चंदनी पब्लिक स्कूल में संगीतमय सुंदरकांड पाठ के साथ नए शैक्षणिक सत्र का शुभारंभ

— आध्यात्मिक वातावरण में शिक्षा और संस्कार का संदेश

सुरतापुर (गाजीपुर) | 21 जनवरी 2026
— अवनीश कुमार राय | ब्यूरो चीफ (लोकल), RI News
RI News उत्तर प्रदेश डेस्क 

चंदनी पब्लिक स्कूल में संगीतमय सुंदरकांड
सुरतापुर स्थित चंदनी पब्लिक स्कूल में संगीतमय सुंदरकांड पाठ के दौरान पूजन करते विद्यालय के निदेशक नवीन राय और शिक्षकगण
सुरतापुर स्थित चंदनी पब्लिक स्कूल परिसर में संगीतमय सुंदरकांड पाठ और पूजन-अर्चन के दौरान विद्यालय परिवार और गणमान्य लोग।
(फोटो: RI News)

सुरतापुर स्थित चंदनी पब्लिक स्कूल परिसर में शनिवार को संगीतमय सुंदरकांड पाठ के भव्य आयोजन के साथ नए शैक्षणिक सत्र का विधिवत शुभारंभ किया गया। धार्मिक एवं आध्यात्मिक वातावरण में संपन्न इस कार्यक्रम में विद्यालय परिवार के साथ-साथ क्षेत्र के अनेक गणमान्य नागरिक, अभिभावक तथा सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे। पूरा परिसर भक्ति संगीत, मंत्रोच्चार और आध्यात्मिक ऊर्जा से गुंजायमान रहा।

सुंदरकांड पाठ के उपरांत विधिवत पूजन-अर्चन संपन्न हुआ, जिसके बाद नए शैक्षणिक सत्र के प्रवेश फॉर्म का विमोचन विद्यालय के निदेशक नवीन राय के कर-कमलों से किया गया। यह क्षण विद्यालय के लिए केवल एक औपचारिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि आने वाले सत्र के लिए एक सकारात्मक संकल्प और नई शुरुआत का प्रतीक बना।

इस अवसर पर अपने संबोधन में निदेशक नवीन राय ने कहा कि शिक्षा केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास पर विशेष ध्यान दिया जाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि आज के प्रतिस्पर्धात्मक युग में बच्चों को नैतिक मूल्यों, अनुशासन, सामाजिक उत्तरदायित्व और सकारात्मक सोच से युक्त करना उतना ही जरूरी है, जितना उन्हें आधुनिक विषयों में दक्ष बनाना।

उन्होंने आगे कहा कि विद्यालय नए शैक्षणिक सत्र में गुणवत्तापूर्ण एवं संस्कारयुक्त शिक्षा प्रदान कर विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य के निर्माण के लिए निरंतर प्रयासरत रहेगा। इस वर्ष विद्यालय नए कलेवर के साथ कई नवाचारी शैक्षणिक एवं सह-शैक्षणिक कार्यक्रमों की शुरुआत करेगा, जिससे छात्रों में बौद्धिक क्षमता के साथ-साथ रचनात्मकता, आत्मविश्वास और नेतृत्व गुणों का भी विकास हो सके।

कार्यक्रम के दौरान विद्यालय के शिक्षक-शिक्षिकाओं, कर्मचारियों तथा विद्यार्थियों ने श्रद्धापूर्वक सुंदरकांड पाठ में सहभागिता की। आयोजन के सफल संचालन में विद्यालय परिवार की सक्रिय भूमिका रही।

इस अवसर पर विद्यालय के प्रबंधक दयाशंकर राय, प्रधानाचार्य प्रवीण पीयूष राय, उपप्रधानाचार्य विनय राय, आशुतोष राय, जे.एस. राय, प्रीति कुमारी, मिसकात सहित अन्य शिक्षक-शिक्षिकाएं एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

कार्यक्रम के समापन पर प्रसाद वितरण किया गया तथा सभी ने नए शैक्षणिक सत्र के सफल एवं मंगलमय होने की कामना की।


विश्लेषण

— शिक्षा के साथ संस्कार जोड़ने की स्थानीय पहल

चंदनी पब्लिक स्कूल द्वारा नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत संगीतमय सुंदरकांड पाठ जैसे धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजन से करना केवल परंपरा का निर्वहन नहीं, बल्कि शिक्षा के व्यापक उद्देश्य को रेखांकित करता है। ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में स्थित शैक्षणिक संस्थानों के लिए यह एक महत्वपूर्ण उदाहरण है कि आधुनिक शिक्षा व्यवस्था को स्थानीय संस्कृति, आस्था और नैतिक मूल्यों से कैसे जोड़ा जा सकता है।

आज जब शिक्षा प्रणाली पर यह आरोप लगते रहे हैं कि वह बच्चों को केवल परीक्षा-उन्मुख बना रही है और उनके व्यक्तित्व, नैतिकता व संवेदनशीलता की उपेक्षा हो रही है, ऐसे में इस प्रकार के आयोजन यह संदेश देते हैं कि शिक्षा का उद्देश्य केवल नौकरी पाना नहीं, बल्कि एक अच्छा इंसान बनना भी है। सुंदरकांड पाठ जैसे धार्मिक आयोजन छात्रों के मन में शांति, एकाग्रता, अनुशासन और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं।

