वाशिंगटन/तेहरान (RiNews): अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा इरान के साथ 107 दिनों से चल रहे युद्ध को समाप्त करने और एक शांति समझौते (Peace Deal) को अंतिम रूप देने की घोषणा के बाद वैश्विक स्तर पर चर्चा तेज हो गई है। वैश्विक ऊर्जा संकट को जन्म देने वाली इस जंग के थमने को जहाँ बड़ी राहत माना जा रहा है, वहीं भू-राजनीतिक विशेषज्ञों ने इस समझौते की सफलता पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
सेंटर फॉर स्ट्रेटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज (CSIS) में मिडिल ईस्ट प्रोग्राम के सीनियर फेलो, विल टॉडमैन ने इस समझौते का विश्लेषण करते हुए एक बड़ा दावा किया है। उनके अनुसार, यह शांति समझौता किसी दीर्घकालिक समाधान पर पहुंचने के बजाय केवल युद्ध से पहले की स्थिति (Pre-war Status Quo) को बहाल करता है। वाशिंगटन जिन बड़े उद्देश्यों और रणनीतिक लक्ष्यों के साथ तेहरान पर हमलावर हुआ था, वे इस शुरुआती समझौते में कहीं भी पूरे होते नहीं दिख रहे हैं।
अगले 60 दिन होंगे बेहद महत्वपूर्ण
विशेषज्ञों का कहना है कि दोनों देशों के बीच असली परीक्षा अब शुरू होगी। आगामी 60 दिनों के भीतर होने वाली कूटनीतिक बातचीत और गहन वार्ता यह तय करेगी कि क्या वाशिंगटन उन शर्तों और सुरक्षा गारंटी को हासिल कर पाता है, जिन्हें वह युद्ध के जरिए हासिल करना चाहता था। इस समझौते के तहत अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस स्विट्जरलैंड में इरान के मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बागेर गालबाफ के साथ इस समझौते के आधिकारिक दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करेंगे।
“दूसरी ओर, अमेरिकी संसद में इस समझौते को लेकर आंतरिक विरोध भी शुरू हो गया है। सीनेट अल्पसंख्यक नेता चक शूमर ने राष्ट्रपति ट्रंप से इस गुप्त समझौते को लेकर पूर्ण पारदर्शिता बरतने और कांग्रेस को तुरंत ब्रीफिंग देने की मांग की है।”
RiNews विश्लेषण और प्रभाव: इस शांति समझौते का सबसे बड़ा और तात्कालिक प्रभाव वैश्विक तेल और ऊर्जा बाजार पर पड़ेगा, जहां कच्चे तेल की कीमतों में आ रही अनिश्चितता अब थोड़ी कम हो सकती है। हालांकि, जब तक स्विट्जरलैंड में अंतिम हस्ताक्षर और अगले 60 दिनों की रूपरेखा साफ नहीं होती, तब तक मध्य-पूर्व (Middle East) में पूरी तरह शांति की गारंटी देना जल्दबाजी होगी।
स्रोतः आरआई न्यूज फीड नेटवर्क (एकीकृत) | संपादक मंडल: आरआई न्यूज डेस्क (RI News Desk)
📅 प्रकाशित तिथि: 16 Jun 2026 को 10:23 AM बजे | गाजीपुर, उत्तर प्रदेश



