खोजें लोड हो रहा है...
राष्ट्रीय डिजिटल समाचार मंच
ACADEMY
BREAKING
ग्लोबल मार्केट में बड़ा उलटफेर: ईरान-यूएस डील के बाद कच्चे तेल में मचेगी हलचल; भारत पर पड़ेगा दोहरा असर, जानें पूरा समीकरण RINEWS रोजगार समाचार SBI PO Vacancy 2026: स्टेट बैंक में सरकारी नौकरी का बड़ा मौका, 1500 पदों पर आवेदन शुरू; जानें योग्यता और शानदार सैलरी गाजीपुर में बिजली विभाग की प्रताड़ना से दुकानदार की मौत: विजिलेंस के जेई, एसआई और हेड कांस्टेबल पर एफआईआर; अमीन निलंबित नमक कम करके नहीं घटेगा हार्ट अटैक का खतरा! असली सोडियम तो इन फूड्स से बढ़ रहा है, कब लेंगे सही फैसला? परमाणु महाशक्तियों में मची होड़: G-7 समिट में ट्रंप का बड़ा दावा, ‘5 साल में अमेरिका के बराबर पहुंच सकता है चीन’ कैसे बना ‘केरल मॉडल एजुकेशन’ अभिभावकों की पहली पसंद? जानिए मुहम्मदाबाद यूसुफपुर के ग्रामीण अंचलों से RiNews की यह खास रिपोर्ट
×

ग्लोबल मार्केट में बड़ा उलटफेर: ईरान-यूएस डील के बाद कच्चे तेल में मचेगी हलचल; भारत पर पड़ेगा दोहरा असर, जानें पूरा समीकरण

RiNews बिजनेस विशेष

ग्लोबल मार्केट में बड़ा उलटफेर: ईरान-यूएस डील के बाद कच्चे तेल में मचेगी हलचल; भारत पर पड़ेगा दोहरा असर, जानें पूरा स...

RiNews कॉर्पोरेट डेस्क: वैश्विक भू-राजनीति और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में इस समय जबरदस्त उथल-पुथल का दौर चल रहा है। एक तरफ जहां अमेरिका और ईरान के बीच हुए ऐतिहासिक शांति समझौते के बाद रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण ‘हॉर्मुज जलडमरूमध्य’ (Strait of Hormuz) दोबारा खुलने जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की भारी बाढ़ आने की संभावनाओं के बीच कीमतें लगातार नीचे गिर रही हैं। इस बदलते आर्थिक परिदृश्य के बीच, भारत सरकार बुनियादी ढांचे और रोजगार सृजन को बनाए रखने के लिए विश्व बैंक (World Bank) और एशियाई विकास बैंक (ADB) से लगभग $2.5 बिलियन (करीब 20 हजार करोड़ रुपये) के बड़े कर्ज के लिए बातचीत कर रही है।

हॉर्मुज जलमार्ग खुलते ही एशिया में उमड़ेगा 6.2 करोड़ बैरल कच्चा तेल

अंतरराष्ट्रीय बाजार के ताजा इनपुट के अनुसार, यूएस-ईरान शांति समझौते के बाद हॉर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते लगभग 62 मिलियन (6.2 करोड़) बैरल कच्चा तेल एशियाई बाजारों में पहुंचने के लिए तैयार खड़ा है। कुछ समय पहले तक जहां दुनिया तेल की किल्लत और खाड़ी संकट के चलते बढ़ती कीमतों से सहमी हुई थी, वहीं अब बाजार में ‘ओवरसप्लाई’ (जरूरत से ज्यादा आपूर्ति) का डर सताने लगा है। तेल रिफाइनरियां पहले से ही प्रचुर आपूर्ति के कारण अपनी प्रोसेसिंग धीमी कर चुकी हैं, जिससे बाजार अब ‘कंटैंगो’ (भविष्य की कीमतें मौजूदा कीमतों से अधिक होना) की स्थिति में जा रहा है।

**रशियन क्रूड पर सस्पेंस:** इसी बीच, रूसी कच्चे तेल पर डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन द्वारा दी गई प्रतिबंध छूट की समयसीमा समाप्त हो गई है। हालांकि, अमेरिकी ट्रेजरी या राष्ट्रपति ट्रंप की ओर से अभी तक यह साफ नहीं किया गया है कि क्या इन प्रतिबंधों को दोबारा सख्ती से लागू किया जाएगा या नहीं। तेल कूटनीति का यह मोड़ भारत के लिए बेहद नाजुक है, क्योंकि भारत पिछले काफी समय से रूस से रियायती दरों पर कच्चा तेल खरीद रहा है।

📊 राजकोषीय संकट: भारत क्यों ले रहा है $2.5 बिलियन का लोन?

