
टेलीकॉम स्पेक्ट्रम सुप्रीम कोर्ट फैसला
नई दिल्ली | 13 फरवरी 2026
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को टेलीकॉम सेक्टर से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में स्पष्ट किया कि टेलीकॉम स्पेक्ट्रम कोई निजी या कॉर्पोरेट संपत्ति नहीं है, बल्कि यह एक “सामुदायिक संसाधन” है, जिसका उपयोग संविधान के अनुच्छेद 39(बी) के तहत जनता के व्यापक हित में होना चाहिए। जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस अतुल एस. चंदुरकर की पीठ ने एयरसेल और रिलायंस कम्युनिकेशंस (RCom) के दिवाला मामलों में दूरसंचार विभाग (DoT) के पक्ष में फैसला सुनाते हुए कहा कि स्पेक्ट्रम को इंसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (IBC) के तहत ट्रांसफर या रिस्ट्रक्चर नहीं किया जा सकता।
विश्लेषण
सुप्रीम कोर्ट का यह निर्णय सार्वजनिक संसाधनों की संवैधानिक प्रकृति को एक बार फिर रेखांकित करता है। कोर्ट ने साफ किया कि सरकार स्पेक्ट्रम की मालिक नहीं, बल्कि जनता की ओर से उसकी ट्रस्टी है। ऐसे में किसी कंपनी के दिवालिया होने पर भी स्पेक्ट्रम पर निजी अधिकार स्थापित नहीं हो सकता। यह फैसला 2G स्पेक्ट्रम मामले के बाद बने उस न्यायिक सिद्धांत को मजबूत करता है, जिसमें प्राकृतिक संसाधनों को बाजार की वस्तु मानने से इनकार किया गया था। साथ ही, इसने IBC की सीमाओं को स्पष्ट करते हुए सार्वजनिक हित को प्राथमिकता दी है।
प्रभाव
इस फैसले का सीधा असर टेलीकॉम कंपनियों की दिवाला प्रक्रिया पर पड़ेगा। अब दिवालिया टेलीकॉम कंपनियां अपने स्पेक्ट्रम अधिकारों को ऋण चुकाने के लिए सीधे ट्रांसफर नहीं कर सकेंगी। इससे बैंकों और ऋणदाताओं की वसूली प्रक्रिया जटिल हो सकती है, लेकिन सरकार की नियामक भूमिका मजबूत होगी। भविष्य में स्पेक्ट्रम आवंटन और नियंत्रण में पारदर्शिता बढ़ने की संभावना है। यह निर्णय अन्य क्षेत्रों के लिए भी नज़ीर बनेगा, जहाँ राष्ट्रीय संसाधनों को कॉर्पोरेट संपत्ति के रूप में देखने की प्रवृत्ति रही है।
स्रोत
Economic Times: Supreme Court rules telecom spectrum cannot be transferred under IBC
LiveLaw: Telecom spectrum is a community resource, says Supreme Court
