By RI News Desk | March 10, 2026
मिडिल ईस्ट संकट का भारत की अर्थव्यवस्था पर असर
मिडिल ईस्ट में बढ़ते ईरान-अमेरिका-इज़राइल युद्ध का असर अब वैश्विक ऊर्जा बाजार पर साफ दिखाई देने लगा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें $100 से $115 प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं। इसका सीधा प्रभाव भारत जैसे बड़े तेल आयातक देशों की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।
भारत में अभी पेट्रोल-डीजल की कीमत स्थिर
ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि भारत अपनी कुल जरूरत का लगभग 85% कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में अगर युद्ध लंबा चला और आपूर्ति प्रभावित हुई तो देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतें ₹10-15 प्रति लीटर तक बढ़ सकती हैं। हालांकि फिलहाल सरकार और तेल कंपनियों ने घरेलू कीमतों में कोई बढ़ोतरी नहीं की है।
LPG उत्पादन में 10% बढ़ोतरी
संभावित मांग को देखते हुए सरकार ने LPG उत्पादन लगभग 10% बढ़ा दिया है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि देश में गैस की कमी की खबरें सिर्फ अफवाह हैं और पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है।
सिलेंडर बुकिंग का इंतजार 21 से 25 दिन
घरेलू LPG की जमाखोरी रोकने के लिए नया नियम लागू किया गया है। अब सिलेंडर बुकिंग का न्यूनतम इंतजार 21 दिन से बढ़ाकर 25 दिन कर दिया गया है, ताकि सभी उपभोक्ताओं को नियमित रूप से गैस उपलब्ध हो सके।
भारत पर संभावित आर्थिक असर
विशेषज्ञों के अनुसार अगर मिडिल ईस्ट का संघर्ष लंबा खिंचता है तो भारत में कई आर्थिक प्रभाव दिखाई दे सकते हैं:
- पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर दबाव
- परिवहन लागत बढ़ने से महंगाई में वृद्धि
- ऊर्जा आयात बिल में बढ़ोतरी
- सरकार पर सब्सिडी और आपूर्ति प्रबंधन का दबाव
RI News निष्कर्ष
ईरान-अमेरिका-इज़राइल युद्ध केवल क्षेत्रीय संघर्ष नहीं है बल्कि इसका असर वैश्विक ऊर्जा बाजार और अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। भारत के लिए सबसे बड़ी चुनौती तेल आपूर्ति को स्थिर बनाए रखना और महंगाई को नियंत्रित रखना होगी।
स्रोत (Sources)
- Reuters – Global Oil Market News
- BBC News – Oil Prices and Global Economy
- Al Jazeera – Middle East Conflict and Energy Market
- The Hindu – Crude Oil and Indian Economy
- Times of India – Fuel Prices in India
स्रोतः आरआई न्यूज फीड नेटवर्क (एकीकृत) | संपादक मंडल: आरआई न्यूज डेस्क (RI News Desk)
📅 प्रकाशित तिथि: 10 Mar 2026 को 07:56 PM बजे | गाजीपुर, उत्तर प्रदेश



