शांति समझौते के बीच होर्मुज पर छिड़ा नया विवाद
टैक्स नहीं, ‘सर्विस फीस’ वसूलने पर अड़ा ईरान
वैश्विक मीडिया रिपोर्ट्स और राजनयिक हलकों से आ रही खबरों के मुताबिक, ईरान ने ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ पर एक नया फलसफा पेश किया है। ईरान का कहना है कि वह जहाजों से कोई पारंपरिक टोल टैक्स या पारगमन कर (Transit Tax) नहीं वसूलना चाहता, बल्कि वह वहां मुहैया कराई जाने वाली नेविगेशन, सुरक्षा और अन्य तकनीकी सेवाओं के बदले ‘सर्विस फीस’ लेगा।
ईरान के उप-विदेश मंत्री काजिम गरीबादी के बयानों का हवाला देते हुए बताया गया है कि ईरान और ओमान मिलकर इस समंदर में जहाजों की सुरक्षा और सुचारू संचालन सुनिश्चित करने के लिए एक साझा सिस्टम तैयार कर रहे हैं। ईरान की दो-टूक दलील है कि जो देश या जहाज इस मार्ग की सुरक्षा सेवाओं का लाभ उठाएंगे, उन्हें इसके बदले तय फीस का भुगतान करना ही होगा।
ट्रंप का दावों पर पलटवार: ‘फर्जी खबरें फैलाई जा रही हैं’
इस बीच, अमेरिका और ईरान के बीच वित्तीय लेनदेन को लेकर भी अफवाहों का बाजार गर्म है। ऐसी खबरें उड़ रही थीं कि इस शांति समझौते (Peace Deal) के तहत अमेरिका ईरान को लगभग 300 अरब डॉलर की मदद या राहत देने जा रहा है।
इस दावे पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर कड़ा रुख अपनाते हुए इसे पूरी तरह खारिज कर दिया है। ट्रंप ने लिखा:
“ईरान इस बात पर सहमत हो गया है कि वह कभी भी परमाणु हथियार नहीं बनाएगा! इसके साथ ही, यह खबर कि अमेरिका ईरान को 300 अरब डॉलर (या 300 मिलियन डॉलर) दे रहा है, पूरी तरह से फर्जी (Fake News) है, जिसे विरोधियों द्वारा फैलाया जा रहा है।”
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी ट्रंप की तारीफ करते हुए कहा है कि राष्ट्रपति पहले दिन से इस रुख पर कायम थे कि ईरान को किसी भी कीमत पर परमाणु हथियार हासिल करने से रोका जाए और उनके इन सख्त प्रयासों का लाभ अब अमेरिकी जनता को मिल रहा है।
क्या होगा वैश्विक तेल और डेटा ट्रैफिक पर असर?
रणनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि ईरान होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों पर प्रति जहाज मोटी रकम (सर्विस फीस के नाम पर) वसूलने में कामयाब रहता है, तो यह वैश्विक तेल बाजार और शिपिंग कंपनियों के लिए बड़ा आर्थिक बोझ बन सकता है।
इतना ही नहीं, खुफिया रिपोर्ट्स यह भी इशारा कर रही हैं कि ईरान की नजर अब केवल तेल जहाजों पर ही नहीं, बल्कि होर्मुज के समुद्र तल से गुजरने वाली उन अंडरसी इंटरनेट केबल्स (Undersea Internet Cables) पर भी है जो एशिया और यूरोप के बीच डिजिटल लाइफलाइन का काम करती हैं। ईरान भविष्य में इस डेटा ट्रैफिक पर भी किसी तरह का डिजिटल चार्ज या फीस लगाने की रणनीति पर काम कर रहा है, जिससे दुनिया भर के तकनीकी और संचार क्षेत्रों में भी हलचल पैदा हो सकती है।
स्रोत: एबीपी लाइव (ABP Live) / वैश्विक मीडिया रिपोर्ट्स
स्रोतः आरआई न्यूज फीड नेटवर्क (एकीकृत) | संपादक मंडल: आरआई न्यूज डेस्क (RI News Desk)
📅 प्रकाशित तिथि: 16 Jun 2026 को 05:03 PM बजे | गाजीपुर, उत्तर प्रदेश



