नई दिल्ली, 23 अप्रैल 2026: देश की शिक्षा व्यवस्था में एक बड़ा बदलाव करते हुए केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने कक्षा 6 से तीन भाषा नियम को अनिवार्य कर दिया है। यह नया नियम राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) और राष्ट्रीय पाठ्यचर्या ढांचा (NCFSE 2023) के तहत लागू किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य छात्रों में बहुभाषीय क्षमता विकसित करना और भारतीय भाषाओं को बढ़ावा देना है।
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CBSE के नए तीन भाषा नियम के बीच कक्षा 6 के छात्र पढ़ाई करते हुए
क्या है नया तीन भाषा फॉर्मूला?
CBSE के नए निर्देशों के अनुसार अब छात्रों को तीन भाषाएं पढ़नी होंगी, जिन्हें R1, R2 और R3 के रूप में वर्गीकृत किया गया है। इनमें सबसे महत्वपूर्ण शर्त यह है कि तीनों में से कम से कम दो भाषाएं भारतीय होनी चाहिए।
R1: मुख्य भाषा (उच्च स्तर की पढ़ाई)
R2: दूसरी भाषा
R3: तीसरी भाषा (कक्षा 6 से अनिवार्य)
यदि कोई स्कूल अंग्रेजी को मुख्य भाषा के रूप में रखता है, तो उसे विदेशी भाषा माना जाएगा। ऐसे में छात्र को दो भारतीय भाषाएं जैसे हिंदी और संस्कृत पढ़ना अनिवार्य होगा।
कौन-से विकल्प होंगे मान्य?
उदाहरण के तौर पर:
✔ अंग्रेजी + हिंदी + संस्कृत → वैध
❌ हिंदी + अंग्रेजी + फ्रेंच → अमान्य
इस बदलाव के बाद कई अंग्रेजी माध्यम स्कूलों में फ्रेंच, जर्मन और स्पेनिश जैसी विदेशी भाषाओं को हटाकर संस्कृत को तीसरी भाषा के रूप में लागू किया जा रहा है।
कब से लागू होगा यह नियम?
CBSE ने स्पष्ट किया है कि यह नियम शैक्षणिक सत्र 2026-27 से कक्षा 6 में लागू होगा। 9 अप्रैल 2026 को जारी सर्कुलर में सभी स्कूलों को 7 दिनों के भीतर इसे लागू करने का निर्देश दिया गया है।
यह व्यवस्था चरणबद्ध तरीके से लागू होगी:
2026-27: कक्षा 6 से शुरुआत
आगे: कक्षा 7-8 में विस्तार
2031: कक्षा 10 बोर्ड तक पूर्ण लागू
अंग्रेजी माध्यम स्कूलों पर क्या असर पड़ेगा?
इस बदलाव से सबसे ज्यादा सवाल अंग्रेजी माध्यम स्कूलों को लेकर उठ रहे हैं। CBSE ने स्पष्ट किया है कि स्कूलों का शिक्षण माध्यम (Medium of Instruction) अंग्रेजी ही रहेगा।
गणित, विज्ञान और सामाजिक विज्ञान जैसे विषय अंग्रेजी में ही पढ़ाए जाएंगे। बदलाव केवल भाषा विषयों तक सीमित रहेगा।
हालांकि, जहां पहले विदेशी भाषाएं पढ़ाई जाती थीं, अब वहां संस्कृत या अन्य भारतीय भाषाओं को प्राथमिकता दी जा रही है।
संस्कृत को क्यों मिल रहा है बढ़ावा?
शिक्षा विशेषज्ञों के अनुसार यह कदम भारतीय ज्ञान परंपरा को मजबूत करने के लिए उठाया गया है। संस्कृत को भारतीय भाषाओं की मूल भाषा माना जाता है और इसका संबंध प्राचीन साहित्य, विज्ञान और दर्शन से है।
NEP 2020 का मुख्य उद्देश्य है:
- छात्रों में बहुभाषीय क्षमता विकसित करना
- भारतीय संस्कृति से जुड़ाव बढ़ाना
- मातृभाषा आधारित समझ को मजबूत करना
- राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा देना
माता-पिता और छात्रों के सामने क्या चुनौतियां?
यह बदलाव कई अभिभावकों के लिए चिंता का विषय बन रहा है। खासकर वे छात्र जो पहले से फ्रेंच या अन्य विदेशी भाषा पढ़ रहे थे, उन्हें अब नई भाषा अपनानी पड़ेगी।
विशेषज्ञों की सलाह:
- स्कूल से तुरंत संपर्क कर भाषा विकल्प की जानकारी लें
- संस्कृत सीखने के लिए नियमित अभ्यास जरूरी है
- यह बदलाव लंबी अवधि (कक्षा 10 तक) के लिए है, इसलिए धैर्य रखें
स्कूलों के सामने क्या चुनौतियां हैं?
स्कूलों को भी इस बदलाव के साथ कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, जैसे:
- संस्कृत और अन्य भाषाओं के शिक्षकों की कमी
- नए टाइमटेबल का निर्माण
- पाठ्यपुस्तकों की सीमित उपलब्धता
CBSE ने स्पष्ट किया है कि किताबें उपलब्ध न होने पर भी स्कूल स्थानीय संसाधनों से पढ़ाई शुरू करें।
भविष्य की दिशा क्या होगी?

यह नियम भारत में बहुभाषीय शिक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है। इसका उद्देश्य छात्रों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाना है, साथ ही उन्हें अपनी जड़ों से जोड़े रखना है।
हालांकि कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि अचानक लागू किए गए इस बदलाव से छात्रों पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है, लेकिन सही क्रियान्वयन के साथ यह दीर्घकाल में लाभकारी साबित हो सकता है।
निष्कर्ष
कक्षा 6 से तीन भाषा नियम लागू करना भारतीय शिक्षा प्रणाली में एक बड़ा परिवर्तन है। अब अंग्रेजी माध्यम के छात्रों को भी संस्कृत या अन्य भारतीय भाषाएं सीखनी होंगी। यह बदलाव न केवल शिक्षा बल्कि संस्कृति और पहचान से भी जुड़ा हुआ है।
माता-पिता और छात्रों को चाहिए कि वे इस बदलाव को समझें, स्कूल से संवाद करें और इसे सकारात्मक रूप से अपनाएं।
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