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समुद्र के नीचे ज्वालामुखी विस्फोट से तैरते पत्थरों का सैलाब, पापुआ न्यू गिनी के कई द्वीप प्रभावित

पापुआ न्यू गिनी के निकट बिस्मार्क सागर में समुद्र के नीचे ज्वालामुखी विस्फोट और समुद्र में तैरते प्यूमिस पत्थरों का उपग्रह दृश्य

RI News Tech-Science Desk | 15 जून 2026

बिस्मार्क सागर में जारी है दुर्लभ ज्वालामुखीय गतिविधि

पापुआ न्यू गिनी के निकट स्थित बिस्मार्क सागर में समुद्र के नीचे हुए एक ज्वालामुखी विस्फोट ने वैज्ञानिकों और स्थानीय समुदायों का ध्यान आकर्षित किया है। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी NASA के अनुसार मई 2026 में शुरू हुई यह ज्वालामुखीय गतिविधि जून के मध्य तक जारी रही और इसके प्रभाव अब आसपास के द्वीपों पर स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगे हैं।

उपग्रह चित्रों में समुद्र की सतह पर विशाल मात्रा में तैरते ज्वालामुखीय पत्थर, जिन्हें ‘प्यूमिस’ कहा जाता है, दिखाई दिए हैं। ये पत्थर समुद्री धाराओं के साथ बहते हुए एडमिरल्टी द्वीपसमूह के कई तटीय क्षेत्रों तक पहुंच गए हैं।

क्या हैं प्यूमिस राफ्ट?

प्यूमिस एक अत्यंत हल्का और छिद्रयुक्त ज्वालामुखीय पत्थर होता है, जिसमें बड़ी मात्रा में गैस भरी होती है। इसी कारण यह पानी में डूबने के बजाय लंबे समय तक तैरता रहता है। जब लाखों-करोड़ों प्यूमिस के टुकड़े एक साथ समुद्र में फैल जाते हैं तो वे विशाल ‘प्यूमिस राफ्ट’ का रूप ले लेते हैं।

NASA द्वारा जारी लैंडसैट-8 उपग्रह चित्रों में समुद्र की सतह पर भूरे रंग की चौड़ी पट्टियां दिखाई दे रही हैं, जो इन तैरते पत्थरों के समूह हैं।

कई द्वीपों के तटों पर जमा हुए ज्वालामुखीय पत्थर

स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार लू द्वीप और बलुआन द्वीप सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में शामिल हैं। यहां तटों पर कई मीटर मोटी परत के रूप में प्यूमिस जमा हो गया है, जिससे लोगों का समुद्र तक पहुंचना कठिन हो गया है।

मनुस द्वीप के आसपास भी समुद्री मार्गों पर इन पत्थरों का प्रभाव देखा गया है। अधिकारियों का कहना है कि इससे मछली पकड़ने, सामानों के परिवहन और आवश्यक सेवाओं तक पहुंच में बाधा उत्पन्न हुई है।

समुद्री जीवों के लिए अवसर भी, खतरा भी

वैज्ञानिकों के अनुसार प्यूमिस राफ्ट समुद्री जीवों के लिए अस्थायी आवास का काम कर सकते हैं। सूक्ष्म शैवाल, बार्नेकल और अन्य छोटे जीव इन तैरते पत्थरों पर बसकर हजारों किलोमीटर तक यात्रा कर सकते हैं।

हालांकि इसके नकारात्मक प्रभाव भी सामने आते हैं। लंबे समय तक समुद्र की सतह पर प्यूमिस बने रहने से सूर्य का प्रकाश नीचे तक नहीं पहुंच पाता, जिससे समुद्री घास और प्रवाल भित्तियों की प्रकाश संश्लेषण प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।

विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि कुछ समुद्री जीव भोजन समझकर इन पत्थरों को निगल सकते हैं, जिससे उनकी मृत्यु तक हो सकती है।

नई भूमि बनने की भी संभावना

NASA के वैज्ञानिकों का मानना है कि यह ज्वालामुखीय गतिविधि संभवतः टाइटन रिज क्षेत्र में हो रही है। यदि विस्फोट लंबे समय तक जारी रहा तो समुद्र की सतह पर अस्थायी रूप से एक नया द्वीप भी बन सकता है।

वैज्ञानिकों के अनुसार अतीत में भी कुछ समुद्री ज्वालामुखीय विस्फोटों के दौरान प्यूमिस और राख के जमाव से नई भूमि का निर्माण देखा गया है, हालांकि इनमें से अधिकांश द्वीप समय के साथ नष्ट हो जाते हैं।

उपग्रहों से की जा रही लगातार निगरानी

NASA, अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) और अन्य वैज्ञानिक संस्थान लैंडसैट उपग्रहों, हाइपरस्पेक्ट्रल सेंसर तथा रडार तकनीकों की सहायता से इस क्षेत्र की लगातार निगरानी कर रहे हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि यह घटना न केवल प्राकृतिक आपदाओं को समझने में मदद करेगी, बल्कि समुद्र के नीचे होने वाले ज्वालामुखीय विस्फोटों के बारे में नई वैज्ञानिक जानकारी भी प्रदान कर सकती है।

विश्लेषण: क्यों महत्वपूर्ण है यह घटना?

बिस्मार्क सागर की यह घटना दर्शाती है कि समुद्र के नीचे होने वाले ज्वालामुखीय विस्फोट भी तटीय समुदायों और समुद्री पारिस्थितिकी पर व्यापक प्रभाव डाल सकते हैं। एक ओर प्यूमिस राफ्ट समुद्री जीवों के प्रसार में सहायता करते हैं, वहीं दूसरी ओर वे मत्स्य पालन, समुद्री परिवहन और प्रवाल भित्तियों के लिए गंभीर चुनौती भी बन सकते हैं।

आधुनिक उपग्रह तकनीक की सहायता से वैज्ञानिक ऐसे घटनाक्रमों की वास्तविक समय में निगरानी कर पा रहे हैं, जिससे भविष्य में जोखिम प्रबंधन और आपदा तैयारी को बेहतर बनाया जा सकेगा।


यह भी पढ़ें: अंतरिक्ष, AI, विज्ञान और नई तकनीकों से जुड़ी ताज़ा खबरों के लिए RI News के Tech-Science सेक्शन को नियमित रूप से पढ़ते रहें।

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स्रोतः आरआई न्यूज फीड नेटवर्क (एकीकृत) | संपादक मंडल: आरआई न्यूज डेस्क (RI News Desk)

📅 प्रकाशित तिथि: 15 Jun 2026 को 07:16 PM बजे | गाजीपुर, उत्तर प्रदेश

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