सुप्रीम कोर्ट का AI फेक जजमेंट्स पर बड़ा एक्शन: यह गलती नहीं, मिसकंडक्ट है

Supreme Court action on AI generated fake judgments in trial courts

सुप्रीम कोर्ट ने AI से जनरेटेड फर्जी जजमेंट्स को गंभीर मिसकंडक्ट बताते हुए सख्त चेतावनी दी

AI फेक जजमेंट्स पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, ट्रायल कोर्ट जज पर गंभीर टिप्पणी

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जनरेटेड फर्जी और अस्तित्व में न आने वाले जजमेंट्स के इस्तेमाल को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि इस तरह के फर्जी जजमेंट्स पर आधारित फैसला कोई साधारण “निर्णय की गलती” नहीं, बल्कि गंभीर मिसकंडक्ट है और इसके कानूनी परिणाम होंगे।

जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस अलोक अराधे की पीठ ने यह टिप्पणी उस मामले में की, जहां आंध्र प्रदेश के एक ट्रायल कोर्ट जज द्वारा कथित तौर पर AI-जनरेटेड, नॉन-एक्जिस्टेंट जजमेंट्स का हवाला दिया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में स्वतः संज्ञान लेते हुए इसे न्यायिक प्रक्रिया की अखंडता से जुड़ा गंभीर विषय बताया।

सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी

27 फरवरी 2026 के आदेश में कोर्ट ने कहा, “ट्रायल कोर्ट द्वारा AI-जनरेटेड फर्जी या सिंथेटिक जजमेंट्स का इस्तेमाल न्यायिक प्रक्रिया की अखंडता पर सीधा प्रभाव डालता है। यह साधारण त्रुटि नहीं है, बल्कि गंभीर कदाचार है।” कोर्ट ने साफ किया कि इस मामले की गहराई से जांच की जाएगी।

अटॉर्नी जनरल और बार काउंसिल को नोटिस

सुप्रीम कोर्ट ने अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणि, सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और बार काउंसिल ऑफ इंडिया को नोटिस जारी किया है। साथ ही सीनियर एडवोकेट श्याम दिवान को इस मामले में अमाइकस क्यूरी नियुक्त किया गया है, ताकि AI के न्यायिक उपयोग से जुड़े व्यापक पहलुओं पर सहायता मिल सके।

AI और न्यायपालिका पर बढ़ती चिंता

हाल के वर्षों में AI-ड्राफ्टेड पिटीशन्स और कानूनी दस्तावेजों में फर्जी साइटेशन सामने आने के कई मामले सामने आ चुके हैं। सुप्रीम कोर्ट का यह रुख वकीलों और जजों दोनों के लिए एक स्पष्ट संदेश है कि AI टूल्स सहायक हो सकते हैं, लेकिन सत्यापन की जिम्मेदारी इंसानों की ही रहेगी।

विश्लेषण

यह फैसला भारतीय न्यायपालिका में AI के दुरुपयोग पर अब तक का सबसे सख्त संकेत माना जा रहा है। कोर्ट ने साफ कर दिया है कि AI टूल्स से पैदा होने वाली “हैलुसिनेशन” को अब साधारण भूल नहीं माना जाएगा। इससे जजों और वकीलों पर क्रॉस-वेरिफिकेशन की जिम्मेदारी और बढ़ेगी। यह मामला आगे चलकर पूरे देश के लिए AI गाइडलाइंस और न्यायिक प्रशिक्षण की दिशा तय कर सकता है।

प्रभाव

इस आदेश का असर देशभर की निचली अदालतों पर पड़ेगा। AI टूल्स का इस्तेमाल अधिक सतर्कता के साथ होगा और फर्जी साइटेशन पर सख्ती बढ़ेगी। बार काउंसिल AI उपयोग को लेकर नए नियम या अनिवार्य डिस्क्लोजर ला सकती है। लंबे समय में इससे न्यायिक प्रणाली की विश्वसनीयता मजबूत होगी और डिजिटल युग में न्याय की सुरक्षा सुनिश्चित होगी।
Indian Express
, 2 मार्च 2026 |

Bar & Bench

— RI News Desk

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