
मुंबई: सप्ताह के पहले कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार दबाव में दिखाई दिया। दोपहर के कारोबार में सेंसेक्स करीब 470 अंक गिरकर 73,773 के स्तर पर कारोबार करता दिखा, जबकि निफ्टी 50 सूचकांक 151 अंक टूटकर 23,215 के आसपास पहुंच गया। बाजार में कमजोरी की प्रमुख वजह वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और तकनीकी शेयरों में बिकवाली रही।
बाजार पर दबाव क्यों बढ़ा?
विश्लेषकों के अनुसार इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। मध्य-पूर्व में संघर्ष की आशंका के कारण ब्रेंट क्रूड 97 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया। तेल कीमतों में तेजी का असर भारतीय अर्थव्यवस्था और कॉरपोरेट मुनाफे पर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
इसके अलावा अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों को लेकर सख्त रुख अपनाने की संभावनाओं ने भी वैश्विक बाजारों में दबाव बढ़ाया है। मजबूत डॉलर और विदेशी निवेशकों की सतर्कता का असर भारतीय बाजार पर भी दिखाई दिया।
IT और ऑटो शेयर सबसे ज्यादा प्रभावित
निफ्टी IT इंडेक्स में करीब 1 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई। प्रमुख आईटी कंपनियों में बिकवाली देखी गई। वैश्विक AI टेक शेयरों में कमजोरी का असर भारतीय टेक कंपनियों पर भी पड़ा।
ऑटो सेक्टर में भी दबाव देखने को मिला। FADA की मई बिक्री रिपोर्ट के बाद कई ऑटो शेयरों में 3 प्रतिशत तक गिरावट दर्ज की गई। इंडिगो के शेयर भी कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और विमान डिलीवरी संबंधी चिंताओं के कारण दबाव में रहे।
कुछ सेक्टरों ने दिखाई मजबूती
जहां एक ओर आईटी और ऑटो शेयर दबाव में रहे, वहीं फार्मा और हेल्थकेयर सेक्टर में खरीदारी देखने को मिली। निवेशकों ने अनिश्चित माहौल में अपेक्षाकृत सुरक्षित माने जाने वाले शेयरों की ओर रुख किया।
हालांकि दिन के निचले स्तरों से बाजार में कुछ रिकवरी भी देखने को मिली और सेंसेक्स करीब 550 अंक उछलकर अपने न्यूनतम स्तर से ऊपर आया। इससे संकेत मिला कि निवेशक अभी भी चुनिंदा स्तरों पर खरीदारी कर रहे हैं।
RI News विश्लेषण
मौजूदा गिरावट का सबसे बड़ा कारण मध्य-पूर्व में बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी है। यदि इजरायल-ईरान संघर्ष और बढ़ता है तो भारतीय बाजार पर दबाव जारी रह सकता है। दूसरी ओर घरेलू अर्थव्यवस्था की मजबूत वृद्धि दर और कॉरपोरेट आय बाजार को समर्थन प्रदान कर सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि निकट अवधि में निफ्टी के लिए 23,150 का स्तर महत्वपूर्ण रहेगा। यदि यह स्तर टूटता है तो बाजार में और कमजोरी देखने को मिल सकती है। वहीं स्थिरता लौटने पर निवेशकों को गुणवत्ता वाले शेयरों में अवसर मिल सकते हैं।
प्रभाव
- निवेशकों की संपत्ति में लाखों करोड़ रुपये की अस्थायी कमी।
- IT और ऑटो सेक्टर के शेयरों पर दबाव बढ़ा।
- कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों से महंगाई की चिंता बढ़ी।
- विदेशी निवेशकों का रुख बाजार की दिशा तय करेगा।
- निकट अवधि में बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।
— Saranash Kumar | National & Business Correspondent, Lucknow