खाड़ी संकट के शुरुआती दौर में तेल की ऊंची कीमतों और घरेलू स्तर पर बढ़ती सब्सिडी लागत के कारण भारत के सरकारी खजाने पर भारी दबाव पड़ा है। इस राजकोषीय असंतुलन से निपटने के लिए सरकार ने यह कदम उठाया है:

  • शहरी विकास: इस कर्ज का एक बड़ा हिस्सा भारतीय शहरों के बुनियादी ढांचे (Urban Infrastructure) को आधुनिक बनाने में खर्च होगा।
  • रोजगार सृजन: सब्सिडी का बोझ बढ़ने से प्रभावित हुए पूंजीगत व्यय (Capital Spending) को सहारा देकर नए रोजगार पैदा करने पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।
  • बजटीय संतुलन: वैश्विक उथल-पुथल के बीच देश की आर्थिक विकास दर को प्रभावित होने से बचाना मुख्य लक्ष्य है।

₹30,000 करोड़ का NSE मेगा IPO: कमाई तो बंपर, पर जोखिम भी कम नहीं

घरेलू मोर्चे पर, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) अपने बहुप्रतीक्षित ₹30,000 करोड़ के मेगा आईपीओ (IPO) के साथ बाजार में उतरने की तैयारी कर रहा है। लेकिन, आईपीओ के दस्तावेजों (DRHP) में एनएसई ने निवेशकों को कुछ गंभीर तकनीकी और विनियामक (Regulatory) जोखिमों के प्रति आगाह किया है।

दस्तावेजों के विश्लेषण से पता चलता है कि एनएसई के कुल परिचालन राजस्व (Operating Income) का **78% से अधिक हिस्सा अकेले डेरिवेटिव्स (F&O) बिजनेस से आता है**। चूंकि सेबी (SEBI) लगातार फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस ट्रेडिंग के नियमों को कड़ा कर रहा है, इसलिए एनएसई की कमाई पर इसका सीधा असर पड़ सकता है। इसके अलावा, एक्सचेंज ने साइबर हमलों, तकनीकी विफलता और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) से जुड़े नए खतरों को भी रेखांकित किया है, जो बाजार में हेरफेर और अस्थिरता को बढ़ा सकते हैं।

राहत की खबर: भारत-यूके सोशल सिक्योरिटी पैक्ट से पेशेवरों को बड़ा फायदा

इन सब कूटनीतिक और बाजार के उतार-चढ़ाव के बीच भारतीय कॉरपोरेट जगत के लिए एक राहत भरी खबर भी है। भारत और यूनाइटेड किंगडम (UK) के बीच होने जा रहे सोशल सिक्योरिटी समझौते से दोनों देशों में काम कर रही कंपनियों की लागत में भारी कटौती होगी। इस ऐतिहासिक समझौते का सीधा लाभ ब्रिटेन में काम कर रहे **95% तक भारतीय पेशेवरों** को मिलेगा, जिससे उनकी दोहरी सामाजिक सुरक्षा कटौती बंद होगी और भारतीय कंपनियों की वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ेगी।

वैश्विक अर्थव्यवस्था, शेयर बाजार और कॉरपोरेट नीतियों के निष्पक्ष व सटीक विश्लेषण के लिए जुड़े रहें ‘RiNews’ के साथ।


स्रोतः आरआई न्यूज फीड नेटवर्क (एकीकृत) | संपादक मंडल: आरआई न्यूज डेस्क (RI News Desk)

📅 प्रकाशित तिथि: 18 Jun 2026 को 04:31 PM बजे | गाजीपुर, उत्तर प्रदेश

Scroll to Top