खोजें लोड हो रहा है...
राष्ट्रीय डिजिटल समाचार मंच
ACADEMY
BREAKING
दिमाग की कसरत: सरकारी नौकरी परीक्षाओं के लिए रीजनिंग के सबसे ट्रिकी सवाल, अपनी तैयारी को परखें 107 दिनों की जंग के बाद अमेरिका-इरान में हुआ शांति समझौता केवल ‘दिखावा’? विशेषज्ञ का दावा- वाशिंगटन के इरादे रहे अधूरे भारत का विश्वगुरु बनना दुनिया में तबाही के लिए नहीं, बल्कि शांति के लिए होगा’; आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत का बड़ा बयान BIG STORIES यूएनएससी में भारत की स्थायी सदस्यता का स्लोवाकिया ने किया समर्थन; द्विपक्षीय संबंध ‘व्यापक साझेदारी’ में बदले चीनी खाते ही शरीर में शुरू हो जाते हैं ये 10 बदलाव, ज्यादातर लोगों को नहीं होती जानकारी भारत की ऊर्जा आपूर्ति सुरक्षित: 62 हजार टन LNG लेकर ‘दिशा’ जहाज होर्मुज पार, सरकार ने अफवाहों से बचने की दी सलाह दिमाग की कसरत: सरकारी नौकरी परीक्षाओं के लिए रीजनिंग के सबसे ट्रिकी सवाल, अपनी तैयारी को परखें 107 दिनों की जंग के बाद अमेरिका-इरान में हुआ शांति समझौता केवल ‘दिखावा’? विशेषज्ञ का दावा- वाशिंगटन के इरादे रहे अधूरे भारत का विश्वगुरु बनना दुनिया में तबाही के लिए नहीं, बल्कि शांति के लिए होगा’; आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत का बड़ा बयान BIG STORIES यूएनएससी में भारत की स्थायी सदस्यता का स्लोवाकिया ने किया समर्थन; द्विपक्षीय संबंध ‘व्यापक साझेदारी’ में बदले चीनी खाते ही शरीर में शुरू हो जाते हैं ये 10 बदलाव, ज्यादातर लोगों को नहीं होती जानकारी भारत की ऊर्जा आपूर्ति सुरक्षित: 62 हजार टन LNG लेकर ‘दिशा’ जहाज होर्मुज पार, सरकार ने अफवाहों से बचने की दी सलाह
×

अटल बिहारी वाजपेयी के अपने और पराए दोनों क्यों थे उनके मुरीद

Desk: RI News Desk
नई दिल्ली | 25 दिसंबर 2025

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी भारतीय राजनीति के उन दुर्लभ नेताओं में रहे,
जिन्हें न केवल उनके समर्थक बल्कि राजनीतिक विरोधी भी सम्मान की नज़र से देखते थे।
सत्ता में हों या विपक्ष में, वाजपेयी की स्वीकार्यता दलगत सीमाओं से परे रही।

संवाद और सहमति की राजनीति

वाजपेयी की राजनीति टकराव के बजाय संवाद पर आधारित थी।
संसद में वे गंभीर असहमति के बीच भी मर्यादित भाषा और तर्क के साथ अपनी बात रखते थे,
जिससे विरोधी दलों में भी उनके प्रति भरोसा बना।

विचारधारा के साथ उदार दृष्टि

वे अपनी विचारधारा पर दृढ़ थे, लेकिन उसे टकराव का कारण नहीं बनने देते थे।
यही संतुलन उन्हें अलग पहचान देता है और अपने–पराए दोनों को जोड़ता है।

कूटनीति और मानवीय संवेदना

भारत–पाकिस्तान संबंधों में लाहौर यात्रा जैसी पहलें हों या वैश्विक मंच,
वाजपेयी ने संवाद और संतुलन को प्राथमिकता दी।
कवि-मन और संवेदनशील व्यक्तित्व ने उनकी राजनीति को मानवीय स्वर दिया।

विश्लेषण

वाजपेयी की व्यापक स्वीकार्यता का मूल कारण उनकी राजनीतिक शालीनता,
संवादशीलता और मानवीय दृष्टि थी।
उन्होंने असहमति के साथ सहमति की संस्कृति को मजबूत किया।

प्रभाव

आज की ध्रुवीकृत राजनीति में अटल बिहारी वाजपेयी का यह दृष्टिकोण
एक महत्वपूर्ण उदाहरण के रूप में देखा जाता है।

Active Source:

BBC Hindi


स्रोतः आरआई न्यूज फीड नेटवर्क (एकीकृत) | संपादक मंडल: आरआई न्यूज डेस्क (RI News Desk)

📅 प्रकाशित तिथि: 25 Dec 2025 को 06:41 PM बजे | गाजीपुर, उत्तर प्रदेश

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top