11 अप्रैल 2026 (RI News): पश्चिम एशिया (West Asia) में US-Iran ceasefire के बावजूद तनाव बरकरार है। Israel के Lebanon पर हमलों में सैकड़ों निर्दोष नागरिक मारे गए हैं, जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हो रही है। ठीक इसी संकट के बीच भारत ने अपनी सक्रिय और दूरदर्शी विदेश नीति से एक बार फिर दुनिया को प्रभावित किया है।

11 अप्रैल 2026 (RI News): पश्चिम एशिया संकट में भारत की ऊर्जा कूटनीति तेजी से सक्रिय होती नजर आ रही है। US-Iran ceasefire के बावजूद क्षेत्र में तनाव बना हुआ है, और इसी बीच भारत ने Mauritius, UAE और Qatar के जरिए अपनी रणनीतिक पहुंच मजबूत करने की दिशा में बड़े कदम उठाए हैं।
विदेश मंत्री एस. जयशंकर (S. Jaishankar) ने Mauritius में Oil और Gas सप्लाई का बड़ा ऐलान किया है। वे आज UAE का दौरा शुरू कर रहे हैं, जबकि पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी Qatar पहुंच चुके हैं। यह कदम भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के साथ-साथ Indian Ocean क्षेत्र में रणनीतिक पहुंच बढ़ाने वाला है।
खबर विस्तार से
9 अप्रैल 2026 को Port Louis (Mauritius) में 9th Indian Ocean Conference के दौरान विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा:
“हम Mauritius के साथ Government-to-Government समझौता अंतिम चरण में हैं, जिसके तहत भारत तेल और गैस की सप्लाई करेगा। यह Mauritius की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करेगा।”
जयशंकर ने यह भी घोषणा की कि भारत Mauritius में जल्द ही Defence Attaché नियुक्त करेगा, जो समुद्री सुरक्षा और द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करेगा।
आज (11-12 अप्रैल) जयशंकर UAE जा रहे हैं, जहां वे UAE की लीडरशिप से पश्चिम एशिया की स्थिति, ऊर्जा आपूर्ति और वहां रह रहे लाखों भारतीयों की सुरक्षा पर चर्चा करेंगे।
इसी बीच पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी 9-10 अप्रैल को Qatar के दौरे पर थे। Qatar भारत का सबसे बड़ा LNG (45%) और LPG (20%) सप्लायर है। पुरी का यह दौरा West Asia संकट के कारण गैस आपूर्ति में आई दिक्कतों को दूर करने के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
Lebanon पर भारत की सख्त चिंता
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रंधीर जायसवाल ने 10 अप्रैल को कहा, “Lebanon में बड़ी संख्या में नागरिकों की मौत की खबरों से हम गहरी चिंतित हैं। UNIFIL ट्रूप कंट्रीब्यूटिंग देश होने के नाते यह स्थिति बहुत disturbing है।” भारत ने हमेशा नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने पर जोर दिया है।
विश्लेषण (Analysis)
भारत की यह डिप्लोमेसी संकट को अवसर में बदलने का बेहतरीन उदाहरण है। West Asia संकट ने Strait of Hormuz को जोखिम में डाला है, जहां से भारत का 60% से ज्यादा कच्चा तेल आता है। जयशंकर की Mauritius घोषणा और UAE-Qatar आउटरीच तीन बड़े संदेश दे रही है:
- ऊर्जा विविधीकरण: Mauritius जैसे देशों को सप्लाई करके भारत अपनी निर्यात क्षमता बढ़ा रहा है और वैकल्पिक रास्ते तैयार कर रहा है।
- रणनीतिक गहराई: Defence Attaché और Oil-Gas समझौता Mauritius को भारत का मजबूत साझेदार बना रहा है – खासकर Indian Ocean में China’s बढ़ते प्रभाव के खिलाफ।
- संतुलित रुख: भारत ceasefire का स्वागत करता है लेकिन नागरिकों की मौत पर चिंता जताता है। यह “सभी पक्षों से संवाद” वाली नीति को आधुनिक ऊर्जा कूटनीति के साथ जोड़ रहा है।
प्रभाव (Impact)
- भारतीय अर्थव्यवस्था पर: तेल की कीमतें बढ़ने से महंगाई का खतरा था। ये दौरे सप्लाई चेन को स्थिर रखेंगे।
- वैश्विक छवि: भारत अब सिर्फ खरीदार नहीं, बल्कि “विश्वसनीय ऊर्जा साझेदार” के रूप में उभर रहा है।
- भारतीय डायस्पोरा: UAE और Qatar में रहने वाले 35 लाख से ज्यादा भारतीयों की सुरक्षा पर फोकस बढ़ेगा।
- क्षेत्रीय स्थिरता: भारत का संतुलित स्वर Global South में उसकी नेतृत्व भूमिका को मजबूत करता है।
निष्कर्ष
पश्चिम एशिया संकट ने साबित कर दिया कि ऊर्जा सुरक्षा अब सिर्फ आयात नहीं, बल्कि सक्रिय कूटनीति का विषय है। भारत ने जयशंकर और पुरी के इन दौरों से दिखा दिया कि वो संकट के समय भी अवसर तलाशता है। यह डिप्लोमेसी न सिर्फ ऊर्जा संकट को रोक रही है, बल्कि भारत को Indian Ocean और Gulf क्षेत्र में नया रणनीतिक स्थान भी दे रही है।
स्रोत: The Economic Times, The Print, Business Standard
