By RI News Desk
यमुना नदी के पुनर्जीवन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए केंद्र सरकार और छह राज्यों के बीच लंबे समय से लंबित किशाऊ बहुउद्देशीय बांध परियोजना पर सहमति बन गई है। उत्तर प्रदेश, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, हरियाणा और दिल्ली ने परियोजना को आगे बढ़ाने पर सहमति जताई है। केंद्र सरकार ने परियोजना के जल घटक की लागत का 90 प्रतिशत हिस्सा वहन करने का फैसला किया है, जबकि शेष 10 प्रतिशत लागत राज्यों द्वारा साझा की जाएगी।
करीब 27 वर्षों से विभिन्न वित्तीय और प्रशासनिक कारणों से अटकी यह परियोजना अब अमल की दिशा में बढ़ती दिखाई दे रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि इसके पूरा होने से यमुना नदी में स्वच्छ जल प्रवाह बढ़ेगा, पेयजल संकट कम होगा और बिजली उत्पादन क्षमता में भी महत्वपूर्ण वृद्धि होगी।
क्या है किशाऊ बांध परियोजना?
किशाऊ बहुउद्देशीय बांध परियोजना यमुना की प्रमुख सहायक नदी टोंस पर प्रस्तावित है। यह बांध उत्तराखंड के देहरादून और हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले की सीमा पर बनाया जाएगा। परियोजना के तहत 236 मीटर ऊंचा कंक्रीट बांध निर्मित किया जाएगा।
इस परियोजना की कुल स्थापित जलविद्युत क्षमता 600 मेगावाट होगी, जिसके तहत 150-150 मेगावाट की चार इकाइयां स्थापित की जाएंगी। इसके साथ ही 1324 मिलियन घन मीटर जल भंडारण की सुविधा भी विकसित होगी।
बैठक में क्या निर्णय हुए?
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय बैठक में छह राज्यों ने परियोजना को लागू करने के लिए समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर करने की सहमति दी। समझौते के बाद परियोजना को केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा।
बैठक में केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय, बिजली मंत्रालय, प्रधानमंत्री कार्यालय तथा संबंधित राज्यों के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया।
पानी के बदले बिजली का नया मॉडल
बैठक में एक महत्वपूर्ण सहमति यह भी बनी कि हिमाचल प्रदेश के हिस्से का पानी दिल्ली और राजस्थान को उपलब्ध कराया जाएगा। इसके बदले दिल्ली और राजस्थान बिजली परियोजना से संबंधित वित्तीय दायित्वों में हिमाचल प्रदेश की मदद करेंगे।
यह व्यवस्था राज्यों के बीच संसाधनों के बेहतर उपयोग और सहयोगात्मक संघवाद का एक नया उदाहरण मानी जा रही है।
यमुना को कैसे मिलेगा लाभ?
विशेषज्ञों के अनुसार यमुना की सबसे बड़ी समस्या स्वच्छ जल प्रवाह की कमी है। नदी के कई हिस्सों में प्रदूषण का स्तर इसलिए बढ़ जाता है क्योंकि पर्याप्त मात्रा में ताजा पानी नहीं पहुंच पाता।
किशाऊ परियोजना के माध्यम से नियंत्रित जल प्रवाह उपलब्ध होगा, जिससे नदी में स्वच्छ जल की मात्रा बढ़ेगी। इससे दिल्ली, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में यमुना की स्थिति में सुधार की संभावना है।
इसके अतिरिक्त परियोजना बाढ़ नियंत्रण, सिंचाई और पेयजल आपूर्ति के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
RI News विश्लेषण
किशाऊ बांध परियोजना केवल एक जलविद्युत परियोजना नहीं है, बल्कि उत्तर भारत की जल सुरक्षा रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यमुना नदी देश की राजधानी दिल्ली सहित करोड़ों लोगों की जीवनरेखा है। पिछले कई वर्षों से नदी के प्रदूषण और घटते जलस्तर को लेकर चिंता जताई जाती रही है।
यदि परियोजना समयबद्ध तरीके से पूरी होती है तो यह यमुना पुनर्जीवन अभियान को नई दिशा दे सकती है। साथ ही 600 मेगावाट स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन भारत के हरित ऊर्जा लक्ष्यों को भी मजबूती देगा।
हालांकि परियोजना के सफल क्रियान्वयन के लिए पर्यावरणीय संतुलन, विस्थापन प्रबंधन और राज्यों के बीच समन्वय बनाए रखना बड़ी चुनौती रहेगा।
देश पर संभावित प्रभाव
- यमुना नदी में स्वच्छ जल प्रवाह बढ़ेगा।
- दिल्ली, उत्तर प्रदेश और हरियाणा को जल उपलब्धता में लाभ मिलेगा।
- 600 मेगावाट स्वच्छ जलविद्युत उत्पादन संभव होगा।
- बाढ़ नियंत्रण और सिंचाई क्षमता में सुधार होगा।
- राज्यों के बीच जल संसाधन प्रबंधन का नया मॉडल विकसित होगा।
निष्कर्ष
करीब 27 वर्षों से लंबित किशाऊ बांध परियोजना पर बनी सहमति उत्तर भारत के लिए एक महत्वपूर्ण विकास मानी जा रही है। यदि यह परियोजना तय समय पर पूरी होती है तो यमुना नदी के पुनर्जीवन, जल सुरक्षा और स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन के क्षेत्र में ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
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स्रोत: ANI, गृह मंत्रालय, जल शक्ति मंत्रालय
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स्रोतः आरआई न्यूज फीड नेटवर्क (एकीकृत) | संपादक मंडल: आरआई न्यूज डेस्क (RI News Desk)
📅 प्रकाशित तिथि: 17 Jun 2026 को 09:37 AM बजे | गाजीपुर, उत्तर प्रदेश



