कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के तेजी से बदलते दौर में वर्ष 2036 की दुनिया आज की तुलना में बिल्कुल अलग दिखाई दे सकती है। उस समय AI केवल एक तकनीकी उपकरण नहीं रहेगा, बल्कि बड़े उद्योगों, सरकारी संस्थानों और वैश्विक कंपनियों की पूरी कार्यप्रणाली का “ऑपरेटिंग सिस्टम” बन चुका होगा। AI मॉडल लगातार डेटा का विश्लेषण कर रहे होंगे, स्वचालित एजेंट वास्तविक समय में निर्णय ले रहे होंगे और दुनिया भर के डेटा सेंटर, क्लाउड नेटवर्क तथा विभिन्न देशों के डिजिटल क्षेत्र एक-दूसरे से जुड़े होंगे।
ऐसी स्थिति में सबसे बड़ा प्रश्न यह नहीं होगा कि डेटा किस सर्वर या क्लाउड में रखा गया है, बल्कि यह होगा कि उस डेटा पर वास्तविक नियंत्रण किसका है। कौन तय करेगा कि किस AI प्रणाली को किस समय कौन-सी जानकारी तक पहुंच मिले? कौन यह सुनिश्चित करेगा कि संवेदनशील सूचनाओं का दुरुपयोग न हो? और कौन यह प्रमाणित करेगा कि किसी AI ने किसी डेटा का उपयोग किस उद्देश्य से किया?
विशेषज्ञों का मानना है कि इन सभी प्रश्नों का केंद्र “स्टोरेज सिस्टम” यानी डेटा भंडारण व्यवस्था बनने जा रहा है। अब तक स्टोरेज को केवल डेटा सुरक्षित रखने का माध्यम माना जाता था, लेकिन भविष्य में यही व्यवस्था AI शासन और डेटा नियंत्रण की सबसे महत्वपूर्ण परत बन सकती है।
AI तकनीक पारंपरिक सॉफ्टवेयर से अलग तरीके से काम करती है। पुराने सिस्टम सीमित और पूर्व-निर्धारित डेटाबेस तक ही पहुंचते थे, जबकि AI एजेंट एक साथ लाखों दस्तावेज़ों, चित्रों, वीडियो और संवेदनशील फाइलों का विश्लेषण कर सकते हैं। वे अलग-अलग स्रोतों से जानकारी जोड़कर नए निष्कर्ष निकालते हैं और कई बार बिना मानव हस्तक्षेप के निर्णय भी लेते हैं।
यही कारण है कि भविष्य में हर डेटा एक्सेस एक “गवर्नेंस इवेंट” माना जाएगा। हर बार जब कोई AI मॉडल किसी सूचना तक पहुंचेगा, तब यह सुनिश्चित करना आवश्यक होगा कि वह प्रक्रिया कानून, गोपनीयता नियमों और संगठन की नीतियों के अनुरूप है या नहीं।
विशेषज्ञों के अनुसार 2036 तक बड़ी कंपनियां एक साथ कई प्रकार के क्लाउड वातावरण में काम करेंगी। कुछ डेटा राष्ट्रीय सीमाओं के भीतर रहेगा, कुछ निजी सर्वरों में और कुछ वैश्विक क्लाउड प्लेटफॉर्म पर। ऐसे में डेटा केवल एक स्थान से दूसरे स्थान तक नहीं जाएगा, बल्कि लगातार अलग-अलग क्षेत्रों में साझा और सिंक्रोनाइज होता रहेगा।
इसी वजह से केवल “साइबर सुरक्षा” पर्याप्त नहीं होगी। डेटा नियंत्रण को सीधे स्टोरेज सिस्टम के भीतर शामिल करना पड़ेगा। भविष्य के स्टोरेज प्लेटफॉर्म ऐसे होंगे जो यह तय कर सकें कि किस उपयोगकर्ता या AI एजेंट को कौन-सा डेटा देखने की अनुमति है, डेटा का स्रोत क्या है, उसका उपयोग कैसे हुआ और यदि आवश्यकता पड़े तो किसी एक्सेस को तुरंत रोका भी जा सके।
तकनीकी विश्लेषकों का कहना है कि आने वाले समय में केवल शक्तिशाली AI मॉडल होना सफलता की गारंटी नहीं होगा। असली शक्ति उन संस्थानों के पास होगी जो अपने डेटा पर नियंत्रण बनाए रख सकेंगे। यदि कोई संगठन यह नहीं जानता कि किस AI ने किस जानकारी का उपयोग किया और उसके परिणाम क्या हुए, तो वह धीरे-धीरे अपने ही डिजिटल ढांचे पर नियंत्रण खो सकता है।
इसलिए भविष्य की AI प्रतिस्पर्धा केवल तकनीक की नहीं, बल्कि “नियंत्रण” की प्रतिस्पर्धा होगी। और यह नियंत्रण वहीं संभव होगा जहां डेटा गवर्नेंस केवल कागजी नीति नहीं, बल्कि तकनीकी ढांचे का अनिवार्य हिस्सा बने। विशेषज्ञ मानते हैं कि इस नई व्यवस्था की शुरुआत डेटा स्टोरेज से ही होगी।
— RI News Desk | 26 May 2026
स्रोत: NDTV Profit
स्रोतः आरआई न्यूज फीड नेटवर्क (एकीकृत) | संपादक मंडल: आरआई न्यूज डेस्क (RI News Desk)
📅 प्रकाशित तिथि: 26 May 2026 को 03:02 PM बजे | गाजीपुर, उत्तर प्रदेश
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