खोजें लोड हो रहा है...
राष्ट्रीय डिजिटल समाचार मंच
ACADEMY
BREAKING
दिमाग की कसरत: सरकारी नौकरी परीक्षाओं के लिए रीजनिंग के सबसे ट्रिकी सवाल, अपनी तैयारी को परखें 107 दिनों की जंग के बाद अमेरिका-इरान में हुआ शांति समझौता केवल ‘दिखावा’? विशेषज्ञ का दावा- वाशिंगटन के इरादे रहे अधूरे भारत का विश्वगुरु बनना दुनिया में तबाही के लिए नहीं, बल्कि शांति के लिए होगा’; आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत का बड़ा बयान BIG STORIES यूएनएससी में भारत की स्थायी सदस्यता का स्लोवाकिया ने किया समर्थन; द्विपक्षीय संबंध ‘व्यापक साझेदारी’ में बदले चीनी खाते ही शरीर में शुरू हो जाते हैं ये 10 बदलाव, ज्यादातर लोगों को नहीं होती जानकारी भारत की ऊर्जा आपूर्ति सुरक्षित: 62 हजार टन LNG लेकर ‘दिशा’ जहाज होर्मुज पार, सरकार ने अफवाहों से बचने की दी सलाह दिमाग की कसरत: सरकारी नौकरी परीक्षाओं के लिए रीजनिंग के सबसे ट्रिकी सवाल, अपनी तैयारी को परखें 107 दिनों की जंग के बाद अमेरिका-इरान में हुआ शांति समझौता केवल ‘दिखावा’? विशेषज्ञ का दावा- वाशिंगटन के इरादे रहे अधूरे भारत का विश्वगुरु बनना दुनिया में तबाही के लिए नहीं, बल्कि शांति के लिए होगा’; आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत का बड़ा बयान BIG STORIES यूएनएससी में भारत की स्थायी सदस्यता का स्लोवाकिया ने किया समर्थन; द्विपक्षीय संबंध ‘व्यापक साझेदारी’ में बदले चीनी खाते ही शरीर में शुरू हो जाते हैं ये 10 बदलाव, ज्यादातर लोगों को नहीं होती जानकारी भारत की ऊर्जा आपूर्ति सुरक्षित: 62 हजार टन LNG लेकर ‘दिशा’ जहाज होर्मुज पार, सरकार ने अफवाहों से बचने की दी सलाह
×

भारत–अमेरिका ट्रेड डील: सस्ती थाली की कीमत किसान क्यों चुका रहा है?

भारत–अमेरिका ट्रेड डील प्रभाव से चिंतित भारतीय किसान
भारत–अमेरिका ट्रेड डील को लेकर किसानों और उपभोक्ताओं पर असर की चिंता
भारत–अमेरिका ट्रेड डील का किसानों और आम आदमी पर असर

भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित अंतरिम ट्रेड डील पर सियासी बयानबाज़ी तेज़ हो गई है, लेकिन असली बात बयानों की नहीं, आम आदमी और किसान पर पड़ने वाले असर की है। सरकार इसे ‘देने-लेने’ वाला समझौता बता रही है, जबकि किसान संगठन इसे भारतीय खेती के लिए बड़ा खतरा मान रहे हैं।

इस डील में अमेरिका से कुछ चीज़ों जैसे DDGS (एनिमल फीड के लिए), सोयाबीन ऑयल, बादाम-अखरोट जैसे ट्री नट्स, प्रोसेस्ड फ्रूट्स, वाइन आदि पर आयात शुल्क कम करने या हटाने की बात है। सरकार का साफ कहना है कि मुख्य संवेदनशील कृषि उत्पाद जैसे गेहूं, चावल, मक्का, सोयाबीन, दालें, दूध, पोल्ट्री, चीज़, मांस आदि पूरी तरह सुरक्षित हैं—कोई छूट नहीं दी गई। वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने कहा है कि किसानों के हितों की पूरी रक्षा हुई है और ये डील भारत के निर्यात को बढ़ाएगी।

लेकिन किसान संगठन (जैसे संयुक्त किसान मोर्चा – SKM) आशंका जता रहे हैं कि अप्रत्यक्ष असर पड़ सकता है। मिसाल के तौर पर:

  • कपास और दाल: भले मुख्य दालें सुरक्षित हों, लेकिन कुछ संबंधित या प्रोसेस्ड चीज़ों के सस्ते आने से घरेलू बाज़ार में कीमतें प्रभावित हो सकती हैं। महाराष्ट्र, गुजरात और तेलंगाना जैसे राज्यों के कपास किसानों पर पहले से ही दबाव है।
  • डेयरी और फल: अगर अमेरिकी चीज़, बटर, मिल्क पाउडर या बादाम-अखरोट सस्ते आए, तो छोटे दूध उत्पादकों और हिमाचल-जम्मू-कश्मीर के सेब-फल वाले किसानों की कमाई पर संकट आ सकता है।

शहर का फायदा बनाम गांव का नुकसान इस डील का सबसे बड़ा विरोधाभास यही है— शहर को सस्ती थाली, गांव को सस्ती फसल। यानी उपभोक्ता को तुरंत राहत (कुछ चीज़ें सस्ती हो सकती हैं), लेकिन किसान की कमाई पर लंबे समय तक चोट का डर। अगर किसान कमजोर हुआ, तो गांव की अर्थव्यवस्था की खरीदने की ताकत घटेगी, और इसका असर पूरे बाज़ार पर पड़ेगा।

सरकार का तर्क और सवाल सरकार कह रही है कि इस डील से भारत को टेक्सटाइल और इंजीनियरिंग सेक्टर में अमेरिकी बाज़ार में बेहतर पहुंच मिलेगी, जिससे नौकरियां बढ़ेंगी। सवाल ये है कि क्या कुछ औद्योगिक फायदों के बदले खेती जैसे संवेदनशील क्षेत्र में अप्रत्यक्ष जोखिम को नजरअंदाज किया जा सकता है?

‘आत्मनिर्भर भारत’ की कसौटी जब आत्मनिर्भर भारत की बात आती है, तो खेती उसकी रीढ़ मानी जाती है। ऐसे में कुछ आयात वाली चीज़ों पर निर्भरता बढ़ाना उस सोच से टकराता दिखता है। किसान संगठन इसी बात पर सरकार से जवाब मांग रहे हैं और 12 फरवरी को देशव्यापी विरोध की कॉल दे चुके हैं।

आगे क्या? अगर सरकार ने पूरी डील की डिटेल्स खुलकर जनता के सामने नहीं रखीं और हर सेक्टर के फायदे-नुकसान का साफ हिसाब नहीं दिया, तो ये मुद्दा सिर्फ नीति का नहीं रहेगा, आंदोलन का रूप ले सकता है।

आम आदमी के लिए सवाल अब सीधा है— क्या थाली थोड़ी सस्ती होने की कीमत किसान की टूटती कमर से चुकाई जाएगी? यही सवाल इस ट्रेड डील की असली परीक्षा है।

पीआईबी, वाणिज्य मंत्रालय के आधिकारिक बयान, संयुक्त किसान मोर्चा (SKM)

— RI News Desk | 7 फरवरी 2026


स्रोतः आरआई न्यूज फीड नेटवर्क (एकीकृत) | संपादक मंडल: आरआई न्यूज डेस्क (RI News Desk)

📅 प्रकाशित तिथि: 08 Feb 2026 को 11:53 AM बजे | गाजीपुर, उत्तर प्रदेश

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top