती है, तो बागी गुट का मनोबल और मजबूत होगा, जिसका सीधा असर संगठन के जमीनी कार्यकर्ताओं पर भी पड़ेगा। आने वाले दिनों में यह कानूनी लड़ाई न सिर्फ तीखी होगी, बल्कि चुनाव आयोग के दरवाजे तक भी पहुंच सकती है, जहां पार्टी के नाम और निशान की असली जंग लड़ी जाएगी।

 


स्रोतः आरआई न्यूज फीड नेटवर्क (एकीकृत) | संपादक मंडल: आरआई न्यूज डेस्क (RI News Desk)

📅 प्रकाशित तिथि: 16 Jun 2026 को 09:20 PM बजे | गाजीपुर, उत्तर प्रदेश

Scroll to Top