
By RI Health Desk
देश के कई राज्यों में तापमान लगातार नए रिकॉर्ड बना रहा है। भीषण गर्मी और हीटवेव के कारण लोगों के स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ रहा है। ऐसे मौसम में सबसे बड़ा खतरा हीट स्ट्रोक यानी लू लगने का होता है। अक्सर लोग इसे सामान्य थकान, कमजोरी या गर्मी का असर समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार हीट स्ट्रोक एक गंभीर मेडिकल इमरजेंसी है, जो समय पर इलाज न मिलने पर जानलेवा भी साबित हो सकती है।
गर्मी के मौसम में बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और धूप में काम करने वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता होती है। जागरूकता और समय पर उपचार से ही इस खतरे को कम किया जा सकता है।
क्या है हीट स्ट्रोक?
मानव शरीर का अपना एक प्राकृतिक तापमान नियंत्रण तंत्र होता है। सामान्य परिस्थितियों में शरीर पसीने के माध्यम से खुद को ठंडा रखता है। लेकिन जब अत्यधिक गर्मी और उमस के कारण यह प्रणाली काम करना बंद कर देती है, तब हीट स्ट्रोक की स्थिति पैदा होती है।
ऐसे समय में शरीर का तापमान तेजी से बढ़ने लगता है और दिमाग, हृदय, किडनी तथा अन्य महत्वपूर्ण अंग प्रभावित हो सकते हैं। यदि समय पर चिकित्सा सहायता न मिले तो मरीज की स्थिति गंभीर हो सकती है।
इन संकेतों को बिल्कुल नजरअंदाज न करें
हीट स्ट्रोक अचानक नहीं होता। शरीर पहले कई चेतावनी संकेत देता है। यदि तेज गर्मी के दौरान शरीर असामान्य रूप से गर्म महसूस होने लगे, बार-बार चक्कर आएं, कमजोरी महसूस हो, त्वचा लाल या गर्म हो जाए, दिल की धड़कन तेज हो जाए या व्यक्ति भ्रम और बेचैनी महसूस करने लगे तो इसे सामान्य स्थिति मानने की भूल नहीं करनी चाहिए।
कई मामलों में मरीज को अत्यधिक पसीना आता है, जबकि कुछ गंभीर स्थितियों में पसीना आना भी बंद हो सकता है। यदि व्यक्ति की प्रतिक्रिया धीमी पड़ने लगे, बोलने में परेशानी हो या बेहोशी जैसे लक्षण दिखाई दें तो तत्काल चिकित्सकीय सहायता की आवश्यकता होती है।
लू लगने पर क्या करें?
यदि किसी व्यक्ति में हीट स्ट्रोक के लक्षण दिखाई दें तो सबसे पहले उसे धूप और गर्म वातावरण से दूर किसी ठंडी या छायादार जगह पर ले जाएं। शरीर को ठंडा करने के लिए ठंडे पानी की पट्टियां रखें और पंखा, कूलर या एयर कंडीशनर की सहायता लें।
यदि मरीज पूरी तरह होश में है तो उसे पानी, ओआरएस या अन्य तरल पदार्थ दिए जा सकते हैं। साथ ही शरीर के अतिरिक्त कपड़ों को ढीला कर देना चाहिए ताकि शरीर का तापमान तेजी से कम हो सके।
यदि मरीज बेहोश हो या उसकी हालत लगातार बिगड़ रही हो तो बिना देरी किए अस्पताल पहुंचाना चाहिए।
क्या न करें?
हीट स्ट्रोक की स्थिति में कुछ गलतियां मरीज की परेशानी को और बढ़ा सकती हैं। बेहोश व्यक्ति को जबरन पानी पिलाने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। लक्षणों को सामान्य थकान समझकर नजरअंदाज करना भी खतरनाक हो सकता है।
मरीज को गर्म वातावरण में छोड़ना, इलाज में देरी करना या केवल घरेलू उपायों पर निर्भर रहना भी गंभीर परिणाम दे सकता है। यदि स्थिति चिंताजनक लगे तो तुरंत विशेषज्ञ चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए।
किन लोगों को ज्यादा खतरा होता है?
हीट स्ट्रोक का खतरा सभी लोगों में समान नहीं होता। छोटे बच्चों और बुजुर्गों का शरीर तापमान को नियंत्रित करने में अपेक्षाकृत कमजोर होता है, इसलिए वे अधिक जोखिम में रहते हैं।
इसके अलावा गर्भवती महिलाएं, हृदय रोगी, मधुमेह के मरीज, उच्च रक्तचाप से पीड़ित लोग तथा लंबे समय तक धूप में काम करने वाले मजदूर, किसान, ट्रैफिक पुलिसकर्मी और निर्माण कार्य से जुड़े कर्मचारी भी अधिक संवेदनशील माने जाते हैं।
खिलाड़ियों और खुले मैदान में लंबे समय तक अभ्यास करने वाले युवाओं को भी गर्मी के मौसम में विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।
RI स्वास्थ्य विश्लेषण
जलवायु परिवर्तन और लगातार बढ़ती गर्मी ने हीट स्ट्रोक को एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती बना दिया है। हर वर्ष देश के विभिन्न हिस्सों में लू के कारण लोगों की तबीयत बिगड़ने और मौतों की खबरें सामने आती हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि जागरूकता, पर्याप्त पानी का सेवन, दोपहर की तेज धूप से बचाव और समय पर चिकित्सा सहायता इस खतरे को काफी हद तक कम कर सकती है।
वर्तमान समय में आवश्यकता केवल इलाज की नहीं, बल्कि बचाव और जागरूकता की भी है। यदि लोग शुरुआती संकेतों को पहचानना सीख जाएं तो अनेक गंभीर मामलों को रोका जा सकता है।
निष्कर्ष
हीट स्ट्रोक कोई सामान्य समस्या नहीं है, बल्कि एक ऐसी स्थिति है जो कुछ ही समय में गंभीर रूप ले सकती है। इसलिए गर्मी के मौसम में शरीर द्वारा दिए जाने वाले संकेतों को समझना और समय रहते उचित कदम उठाना बेहद जरूरी है।
याद रखें, लू से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका सावधानी, पर्याप्त पानी का सेवन और तेज धूप से बचना है। थोड़ी सी सतर्कता आपको और आपके परिवार को बड़ी परेशानी से बचा सकती है।
स्वास्थ्य सलाह: गर्मी के मौसम में पर्याप्त पानी पिएं, हल्के कपड़े पहनें और दोपहर 12 बजे से 4 बजे के बीच अनावश्यक रूप से धूप में निकलने से बचें।
स्रोतः आरआई न्यूज फीड नेटवर्क (एकीकृत) | संपादक मंडल: आरआई न्यूज डेस्क (RI News Desk)
📅 प्रकाशित तिथि: 17 Jun 2026 को 11:54 AM बजे | गाजीपुर, उत्तर प्रदेश


