
भारत में जीवनशैली से जुड़ी बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS-6) की ताजा रिपोर्ट ने इस चिंता को और गहरा कर दिया है। रिपोर्ट के अनुसार देश में वयस्कों के बीच मोटापा (Obesity) और उच्च रक्त शर्करा (High Blood Sugar) के मामलों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ इसे आने वाले वर्षों में भारत के लिए सबसे बड़ी सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौतियों में से एक मान रहे हैं।
NFHS-6 के आंकड़ों के अनुसार 15 से 49 वर्ष आयु वर्ग की 30.7 प्रतिशत महिलाएं अब अधिक वजन या मोटापे की श्रेणी में आती हैं। NFHS-5 (2019-21) में यह आंकड़ा 24 प्रतिशत था। पुरुषों में भी मोटापे और अधिक वजन की समस्या लगातार बढ़ रही है। इसी प्रकार उच्च रक्त शर्करा के मामलों में भी वृद्धि देखी गई है, जो मधुमेह (Diabetes) के बढ़ते खतरे का संकेत है।
क्या कहती है NFHS-6 रिपोर्ट?
रिपोर्ट बताती है कि भारत में आर्थिक विकास, शहरीकरण और बदलती जीवनशैली के साथ खान-पान की आदतों में बड़ा बदलाव आया है। पहले जहां कुपोषण और भोजन की कमी प्रमुख स्वास्थ्य समस्याएं थीं, वहीं अब अत्यधिक कैलोरी सेवन, जंक फूड और शारीरिक गतिविधियों की कमी नई चुनौतियां बनकर उभरी हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार मोटापा केवल शरीर का अतिरिक्त वजन नहीं है, बल्कि यह हृदय रोग, उच्च रक्तचाप, मधुमेह, किडनी रोग और कई प्रकार के कैंसर का प्रमुख कारण बन सकता है।
बढ़ते मोटापे के प्रमुख कारण
विशेषज्ञों का मानना है कि शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में लोगों की जीवनशैली तेजी से बदल रही है। शारीरिक श्रम कम हो रहा है जबकि प्रोसेस्ड फूड, मीठे पेय पदार्थ और फास्ट फूड का सेवन बढ़ रहा है।
मोबाइल फोन, कंप्यूटर और टीवी के बढ़ते उपयोग के कारण बच्चों और युवाओं में भी शारीरिक गतिविधियां कम हुई हैं। वर्क फ्रॉम होम और डिजिटल जीवनशैली ने भी इस प्रवृत्ति को बढ़ावा दिया है।
हाई ब्लड शुगर क्यों है चिंता का विषय?
उच्च रक्त शर्करा या हाई ब्लड शुगर मधुमेह का शुरुआती संकेत माना जाता है। भारत पहले से ही दुनिया में सबसे अधिक मधुमेह रोगियों वाले देशों में शामिल है। NFHS-6 के आंकड़े संकेत देते हैं कि आने वाले वर्षों में यह समस्या और गंभीर हो सकती है।
डॉक्टरों के अनुसार यदि समय रहते जीवनशैली में सुधार नहीं किया गया तो मधुमेह के कारण हृदय रोग, आंखों की समस्याएं, किडनी फेलियर और तंत्रिका तंत्र संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है।
महिलाओं पर अधिक प्रभाव
रिपोर्ट में महिलाओं के बीच मोटापे की बढ़ती दर विशेष चिंता का विषय मानी गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि मोटापा महिलाओं में गर्भावस्था संबंधी जटिलताओं, उच्च रक्तचाप और हार्मोनल असंतुलन जैसी समस्याओं को बढ़ा सकता है।
इसके अलावा मोटापा मानसिक स्वास्थ्य पर भी असर डाल सकता है, जिससे तनाव और आत्मविश्वास की कमी जैसी समस्याएं पैदा हो सकती हैं।
सरकार और स्वास्थ्य विशेषज्ञ क्या सलाह दे रहे हैं?
विशेषज्ञ संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद और तनाव प्रबंधन को मोटापा और मधुमेह नियंत्रण का सबसे प्रभावी तरीका मानते हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय भी समय-समय पर स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए जागरूकता अभियान चलाता रहा है।
डॉक्टरों का सुझाव है कि नियमित स्वास्थ्य जांच, रक्त शर्करा की निगरानी और शारीरिक गतिविधियों को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाया जाए।
विश्लेषण
NFHS-6 रिपोर्ट भारत के स्वास्थ्य परिदृश्य में एक महत्वपूर्ण बदलाव की ओर संकेत करती है। देश जहां एक ओर कुपोषण और संक्रामक रोगों से लड़ रहा है, वहीं दूसरी ओर जीवनशैली से जुड़ी बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। यह दोहरी चुनौती स्वास्थ्य व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव डाल सकती है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि अभी से रोकथाम पर ध्यान नहीं दिया गया तो आने वाले वर्षों में मोटापा और मधुमेह देश की उत्पादकता, स्वास्थ्य बजट और सामाजिक विकास पर बड़ा प्रभाव डाल सकते हैं।
निष्कर्ष
NFHS-6 की रिपोर्ट स्पष्ट संकेत देती है कि भारत में मोटापा और हाई ब्लड शुगर तेजी से बढ़ रहे हैं। यह केवल स्वास्थ्य का नहीं बल्कि आर्थिक और सामाजिक विकास का भी मुद्दा है। स्वस्थ जीवनशैली, संतुलित आहार और नियमित स्वास्थ्य जांच को बढ़ावा देकर ही इस चुनौती का प्रभावी समाधान संभव है।
स्रोत: राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS-6), स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार; प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया (PTI)।
— RI News Desk
Publish Date
30 May 2026
Publish Time
09:00 AM IST



