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वंदे मातरम: भारत का राष्ट्रीय गीत, पूरा इतिहास, अर्थ, महत्व और सभी छंदों की लाइनें

— संजीव कुमार राय | कोलकाता

वंदे मातरम केवल दो शब्द नहीं, बल्कि भारत माता के प्रति असीम प्रेम, समर्पण और राष्ट्रभक्ति का प्रतीक है। यह गीत आज भी करोड़ों भारतीयों के हृदय में देशभक्ति की ज्वाला जगाता है। पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा स्कूलों में इसे अनिवार्य करने के बाद इसकी चर्चा फिर से जोरों पर है।

वंदे मातरम की रचना और लेखक

बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने 7 नवंबर 1875 को कोलकाता के निकट आनंदमठ में इस गीत की रचना की। यह सबसे पहले उनके प्रसिद्ध बांग्ला उपन्यास आनंदमठ (1882) में प्रकाशित हुआ था। गीत संस्कृत और बांग्ला भाषा के मिश्रण में लिखा गया है।

बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय बंगाल रीनेसां के प्रमुख लेखक थे। उन्होंने ब्रिटिश शासन के खिलाफ राष्ट्रवादी भावना जगाने के लिए यह गीत लिखा।

राष्ट्रीय गीत कैसे बना?

  • 1896: रवींद्रनाथ टैगोर ने इसे पहली बार सार्वजनिक रूप से गाया।
  • 1905: भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के कलकत्ता अधिवेशन में इसे राष्ट्रगीत के रूप में अपनाया गया।
  • 24 जनवरी 1950: संविधान सभा ने जन गण मन को राष्ट्रगान और वंदे मातरम को राष्ट्रीय गीत घोषित किया।

पूर्ण 6 छंद और सरल हिंदी अर्थ

छंद 1: वंदे मातरम्। सुजलां सुफलां मलयजशीतलाम् शस्यश्यामलां मातरम्। शुभ्रज्योत्स्नापुलकितयामिनीम् फुल्लकुसुमितद्रुमदलशोभिनीम् सुहासिनीं सुमधुर भाषिणीम् सुखदां वरदां मातरम्॥

अर्थ: मैं तुम्हें नमस्कार करता हूँ माँ! तुम जल से भरी, फलों-फूलों से लदी, मलय पर्वत की शीतल हवा वाली, हरी-भरी फसलों वाली हो। रात में चाँदनी से पुलकित, फूलों और पत्तों से सुशोभित, मुस्कुराती हुई, मधुर भाषिणी, सुख और वर देने वाली माँ!

छंद 2: वंदे मातरम्। कोटिकोटि कंठ कलकल निनाद करले कोटिकोटि भुज धृत खरकरवाले के बोले मा तुमी अबले बहुबलधारिणीं नमामि तारिणीम् रिपुदलवारिणीं मातरम्॥

अर्थ: करोड़ों कंठों से तुम्हारी जयकार गूंज रही है। करोड़ों भुजाओं में खड़ग लिए, माँ तुम अबला नहीं हो, बल्कि बहुत बलधारिणी हो। शत्रुओं का संहार करने वाली, रक्षा करने वाली माँ को नमस्कार!

छंद 3: वंदे मातरम्। तुमि विद्या तुमि धर्म तुमि हृदि तुमि मर्म त्वं हि प्राणाः शरीर बाहुते तुमि मा शक्ति हृदये तुमि मा भक्ति तोमारै प्रतिमा गड़ि मंदिरे मंदिरे॥

अर्थ: तुम ही विद्या हो, तुम ही धर्म हो। तुम ही हृदय हो, तुम ही मर्म हो। तुम ही प्राण हो, शरीर हो। बाहों में तुम शक्ति हो, हृदय में भक्ति हो। मंदिर-मंदिर में तुम्हारी मूर्ति स्थापित की गई है।

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छंद 4: त्वं हि दुर्गा दशप्रहरणधारिणी कमला कमलदल विहारिणी वाणी विद्यादायिनी नमामि त्वां नमामि कमलां अमलां अतुलां सुजलां सुफलां मातरम्॥

अर्थ: तुम दुर्गा हो जो दस हथियार धारण करती हो, कमला हो जो कमल पर विराजमान हो, सरस्वती हो जो विद्या देती हो। मैं तुम्हें, कमला को, निर्मल, अतुलनीय, सुजला-सुफला माँ को नमस्कार करता हूँ।

छंद 5: वंदे मातरम्। त्वं हि दुर्गा दशप्रहरणधारिणी कमला कमलदल विहारिणी वाणी विद्यादायिनी नमामि त्वां नमामि कमलां अमलां अतुलां सुजलां सुफलां मातरम्॥

अर्थ: (छंद 4 के समान, दोहराया गया)

छंद 6: वंदे मातरम्। नमामि कमलां अमलां अतुलां सुजलां सुफलां मातरम् वंदे मातरम्॥

अर्थ: मैं कमला को, निर्मल और अतुलनीय माँ को नमस्कार करता हूँ। सुजला-सुफला माँ को वंदन करता हूँ।

स्वतंत्रता संग्राम में वंदे मातरम की भूमिका

यह गीत ब्रिटिश विरोध का सबसे शक्तिशाली हथियार बना।

  • खुदीराम बोस, भगत सिंह, सुभाष चंद्र बोस और लाला लाजपत राय जैसे क्रांतिकारियों ने इसे गाते हुए फाँसी चढ़ी या जेल गए।
  • ब्रिटिश सरकार ने 1909 में इस गीत पर प्रतिबंध लगा दिया था, लेकिन यह और भी लोकप्रिय हो गया।

आज के भारत में प्रासंगिकता

पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा सभी स्कूलों में सुबह की प्रार्थना सभा में वंदे मातरम अनिवार्य करने के बाद यह गीत फिर चर्चा में है। कई अन्य राज्य भी इसे बढ़ावा दे रहे हैं।

निष्कर्ष

वंदे मातरम सुनकर या गाकर हर भारतीय का सीना गर्व से चौड़ा हो जाता है। यह सिर्फ गीत नहीं, बल्कि हमारी मातृभूमि के प्रति कृतज्ञता का प्रतीक है।

जय हिंद | वंदे मातरम

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