ट्रंप का ग्रीनलैंड यू-टर्न: NATO चीफ से बातचीत के बाद टैरिफ़ प्लान छोड़ा

RI NEWS INTERNATIONAL DESK दिनांक: 22 जनवरी 2026

ट्रंप का ग्रीनलैंड यू-टर्न: यूरोपीय देशों पर टैरिफ़ प्लान छोड़ा, NATO के साथ ‘फ्यूचर डील’ का फ्रेमवर्क तैयार

विशेष रिपोर्ट

ट्रंप-रुट्टे की डावोस बैठक: ग्रीनलैंड पर 'फ्यूचर डील' फ्रेमवर्क तैयार, यूरोपीय टैरिफ़ रद्द
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और NATO महासचिव मार्क रुट्टे डावोस में बाइलेटरल मीटिंग के दौरान। इस मुलाकात के बाद ट्रंप ने ग्रीनलैंड पर ‘फ्यूचर डील’ फ्रेमवर्क की घोषणा की और टैरिफ़ धमकी वापस ली। (फोटो: BBC RSS Feed

स्विस शहर डावोस में विश्व आर्थिक मंच (WEF) के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बड़ा यू-टर्न लिया है। उन्होंने ग्रीनलैंड पर अमेरिकी नियंत्रण की अपनी पुरानी मांग को लेकर यूरोपीय देशों पर लगाए जाने वाले 10% टैरिफ़ की धमकी वापस ले ली है। ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर पोस्ट करते हुए कहा कि नाटो महासचिव मार्क रुट्टे के साथ “बहुत उत्पादक बैठक” के बाद ग्रीनलैंड और पूरे आर्कटिक क्षेत्र को लेकर “फ्यूचर डील” का फ्रेमवर्क तैयार हो गया है। इस समझ के आधार पर 1 फरवरी से लागू होने वाले टैरिफ़ अब नहीं लगाए जाएंगे।

ट्रंप ने डावोस में अपने भाषण के दौरान पहले ग्रीनलैंड को “बड़ा, खूबसूरत बर्फ का टुकड़ा” बताते हुए कहा था कि अमेरिका इसे “राइट, टाइटल और ओनरशिप” के साथ चाहता है, लेकिन बल प्रयोग नहीं करेगा। उन्होंने यूरोपीय सहयोगियों पर तंज कसा था कि वे अमेरिका की सुरक्षा चिंताओं को समझ नहीं रहे। लेकिन कुछ घंटों बाद ही उन्होंने नाटो प्रमुख के साथ बैठक का हवाला देते हुए टैरिफ़ वापस लेने की घोषणा की। ट्रंप ने लिखा, “हमने ग्रीनलैंड और पूरे आर्कटिक क्षेत्र को लेकर फ्यूचर डील का फ्रेमवर्क बनाया है। इस समझ के आधार पर 1 फरवरी से टैरिफ़ नहीं लगाए जाएंगे।”

यह धमकी पिछले हफ्तों में ट्रंप की ओर से ग्रीनलैंड पर दबाव बढ़ाने के बाद आई थी। डेनमार्क (जिसके अधीन ग्रीनलैंड स्वायत्त क्षेत्र है), नॉर्वे, स्वीडन, फ्रांस, जर्मनी, ब्रिटेन, नीदरलैंड्स और फिनलैंड जैसे आठ यूरोपीय देशों पर 10% टैरिफ़ लगाने की घोषणा की गई थी, क्योंकि उन्होंने ग्रीनलैंड के अमेरिकी अधिग्रहण का विरोध किया था। इन देशों ने हाल ही में ग्रीनलैंड में सैन्य अभ्यास भी किए थे, जिसे ट्रंप ने उकसावा माना। इस विवाद से ट्रांसअटलांटिक संबंधों में गहरा संकट पैदा हो गया था, बाजारों में गिरावट आई और NATO में दरार की आशंका जताई गई।

ट्रंप के इस यू-टर्न से यूरोपीय नेताओं ने राहत जताई है। डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेट्टे फ्रेडरिक्सन ने कहा कि आर्कटिक सुरक्षा पर चर्चा “अच्छी और स्वाभाविक” है, और वे अमेरिका के “गोल्डन डोम” मिसाइल डिफेंस सिस्टम पर बातचीत के लिए तैयार हैं। नाटो महासचिव मार्क रुट्टे ने स्पष्ट किया कि ग्रीनलैंड की डेनिश संप्रभुता पर कोई चर्चा नहीं हुई, बल्कि आर्कटिक सुरक्षा, खनिज संसाधनों तक पहुंच और रूस-चीन की बढ़ती महत्वाकांक्षा को रोकने पर फोकस था। रुट्टे ने कहा कि “अभी बहुत काम बाकी है” और यह सिर्फ फ्रेमवर्क है, कोई अंतिम डील नहीं।

विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप की रणनीति उनकी पुरानी स्टाइल रही—धमकी देकर बातचीत की मेज पर मजबूत स्थिति बनाना। ग्रीनलैंड की सामरिक अहमियत बढ़ रही है, क्योंकि जलवायु परिवर्तन से नए जहाज मार्ग और दुर्लभ खनिज खुल रहे हैं। अमेरिका यहां पहले से थुले एयर बेस चलाता है, लेकिन ट्रंप अधिक पहुंच चाहते हैं। हालांकि, कई यूरोपीय सूत्रों ने कहा कि ट्रंप का “डील” दावा अतिरंजित है—यह सिर्फ बातचीत का आधार है, कोई लिखित समझौता नहीं।

इस घटना से ट्रांसअटलांटिक गठबंधन में तनाव तो कम हुआ, लेकिन विश्वास की कमी बनी हुई है। यूरोपीय संसद ने अमेरिका के साथ ट्रेड डील को फ्रीज कर दिया था, जो अब बहाल हो सकती है। बाजारों में राहत की लहर आई, लेकिन भविष्य में ऐसे विवाद फिर उभर सकते हैं। ट्रंप का यह कदम दिखाता है कि उनकी “अमेरिका फर्स्ट” नीति में लचीलापन भी है—जब दबाव बढ़े, तो पीछे हटना।

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