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कैसे बना ‘केरल मॉडल एजुकेशन’ अभिभावकों की पहली पसंद? जानिए मुहम्मदाबाद यूसुफपुर के ग्रामीण अंचलों से RiNews की यह खास रिपोर्ट

RiNews विशेष ग्राउंड रिपोर्ट

Happy Indian parents walking with children in premium school uniforms holding books at a modern rural school campus under morning sunlight

रिपोर्टर: मुख्य संपादक, RiNews  |  स्रोत इनपुट: प्रबन्ध निदेशक श्री श्याम जायसवाल  |  दिनांक: 18 जून, 2026

गाजीपुर जिले की मुहम्मदाबाद यूसुफपुर तहसील और इसके आस-पास के ग्रामीण इलाकों में इन दिनों एक बहुत बड़ा सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है। यह बदलाव किसी राजनीति या सरकारी योजना से नहीं, बल्कि बच्चों की शिक्षा से जुड़ा हुआ है। आज के समय में जब प्राइवेट स्कूलों की महंगी फीस और हर महीने आने वाले नए-नए खर्चों से आम परिवार परेशान हैं, तब ग्रामीण इलाकों के अभिभावक एक नए विकल्प को हाथों-हाथ ले रहे हैं—केरल मॉडल स्कूल

आखिर ऐसा क्या हुआ कि इस स्कूल ने इतनी जल्दी ग्रामीण और अर्ध-शहरी अभिभावकों का दिल जीत लिया? क्या यह सिर्फ एक विज्ञापन है या इसके पीछे वाकई कोई ठोस काम चल रहा है? RiNews की टीम ने जब इस पूरे मामले की गहराई से पड़ताल की, तो कुछ ऐसी बातें सामने आईं जो वाकई हैरान करने वाली हैं। स्कूल के प्रबन्ध निदेशक श्री श्याम जायसवाल जी द्वारा साझा किए गए आंकड़ों और तथ्यों के आधार पर, हम आपके सामने एक निष्पक्ष और पूरी तरह से पारदर्शी रिपोर्ट रख रहे हैं।

नर्सरी से लेकर 12वीं तक की पक्की मान्यता: बच्चों के भविष्य की पूरी गारंटी

कई बार ग्रामीण क्षेत्रों में यह देखा जाता है कि स्कूल खुल तो जाते हैं, लेकिन उनके पास आगे की कक्षाओं की सही मान्यता नहीं होती। इस वजह से बच्चों को 8वीं या 10वीं के बाद दूसरे स्कूलों का रुख करना पड़ता है या फिर बोर्ड परीक्षा के समय भारी परेशानी उठानी पड़ती है। लेकिन केरल मॉडल स्कूल ने इस समस्या को जड़ से खत्म कर दिया है।

इस संस्थान को भारतीय शिक्षा बोर्ड (Affiliation No. UPOP26010163) से नर्सरी और KG से लेकर सीधे 12वीं कक्षा तक की पूर्ण राष्ट्रीय स्तर की मान्यता प्राप्त है। इसका मतलब यह है कि एक बार अगर बच्चे का दाखिला यहाँ हो गया, तो वह स्कूल बदलने की बिना किसी चिंता के अपनी इंटरमीडिएट (12वीं) तक की पढ़ाई एक ही छत के नीचे, एक ही मजबूत शैक्षिक माहौल में पूरी कर सकता है।

पैसे की बचत और बेहतरीन सुविधाएं: एक खुली और सीधी तुलना

अभिभावकों की सबसे बड़ी चिंता बजट को लेकर होती है। RiNews ने जब बाजार के अन्य प्राइवेट स्कूलों और केरल मॉडल स्कूल की व्यवस्थाओं को एक तराजू पर तौला, तो अंतर बिल्कुल साफ नजर आया।

