
RI NEWS DESK | नई दिल्ली
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन आज दो दिन की राजकीय यात्रा पर भारत पहुंच रहे हैं। यह 23वां भारत–रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन है, जो 4–5 दिसंबर 2025 के बीच नई दिल्ली में होगा। विदेश मंत्रालय के आधिकारिक कार्यक्रम के अनुसार पुतिन राष्ट्रपति भवन में औपचारिक स्वागत, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु द्वारा दिए जाने वाले राजभोज और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ एक–टू–वन मुलाकात तथा विस्तृत प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता में शामिल होंगे।
दोनों देशों के बीच रक्षा, ऊर्जा, तेल–गैस व्यापार, अंतरिक्ष, तकनीक, परमाणु ऊर्जा और रुपये–रूबल में लेन–देन जैसे मुद्दे एजेंडा में हैं। रूस चाहता है कि Su-57 फाइटर जेट, S-400 से जुड़ी सर्विसिंग और नए रक्षा करारों पर ठोस प्रगति हो, जबकि भारत सस्ती ऊर्जा, तेल आयात, लॉजिस्टिक सहयोग (RELOS) और दीर्घकालिक व्यापार संतुलन पर ज़्यादा ज़ोर दे रहा है। इस यात्रा को यूक्रेन युद्ध के बाद भारत–रूस रिश्तों की दिशा तय करने वाला महत्वपूर्ण मोड़ माना जा रहा है।
RI NEWS DESK विश्लेषण: भारत ऐसे समय में पुतिन की मेज़बानी कर रहा है जब पश्चिमी देशों के साथ उसके संबंध भी मज़बूत हैं और रूस के साथ भी ‘विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी’ जारी है। यह दौरा दिखाता है कि नई दिल्ली किसी एक खेमे में खड़े होने के बजाय अपनी स्वतंत्र विदेश नीति, ऊर्जा सुरक्षा और रक्षा ज़रूरतों को संतुलित तरीके से साधना चाहती है। रूस के लिए भी यह यात्रा यह संदेश देने का माध्यम है कि वह एशिया में अभी भी एक भरोसेमंद साझेदार रखता है।
RI NEWS सलाह: आम पाठक इस यात्रा को केवल औपचारिक कूटनीतिक कार्यक्रम की तरह न देखें। इसके असर का सीधा संबंध हमारी जेब (तेल की कीमतें), राष्ट्रीय सुरक्षा (रक्षा सौदे), और वैश्विक राजनीति (यूक्रेन संघर्ष, पश्चिम–रूस तनाव) से है। आने वाले दिनों में तेल के दाम, नए रक्षा करार, और भारत की रूस व पश्चिम के बीच संतुलनकारी भूमिका पर नज़र रखना ज़रूरी होगा।
स्रोत (सक्रिय लिंक):
– भारत सरकार – विदेश मंत्रालय की आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति
– Financial Express – 30 घंटे का पूरा कार्यक्रम
– NDTV – हथियार, तेल और बदलती साझेदारी
– Reuters – ऊर्जा और रक्षा निर्यात पर फोकस
– DD News – भारत–रूस रणनीतिक साझेदारी विश्लेषण