विद्यालय के निदेशक नवीन राय का यह कथन कि शिक्षा केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित नहीं होनी चाहिए, वर्तमान शैक्षणिक विमर्श के अनुरूप है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 भी इसी बात पर बल देती है कि शिक्षा बहुआयामी हो और उसमें जीवन-मूल्य, नैतिकता तथा व्यावहारिक समझ को समान महत्व मिले। इस दृष्टि से देखा जाए तो चंदनी पब्लिक स्कूल की यह पहल समकालीन शैक्षणिक सोच से मेल खाती है।

इसके अतिरिक्त, नए शैक्षणिक सत्र के प्रवेश फॉर्म का विमोचन धार्मिक अनुष्ठान के साथ करना अभिभावकों और स्थानीय समाज के लिए एक भावनात्मक जुड़ाव भी पैदा करता है। ग्रामीण समाज में आज भी शिक्षा के साथ धार्मिक आस्था का गहरा संबंध है। ऐसे आयोजनों से विद्यालय के प्रति विश्वास बढ़ता है और अभिभावक यह महसूस करते हैं कि यह संस्था केवल फीस और परीक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि बच्चों के चरित्र-निर्माण की जिम्मेदारी भी समझती है।

विद्यालय द्वारा नवाचारी शैक्षणिक एवं सह-शैक्षणिक कार्यक्रम शुरू करने की घोषणा भी उल्लेखनीय है। आज के समय में केवल पाठ्यक्रम पूरा कराना पर्याप्त नहीं है। बच्चों को व्यावहारिक जीवन के लिए तैयार करना, उनमें आत्मविश्वास जगाना और सोचने-समझने की स्वतंत्र क्षमता विकसित करना भी शिक्षा का महत्वपूर्ण उद्देश्य है। यदि विद्यालय इस दिशा में ठोस प्रयास करता है, तो यह क्षेत्रीय शिक्षा-स्तर को ऊपर उठाने में सहायक सिद्ध हो सकता है।

यह भी महत्वपूर्ण है कि इस आयोजन में केवल विद्यालय परिवार ही नहीं, बल्कि क्षेत्र के गणमान्य नागरिकों की भी सहभागिता रही। इससे यह स्पष्ट होता है कि चंदनी पब्लिक स्कूल स्थानीय समाज में एक सामाजिक संस्था के रूप में उभर रहा है, न कि केवल एक शिक्षण केंद्र के रूप में।


प्रभाव

— स्थानीय समाज और विद्यार्थियों पर संभावित सकारात्मक असर

इस आयोजन का सबसे बड़ा प्रभाव यह है कि इससे विद्यालय और समाज के बीच विश्वास और भावनात्मक जुड़ाव मजबूत हुआ है। जब अभिभावक यह देखते हैं कि विद्यालय बच्चों के मानसिक, नैतिक और आध्यात्मिक विकास को भी महत्व देता है, तो उनका झुकाव स्वाभाविक रूप से ऐसे संस्थान की ओर बढ़ता है। इससे विद्यालय की साख और नामांकन संख्या में वृद्धि की संभावना भी बनती है।

विद्यार्थियों के दृष्टिकोण से देखें तो ऐसे धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजन उनमें अनुशासन, सामूहिकता और श्रद्धा की भावना को प्रोत्साहित करते हैं। सुंदरकांड पाठ में सामूहिक सहभागिता बच्चों को यह सिखाती है कि जीवन में केवल प्रतिस्पर्धा ही नहीं, बल्कि सहयोग और सामूहिक प्रयास भी महत्वपूर्ण हैं।

मानसिक स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से भी ऐसे आयोजन लाभकारी सिद्ध हो सकते हैं। भक्ति संगीत और मंत्रोच्चार बच्चों के मन को शांत करते हैं, जिससे तनाव और चिड़चिड़ेपन में कमी आती है। आज के डिजिटल युग में, जहाँ बच्चे मोबाइल और आभासी दुनिया पर अधिक निर्भर होते जा रहे हैं, ऐसे आयोजन उन्हें वास्तविक सामाजिक वातावरण से जोड़ते हैं।

स्थानीय स्तर पर इसका एक और प्रभाव यह हो सकता है कि अन्य विद्यालय भी इस प्रकार के सांस्कृतिक और नैतिक आयोजनों की ओर प्रेरित हों। यदि क्षेत्र के कई स्कूल शिक्षा के साथ संस्कार को जोड़ने की दिशा में कदम बढ़ाते हैं, तो समग्र रूप से समाज में सकारात्मक बदलाव की प्रक्रिया तेज हो सकती है।

अंततः, यह आयोजन केवल एक दिन का धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक व्यापक संदेश है—कि शिक्षा केवल डिग्री और अंकपत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि वह जीवन-मूल्यों, नैतिकता और सामाजिक उत्तरदायित्व से जुड़ी एक सतत प्रक्रिया है। चंदनी पब्लिक स्कूल की यह पहल यदि निरंतरता के साथ आगे बढ़ती है, तो आने वाले वर्षों में यह संस्था न केवल शैक्षणिक गुणवत्ता के लिए, बल्कि संस्कारयुक्त शिक्षा के केंद्र के रूप में भी पहचानी जा सकती है।

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