क्र.मूल्यांकन के मुख्य बिंदु (सुविधाएं)केरल मॉडल स्कूलअन्य प्राइवेट स्कूल (अनुमानित)
1एडमिशन फीस (New Admission)✔ NILL / शून्य (₹0)✖ ₹500 से ₹3,000
2री-एडमिशन व क्लास ट्रांसफर चार्ज✔ NILL / शून्य (₹0)✖ ₹1,200 से ₹3,500
3स्कूली यूनिफॉर्म (School Dress)✔ विद्यालय खुद मुफ्त देता है✖ नहीं (बाजार से महंगी खरीद)
4बच्चों की कॉपियां और किताबें✔ पूर्णतः निशुल्क (FREE Books)✖ नहीं (सालाना भारी अतिरिक्त खर्च)
5सालाना मेगा नकद पुरस्कार योजना✔ हाँ (₹1,00,000 तक का इनाम)✖ ऐसी बड़ी योजना नहीं है
6नियमित योगाभ्यास (Health Classes)✔ हाँ (पतंजलि योगपीठ के शिक्षक)✖ सिर्फ खानापूर्ति की व्यवस्था
7कंप्यूटर कोडिंग और प्रैक्टिकल लैब✔ हाँ (O-Level पढ़ाई व सर्टिफिकेट)✖ केवल किताबों तक सीमित पढ़ाई

वो बड़ी बातें जो इस स्कूल को सबसे अलग और खास बनाती हैं

सिर्फ फीस माफ कर देना या मुफ्त किताबें बांटना ही किसी स्कूल की सफलता का पैमाना नहीं हो सकता। केरल मॉडल स्कूल ने पढ़ाई के स्तर को इतना ऊंचा उठा दिया है कि आज बड़े शहरों के नामी-गिरामी कान्वेंट स्कूल भी इनके सामने फीके नजर आ रहे हैं। आइए जानते हैं इन विशेष खूबियों के बारे में विस्तार से:

1. ‘कॉम्पिटिटिव ज्ञान केरल एग्जाम’—लाखों के नकद पुरस्कारों की बौछार

बच्चों के अंदर से परीक्षा का डर निकालने और उनमें आगे बढ़ने की होड़ पैदा करने के लिए स्कूल हर साल एक विशेष परीक्षा आयोजित करता है, जिसे ‘Competitive Gyan Kerala Exam’ नाम दिया गया है। इस परीक्षा में शानदार प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को हर साल सीधे नकद पुरस्कार देकर सम्मानित किया जाता है। पुरस्कार की राशि इतनी बड़ी है कि ग्रामीण इलाकों के लिए यह किसी वरदान से कम नहीं है:

  • प्रथम पुरस्कार (First Prize): पूरे ₹1,00,000 (एक लाख रुपये) का नकद इनाम।
  • द्वितीय पुरस्कार (Second Prize): ₹50,000 (पचास हजार रुपये) का नकद इनाम।
  • तृतीय पुरस्कार (Third Prize): ₹25,000 (पच्चीस हजार रुपये) का नकद इनाम।
  • छोटे बच्चों के लिए विशेष सम्मान: स्कूल केवल बड़ी क्लास के बच्चों पर ध्यान नहीं देता, बल्कि नर्सरी, LKG और UKG के नन्हे मुन्नों के लिए भी ₹10,500 के तीन बड़े नकद पुरस्कार रखे गए हैं।

2. शारीरिक और मानसिक विकास: पतंजलि योगपीठ के राष्ट्रीय शिक्षकों का साथ

आजकल के दौर में बच्चों पर पढ़ाई का मानसिक तनाव बहुत ज्यादा बढ़ गया है। इसके समाधान के लिए स्कूल ने देश की सबसे प्रतिष्ठित संस्था ‘पतंजलि योगपीठ’ के साथ हाथ मिलाया है। स्कूल में पतंजलि योगपीठ के प्रमाणित राष्ट्रीय स्तर के योग शिक्षक नियमित रूप से आते हैं और बच्चों को योगाभ्यास, प्राणायाम और ध्यान (Meditation) की विशेष ट्रेनिंग देते हैं। इससे न केवल बच्चों का स्वास्थ्य अच्छा रहता है, बल्कि उनकी याद रखने की क्षमता (Memory Power) और एकाग्रता में भी भारी सुधार देखा गया है।

3. अंग्रेजी भाषा की असली ताकत: सीधे केरल के क्वालिफाइड टीचर्स

हम सभी जानते हैं कि पूरे देश में केरल राज्य की शिक्षा और वहां के लोगों की अंग्रेजी संवाद क्षमता (English Communication) सबसे बेहतरीन मानी जाती है। ग्रामीण अभिभावकों का हमेशा से यह सपना रहता है कि उनके बच्चे भी फराटेदार अंग्रेजी बोलें। अभिभावकों के इसी सपने को सच करने के लिए केरल मॉडल स्कूल ने सीधे केरल राज्य से उच्च योग्यता प्राप्त (Highly Qualified) विशेषज्ञ शिक्षकों को अपने यहाँ तैनात किया है। ये शिक्षक बच्चों को खेल-खेल में और बहुत ही सहज ढंग से अंग्रेजी बोलना और लिखना सिखाते हैं, जिससे बच्चों का हिचकिचाना पूरी तरह दूर हो जाता है।

