
RI NEWS | व्यापार डेस्क
दिनांक: 14 फ़रवरी 2026
शेयर बाजार गिरावट: विदेशी बिकवाली से डगमगाया सेंसेक्स
शुक्रवार को घरेलू शेयर बाज़ार में ज़बरदस्त बिकवाली देखने को मिली, जिससे सेंसेक्स 1,048 अंक टूटकर 82,627 के स्तर पर बंद हुआ। निफ्टी में भी तेज़ गिरावट दर्ज की गई। बाज़ार की इस कमजोरी के पीछे वैश्विक टेक शेयरों में आई तेज़ गिरावट और विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की भारी बिकवाली को प्रमुख कारण माना जा रहा है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, एक ही दिन में विदेशी निवेशकों ने लगभग ₹7,400 करोड़ के शेयर बेच दिए।
दिन भर के कारोबार में आईटी, मेटल और ऑटो सेक्टर के शेयरों पर दबाव सबसे अधिक रहा, जबकि बैंकिंग शेयरों में भी कमजोरी देखने को मिली। हालांकि, कुछ चुनिंदा शेयरों में घरेलू संस्थागत निवेशकों की खरीदारी से गिरावट को पूरी तरह बेलगाम होने से रोका गया। इसके बावजूद बाज़ार का समग्र माहौल नकारात्मक बना रहा और निवेशकों में सतर्कता साफ दिखाई दी।
विश्लेषण
शेयर बाज़ार की यह गिरावट केवल घरेलू कारणों का नतीजा नहीं है, बल्कि इसका सीधा संबंध वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों से है। अमेरिका और यूरोप में टेक सेक्टर पर दबाव, ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता और भू-राजनीतिक तनावों ने अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों में बेचैनी बढ़ाई है। इसका असर उभरते बाज़ारों पर भी पड़ा है, जहां विदेशी निवेशक जोखिम से बचने की रणनीति अपना रहे हैं।
विदेशी संस्थागत निवेशकों की बिकवाली के बीच यह सवाल अहम हो जाता है कि घरेलू बाज़ार कितनी मजबूती से इस दबाव को झेल सकता है। भारत की अर्थव्यवस्था के मूलभूत संकेतक अब भी अपेक्षाकृत मजबूत माने जा रहे हैं, लेकिन वैश्विक पूंजी के प्रवाह में आई अस्थिरता अल्पकाल में बाज़ार को प्रभावित करती रहेगी। ऐसे समय में घरेलू म्यूचुअल फंड और बीमा कंपनियों की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है, जिन्होंने आंशिक रूप से बाज़ार को सहारा दिया।
विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा गिरावट को केवल संकट के रूप में देखने के बजाय एक सुधार के चरण के रूप में समझना चाहिए। पिछले महीनों में तेज़ी से बढ़े शेयर मूल्यों के बाद बाज़ार में मुनाफावसूली स्वाभाविक मानी जा रही है। हालांकि, अनिश्चित वैश्विक माहौल के कारण निवेशकों की भावनाओं पर दबाव बना हुआ है।
प्रभाव
इस गिरावट का सीधा असर खुदरा निवेशकों पर पड़ सकता है, खासकर उन निवेशकों पर जो हाल के महीनों में तेज़ी के दौर में बाज़ार में प्रवेश कर चुके हैं। अल्पकाल में वोलैटिलिटी बढ़ने की संभावना है, जिससे निवेश निर्णय लेना और कठिन हो सकता है। विशेषज्ञ ऐसे समय में घबराहट में फैसले लेने से बचने की सलाह दे रहे हैं।
दीर्घकालिक दृष्टि से देखें तो भारतीय बाज़ार में सुधार की गुंजाइश बनी हुई है, बशर्ते वैश्विक परिस्थितियां अत्यधिक बिगड़ें नहीं। मजबूत घरेलू मांग, सरकारी पूंजीगत व्यय और सुधारों की निरंतरता बाज़ार को सहारा दे सकती है। आने वाले दिनों में निवेशकों की नजरें वैश्विक संकेतों, विदेशी निवेश प्रवाह और केंद्रीय बैंकों के रुख पर टिकी रहेंगी, जो बाज़ार की आगे की दिशा तय करेंगे।
स्रोत: Times of India
