सक्रिय स्रोत और विश्लेषण: मोजतबा खामेनेई का बयान
इस ऐतिहासिक घटनाक्रम पर ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने राष्ट्र को संबोधित करते हुए एक बड़ा बयान दिया है। टाइम्स ऑफ इंडिया द्वारा ट्रैक किए गए आधिकारिक स्रोत के अनुसार, खामेनेई ने कहा कि यह समझौता ईरान के किसी दबाव में आकर नहीं किया गया है, बल्कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी मजबूरी और हताशा के चलते इस समझौते के लिए हर संभव हथकंडे का इस्तेमाल किया।
खामेनेई ने स्पष्ट किया, “यह साफ होना चाहिए कि भविष्य में होने वाली आमने-सामने की बातचीत का मतलब यह कतई नहीं है कि ईरान दुश्मन (अमेरिका) के रुख को स्वीकार कर रहा है।” उन्होंने यह भी खुलासा किया कि शुरुआत में उन्हें इस समझौते पर आपत्ति थी, लेकिन राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन और राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद से यह आश्वासन मिलने के बाद उन्होंने हरी झंडी दी कि ‘प्रतिरोध मोर्चे’ (Resistance Front) और ईरानी राष्ट्र के अधिकारों से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
अमेरिका और ईरान के बीच 60 दिनों की डी-एस्केलेशन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। (सांकेतिक चित्र)
दूरगामी प्रभाव (Impact Analysis): भारत को बड़ी राहत
भारत के संदर्भ में इस समझौते का प्रभाव गेम-चेंजर साबित होने वाला है। भारत के ऊर्जा क्षेत्र के लिए यह एक बड़ी जीत है। हॉर्मुज जलडमरूमध्य के खुलते ही एलएनजी (LNG) टैंकर ‘दिशा’ सुरक्षित रूप से गुजरात के तट पर पहुंच चुका है, जिसने भारतीय ऊर्जा सुरक्षा को बड़ी मजबूती दी है। भारत में ईरान के राजदूत मोहम्मद फथाली ने भी इस समझौते को क्षेत्रीय और वैश्विक स्थिरता के लिए एक टर्निंग पॉइंट बताया है। अगले 60 दिनों के भीतर दोनों देश प्रतिबंधों, सुरक्षा मुद्दों और परमाणु कार्यक्रम पर एक व्यापक समझौते के लिए रूपरेखा तैयार करेंगे।
स्रोतः आरआई न्यूज फीड नेटवर्क (एकीकृत) | संपादक मंडल: आरआई न्यूज डेस्क (RI News Desk)
📅 प्रकाशित तिथि: 19 Jun 2026 को 05:58 PM बजे | गाजीपुर, उत्तर प्रदेश