4. डिजिटल क्रांति: O-Level स्टैंडर्ड की कंप्यूटर क्लासेस और सर्टिफिकेशन

आज का युग कंप्यूटर और इंटरनेट का युग है। सामान्य स्कूलों में बच्चों को सिर्फ कंप्यूटर की थ्योरी पढ़ा दी जाती है या हफ्ते में एक दिन लैब ले जाकर छोड़ दिया जाता है। लेकिन यहाँ ऐसा नहीं है। केरल मॉडल ग्रुप के स्कूलों में बच्चों को सीधे O-Level पाठ्यक्रम के मानकों के अनुसार कंप्यूटर कोडिंग, सॉफ्टवेयर की बुनियादी बातें और प्रैक्टिकल सिखाया जाता है। सबसे अच्छी बात यह है कि पढ़ाई पूरी होने पर बच्चों को इसका बाकायदा प्रामाणिक सर्टिफिकेशन भी दिया जाता है, जो आगे चलकर उनके करियर में बहुत मददगार साबित होगा।

अभिभावकों की जुबानी: क्यों बढ़ा केरल मॉडल स्कूल पर भरोसा?

RiNews की टीम ने जब मुहम्मदाबाद यूसुफपुर तहसील के कुछ ग्रामीण अभिभावकों से बात की, तो उनका संतोष साफ़ झलक रहा था। एक अभिभावक ने बताया, “पहले हर साल अप्रैल का महीना आते ही हमें चिंता सताने लगती थी कि किताबों और नई यूनिफॉर्म के लिए इतने पैसे कहाँ से आएंगे। लेकिन जब से बच्चे को केरल मॉडल स्कूल में भेजा है, तब से एडमिशन फीस और किताबों का खर्च पूरी तरह खत्म हो गया है। सबसे बड़ी बात यह है कि यहाँ कोई छिपा हुआ चार्ज (Hidden Charge) नहीं लिया जाता।”

दूसरे अभिभावक ने बताया कि उनके बच्चे के अंदर ‘कॉम्पिटिटिव ज्ञान केरल एग्जाम’ की वजह से पढ़ने की एक नई ऊर्जा आ गई है। बच्चा अब खुद से आगे बढ़कर पढ़ाई करता है ताकि वह भी ₹1 लाख का पहला इनाम जीत सके। यही वो बारीक सुधार हैं, जिन्होंने इस स्कूल को क्षेत्र का सबसे लोकप्रिय संस्थान बना दिया है।

RiNews का संपादकीय दृष्टिकोण

मुहम्मदाबाद यूसुफपुर के ग्रामीण अंचल में शिक्षा के स्तर को ऊंचा उठाने के लिए प्रबन्ध निदेशक श्री श्याम जायसवाल जी का यह प्रयास वास्तव में एक मिसाल है। शिक्षा को व्यापार बनने से रोकना और ग्रामीण परिवेश के बच्चों को भी देश की सबसे सर्वश्रेष्ठ सुविधाएं बहुत ही कम खर्च में देना, एक बेहद सराहनीय कदम है। बिना किसी एडमिशन फीस के, मुफ्त किताबों और यूनिफॉर्म के साथ राष्ट्रीय स्तर के बोर्ड (भारतीय शिक्षा बोर्ड) की पढ़ाई देना समाज के हर तबके को सशक्त बना रहा है। पारदर्शी नीतियों और उच्च संस्कारों के साथ आगे बढ़ता यह स्कूल वाकई क्षेत्र की पहली पसंद बनने का पूरा हकदार है।

सच्ची, सटीक और मर्यादित खबरों के लिए हमेशा पढ़ते रहें ‘RiNews’, और अपने बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए सही फैसला चुनें।


स्रोतः आरआई न्यूज फीड नेटवर्क (एकीकृत) | संपादक मंडल: आरआई न्यूज डेस्क (RI News Desk)

📅 प्रकाशित तिथि: 18 Jun 2026 को 10:45 AM बजे | गाजीपुर, उत्तर प्रदेश

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