अटल बिहारी वाजपेयी के अपने और पराए दोनों क्यों थे उनके मुरीद

Desk: RI News Desk
नई दिल्ली | 25 दिसंबर 2025

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी भारतीय राजनीति के उन दुर्लभ नेताओं में रहे,
जिन्हें न केवल उनके समर्थक बल्कि राजनीतिक विरोधी भी सम्मान की नज़र से देखते थे।
सत्ता में हों या विपक्ष में, वाजपेयी की स्वीकार्यता दलगत सीमाओं से परे रही।

संवाद और सहमति की राजनीति

वाजपेयी की राजनीति टकराव के बजाय संवाद पर आधारित थी।
संसद में वे गंभीर असहमति के बीच भी मर्यादित भाषा और तर्क के साथ अपनी बात रखते थे,
जिससे विरोधी दलों में भी उनके प्रति भरोसा बना।

विचारधारा के साथ उदार दृष्टि

वे अपनी विचारधारा पर दृढ़ थे, लेकिन उसे टकराव का कारण नहीं बनने देते थे।
यही संतुलन उन्हें अलग पहचान देता है और अपने–पराए दोनों को जोड़ता है।

कूटनीति और मानवीय संवेदना

भारत–पाकिस्तान संबंधों में लाहौर यात्रा जैसी पहलें हों या वैश्विक मंच,
वाजपेयी ने संवाद और संतुलन को प्राथमिकता दी।
कवि-मन और संवेदनशील व्यक्तित्व ने उनकी राजनीति को मानवीय स्वर दिया।

विश्लेषण

वाजपेयी की व्यापक स्वीकार्यता का मूल कारण उनकी राजनीतिक शालीनता,
संवादशीलता और मानवीय दृष्टि थी।
उन्होंने असहमति के साथ सहमति की संस्कृति को मजबूत किया।

प्रभाव

आज की ध्रुवीकृत राजनीति में अटल बिहारी वाजपेयी का यह दृष्टिकोण
एक महत्वपूर्ण उदाहरण के रूप में देखा जाता है।

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BBC Hindi

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