
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में केंद्रीय बजट 2026-27 प्रस्तुत किया।
इस बजट में मिडिल क्लास के लिए कोई नई प्रत्यक्ष कर राहत नहीं दी गई है,
लेकिन सरकार ने आर्थिक स्थिरता और संरचनात्मक विकास को प्राथमिकता देने का स्पष्ट संकेत दिया है।
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मिडिल क्लास के लिए बजट का संदेश
Union Budget 2026-27 में आयकर स्लैब में कोई नया बदलाव नहीं किया गया है।
₹12 लाख तक कर-मुक्त आय सीमा और ₹75,000 के स्टैंडर्ड डिडक्शन को यथावत रखा गया है।
सरकार का रुख यह दर्शाता है कि बार-बार कर ढांचे में बदलाव के बजाय
स्थिरता को अधिक महत्व दिया जा रहा है।
यह निर्णय उन करदाताओं के लिए निराशाजनक हो सकता है जो तत्काल राहत की उम्मीद कर रहे थे,
लेकिन सरकार का आकलन है कि नियंत्रित महंगाई, निवेश में वृद्धि और रोजगार सृजन
से मध्यम वर्ग की वास्तविक आय पर अप्रत्यक्ष असर पड़ेगा।
इंफ्रास्ट्रक्चर पर केंद्रित रणनीति
इस बजट में इंफ्रास्ट्रक्चर को आर्थिक वृद्धि का मुख्य आधार बनाया गया है।
सड़क, रेल, लॉजिस्टिक्स और शहरी परिवहन पर बढ़ा हुआ खर्च
केवल निर्माण गतिविधियों तक सीमित नहीं रहेगा,
बल्कि इससे जुड़े उद्योगों और सेवाओं में भी मांग बढ़ने की संभावना है।
पिछले वर्षों का अनुभव बताता है कि पूंजीगत व्यय
स्थानीय रोजगार, बैंकिंग गतिविधियों और छोटे कारोबारों को
एक श्रृंखलाबद्ध तरीके से प्रभावित करता है।
उत्तर प्रदेश और लखनऊ पर प्रभाव
इंफ्रास्ट्रक्चर आधारित इस बजट का असर उत्तर प्रदेश में अपेक्षाकृत अधिक दिख सकता है।
राज्य पहले से ही राष्ट्रीय एक्सप्रेसवे, रेलवे और औद्योगिक परियोजनाओं में
महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
लखनऊ जैसे शहरी केंद्रों में बेहतर कनेक्टिविटी,
हवाई सेवाओं के विस्तार और MSME क्लस्टर को समर्थन मिलने से
स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति मिलने की संभावना है।
RI News संपादकीय दृष्टिकोण
Union Budget 2026-27 को तात्कालिक लोकलुभावन घोषणाओं से अलग,
आर्थिक ढांचे को मजबूत करने वाला बजट माना जा सकता है।
कर स्थिरता और इंफ्रास्ट्रक्चर पर जोर
सरकार की दीर्घकालिक विकास रणनीति को दर्शाता है।
— RI News National Desk
प्रकाशन तिथि: 1 फरवरी 2026
