बजट 2026 के बाद शेयर बाजार में तेज गिरावट, F&O टैक्स बढ़ोतरी से निवेशक धारणा कमजोर

बजट 2026: F&O टैक्स के असर से शेयर बाजार दबाव में

— सारांश कुमार | राष्ट्रीय एवं व्यापार संवाददाता, लखनऊ
दिनांक: 1 फरवरी 2026


📉 बजट के दिन बाजार का संदेश: भरोसा डगमगाया

केंद्रीय बजट 2026 के दिन भारतीय शेयर बाजार में दर्ज की गई तेज गिरावट ने यह साफ कर दिया कि बाजार ने इस बजट को उत्साह के बजाय सावधानी और चिंता के नजरिये से लिया है। शनिवार को बजट भाषण के तुरंत बाद Sensex और Nifty में आई भारी गिरावट केवल आंकड़ों का उतार-चढ़ाव नहीं थी, बल्कि यह निवेशक धारणा में आई अचानक कमजोरी का संकेत थी।


📊 आंकड़ों में गिरावट, असर में गहराई

बजट के दिन BSE Sensex 1,546.84 अंक गिरकर 80,722.94 पर बंद हुआ, जबकि कारोबार के दौरान यह 79,899 तक फिसल गया। वहीं NSE Nifty 504.95 अंक टूटकर 24,825.45 पर बंद हुआ।
इस गिरावट के साथ बाजार पूंजीकरण में ₹10 से ₹11 लाख करोड़ रुपये की निवेशक संपत्ति घट गई, जो हाल के वर्षों में बजट-डे पर सबसे बड़ी क्षति मानी जा रही है।


🌡️ VIX में उछाल ने बढ़ाई चिंता

बाजार की घबराहट का संकेत देने वाला India VIX 12–14 प्रतिशत तक उछल गया, जो यह दर्शाता है कि निवेशक केवल मौजूदा फैसलों से नहीं, बल्कि आने वाले समय को लेकर भी असमंजस में हैं। बजट के दिन VIX का इस स्तर तक बढ़ना पिछले छह वर्षों में दुर्लभ माना जा रहा है।


🔍 गिरावट की प्रमुख वजह: F&O पर STT में बढ़ोतरी

बाजार की इस प्रतिक्रिया की मुख्य वजह रही Futures & Options (F&O) ट्रेडिंग पर Securities Transaction Tax (STT) में भारी बढ़ोतरी।
बजट में—

  • Futures पर STT को 0.02% से बढ़ाकर 0.05%

  • Options premium और exercise पर टैक्स को 0.15% तक बढ़ाने की घोषणा की गई

ये बदलाव 1 अप्रैल 2026 से लागू होंगे, लेकिन बाजार ने इसका प्रभाव तुरंत कीमतों में शामिल कर लिया।


🏛️ सरकार का उद्देश्य और बाजार की व्याख्या

सरकार का कहना है कि F&O सेगमेंट में अत्यधिक सट्टेबाज़ी बढ़ रही थी और रिटेल निवेशकों को लगातार नुकसान हो रहा था। बजट में यह भी संकेत दिया गया कि F&O वॉल्यूम देश के GDP से कई गुना अधिक हो चुका है, जिसे नियंत्रित करना जरूरी है।

हालांकि, बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि अचानक और तीखी टैक्स बढ़ोतरी से डेरिवेटिव्स मार्केट की लिक्विडिटी प्रभावित हो सकती है, जिससे ट्रेडिंग वॉल्यूम और निवेशक भागीदारी पर नकारात्मक असर पड़ने की आशंका है।


⚠️ अन्य फैसलों ने भी दबाव बढ़ाया

F&O टैक्स के अलावा बजट में कुछ अन्य घोषणाओं ने भी बाजार की धारणा को कमजोर किया—

  • शेयर बायबैक पर कैपिटल गेंस टैक्स लगाने की घोषणा

  • विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) को लेकर कोई बड़ा सकारात्मक संकेत नहीं

  • वैश्विक बाजारों से पहले ही मिले कमजोर संकेत

इन सभी कारकों ने मिलकर बाजार पर दबाव को और गहरा कर दिया।


🏦 सेक्टरवार प्रदर्शन: PSU बैंक सबसे ज्यादा प्रभावित

बजट के बाद सबसे ज्यादा गिरावट—

  • PSU बैंकों में देखने को मिली, जहां औसतन 6 प्रतिशत तक की कमजोरी रही

  • मेटल और फाइनेंशियल सर्विसेज शेयरों में भी भारी बिकवाली दर्ज की गई

इसके मुकाबले IT सेक्टर अपेक्षाकृत स्थिर रहा, क्योंकि उस पर F&O टैक्स का सीधा असर सीमित माना जा रहा है।

🪙 सोना-चांदी भी दबाव में

बजट के बाद केवल शेयर बाजार ही नहीं, बल्कि कमोडिटी बाजार में भी कमजोरी दिखी।
MCX गोल्ड करीब 3 प्रतिशत टूटा, जबकि चांदी 9 प्रतिशत लोअर सर्किट में चली गई। यह संकेत है कि निवेशक फिलहाल जोखिम से दूरी बनाते हुए नकदी की ओर बढ़ रहे हैं।


🔮 आगे की राह: सतर्कता जरूरी

बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, सोमवार को भी बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है, क्योंकि—

  • FIIs की दिशा अभी स्पष्ट नहीं है

  • वैश्विक संकेत अस्थिर बने हुए हैं

  • F&O सेगमेंट में ट्रेडिंग पैटर्न बदल सकता है

हालांकि, लंबी अवधि के निवेशकों के लिए यह गिरावट चयनित क्षेत्रों में अवसर भी पैदा कर सकती है।


📝 निष्कर्ष

बजट 2026 ने यह स्पष्ट कर दिया है कि सरकार वित्तीय बाजारों में अनुशासन और जोखिम नियंत्रण को प्राथमिकता देना चाहती है। वहीं बाजार की प्रतिक्रिया यह दर्शाती है कि नीति बदलावों में क्रमिकता और स्पष्ट संवाद निवेशक भरोसे के लिए उतने ही जरूरी हैं।

अब आने वाले सप्ताह यह तय करेंगे कि यह गिरावट केवल तात्कालिक प्रतिक्रिया थी या बाजार की दिशा में किसी बड़े बदलाव का संकेत।

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