तरका अमरूपुर महायज्ञ कलश यात्रा

तरका अमरूपुर महायज्ञ कलश यात्रा
तरका–अमरूपुर में श्री लक्ष्मीनारायण महायज्ञ की कलश यात्रा में गंगाजल लेकर लौटते श्रद्धालु

🛕 तरका–अमरूपुर में श्री लक्ष्मीनारायण महायज्ञ का भव्य शुभारंभ, गंगा जल से भरे गए हजारों कलश

— अवनीश राय | ब्यूरो चीफ (लोकल)

पंचायत तरका, अमरूपुर में 24 जनवरी से 1 फरवरी तक आयोजित होने वाले नौ दिवसीय श्री लक्ष्मीनारायण महायज्ञ का शनिवार को भव्य शुभारंभ हुआ। इस अवसर पर विशाल भाव–कलश यात्रा निकाली गई, जिसमें क्षेत्र के हजारों श्रद्धालुओं ने सहभागिता की।

सुबह से ही हर आयु वर्ग के स्त्री–पुरुष यज्ञ परिसर में एकत्र होने लगे थे। यज्ञाधीश महंत कन्हैया दास महाराज के मार्गदर्शन में यज्ञ स्थल पर निर्मित भव्य मंडप में काशी एवं अयोध्या से पधारे वैदिक पंडितों द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार के साथ विधिवत पूजन–अर्चन कराया गया। देवी–देवताओं के जयकारों से संपूर्ण वातावरण भक्तिमय हो उठा।

पूजन के उपरांत कलश यात्रा यज्ञ मंडप की परिक्रमा करते हुए गाजे–बाजे, घोड़ों और झंडा–पताकाओं के साथ निकाली गई। श्रद्धालु दोपहिया, तीनपहिया, चारपहिया वाहनों एवं ट्रैक्टर–ट्रॉली पर सवार होकर हाथों में कलश लिए
तरका, अमरूपुर, अवथहीं, दहिनवर, लोचाइन, किशुनपुरा, सुखडेहरा, भांवरकोल होते हुए राष्ट्रीय राजमार्ग–31 के रास्ते
मिर्जाबाद, मनिया, सजना, सलारपुर से लोहारपुर गंगा घाट पहुंचे।

गंगा घाट पर विधिवत पूजन–अर्चन के बाद श्रद्धालुओं ने अपने–अपने कलशों में गंगाजल भरा और पुनः यज्ञ स्थल लौटे। वहां निर्धारित स्थानों पर गंगाजल–पूरीत कलश स्थापित किए गए, जिनका उपयोग यज्ञ के दौरान पूजा–पाठ में किया जाएगा।

इस पुण्य अवसर पर यज्ञाधीश संत श्री कन्हैया दास जी महाराज, संरक्षक एवं संचालक संजय शास्त्री, यज्ञाचार्य काशी से पधारे पंडित अमित शास्त्री सहित काशी एवं अयोध्या से आए कुल 11 वैदिक पंडितों द्वारा यज्ञ मंडप एवं गंगा तट पर वैदिक मंत्रोच्चार के साथ विधिवत अनुष्ठान संपन्न कराया गया।


🔍 विश्लेषण

तरका–अमरूपुर क्षेत्र में इस स्तर का धार्मिक आयोजन न केवल आस्था का केंद्र बनता जा रहा है, बल्कि सामाजिक एकता और सांस्कृतिक चेतना को भी सशक्त करता है। काशी और अयोध्या जैसे तीर्थस्थलों से आए वैदिक पंडितों की सहभागिता ने आयोजन को विशेष गरिमा प्रदान की।

कलश यात्रा में जिस प्रकार गांव–गांव से श्रद्धालु वाहनों के काफिले के रूप में गंगा घाट तक पहुंचे, वह क्षेत्रीय धार्मिक समरसता और सामूहिक सहभागिता का सशक्त उदाहरण है।


📌 प्रभाव

  • सामाजिक समरसता एवं सांस्कृतिक चेतना का सुदृढ़ीकरण।

  • युवाओं और बच्चों में सनातन परंपराओं के प्रति आस्था व जुड़ाव।

  • आगामी नौ दिनों तक क्षेत्र में भक्ति, प्रवचन और यज्ञीय गतिविधियों से आध्यात्मिक वातावरण।

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