
CBSE CTAI Curriculum 2026: कक्षा 3 से कृत्रिम बुद्धिमत्ता और तार्किक चिंतन की नई पढ़ाई शुरू
नई दिल्ली। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने कक्षा 3 से 8 तक के विद्यार्थियों के लिए कम्प्यूटेशनल थिंकिंग एवं कृत्रिम बुद्धिमत्ता (CTAI) पाठ्यक्रम जारी किया है। यह पाठ्यक्रम राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) और राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा (NCF-SE 2023) के अनुरूप तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों में तार्किक चिंतन, समस्या समाधान क्षमता, डिजिटल साक्षरता तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) की आधारभूत समझ विकसित करना है।
क्या है कम्प्यूटेशनल थिंकिंग?
कम्प्यूटेशनल थिंकिंग एक ऐसी समस्या-समाधान प्रक्रिया है जिसमें किसी जटिल समस्या को छोटे-छोटे भागों में विभाजित कर व्यवस्थित और तार्किक तरीके से हल किया जाता है। इसमें पैटर्न पहचान, विश्लेषण, चरणबद्ध प्रक्रिया निर्माण तथा आँकड़ों की समझ जैसे कौशल शामिल हैं।
कक्षा 3 से 5 तक क्या पढ़ाया जाएगा?
प्राथमिक स्तर पर विद्यार्थियों को सीधे AI नहीं पढ़ाया जाएगा। पहले उन्हें तार्किक चिंतन और समस्या समाधान की मजबूत नींव प्रदान की जाएगी। इसके अंतर्गत पहेलियाँ, तर्क आधारित गतिविधियाँ, पैटर्न पहचान, आकृतियों की समझ, दिशा ज्ञान तथा चरणबद्ध निर्देशों का पालन सिखाया जाएगा।
CBSE के अनुसार कक्षा 3 से 5 में कम्प्यूटेशनल थिंकिंग को गणित और ‘द वर्ल्ड अराउंड अस’ (TWAU) जैसे विषयों के साथ जोड़ा जाएगा। इसके लिए विशेष कार्यपुस्तिकाएँ और संसाधन सामग्री भी उपलब्ध कराई जाएगी।
कक्षा 6 से 8 में AI की औपचारिक शुरुआत
मध्य स्तर पर विद्यार्थियों को कृत्रिम बुद्धिमत्ता की मूलभूत अवधारणाओं से परिचित कराया जाएगा। पाठ्यक्रम को तीन प्रमुख भागों में विभाजित किया गया है।
- उन्नत कम्प्यूटेशनल थिंकिंग – 40 घंटे
- कृत्रिम बुद्धिमत्ता की आधारभूत अवधारणाएँ – 20 घंटे
- अंतरविषयी परियोजनाएँ – 40 घंटे
इस प्रकार विद्यार्थियों को प्रति वर्ष कुल 100 घंटे का CT और AI आधारित शिक्षण प्राप्त होगा।
AI के कौन-कौन से विषय शामिल होंगे?
कक्षा 6 से 8 के विद्यार्थियों को कृत्रिम बुद्धिमत्ता के विभिन्न पहलुओं से परिचित कराया जाएगा। इनमें शामिल हैं:
- कृत्रिम बुद्धिमत्ता का परिचय
- मानव और मशीन बुद्धिमत्ता में अंतर
- सुपरवाइज्ड, अनसुपरवाइज्ड और रिइनफोर्समेंट लर्निंग की मूल अवधारणाएँ
- डेटा साइंस
- कम्प्यूटर विज़न
- प्राकृतिक भाषा प्रसंस्करण (NLP)
- वर्गीकरण, पूर्वानुमान और समूह निर्धारण तकनीकें
- आँकड़ों का दृश्य प्रस्तुतीकरण
- AI नैतिकता और डिजिटल जिम्मेदारी
- गोपनीयता, निष्पक्षता और पूर्वाग्रह की समझ
परियोजना आधारित होगी पढ़ाई
CBSE ने इस पाठ्यक्रम में गतिविधि आधारित और परियोजना आधारित शिक्षण पर विशेष बल दिया है। विद्यार्थियों को वास्तविक जीवन की समस्याओं की पहचान कर उनके समाधान विकसित करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। इसके अंतर्गत समूह कार्य, आँकड़ों का विश्लेषण, प्रस्तुतीकरण और AI आधारित प्रयोग शामिल होंगे।
मूल्यांकन की नई व्यवस्था
पारंपरिक लिखित परीक्षाओं के साथ विद्यार्थियों का मूल्यांकन परियोजनाओं, प्रस्तुतियों, व्यावहारिक गतिविधियों, समूह चर्चा और शिक्षक अवलोकन के आधार पर भी किया जाएगा। इसका उद्देश्य केवल याद करने की क्षमता नहीं बल्कि वास्तविक कौशलों का विकास करना है।
छात्रों और स्कूलों पर क्या होगा प्रभाव?
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह पाठ्यक्रम विद्यार्थियों को भविष्य की तकनीक आधारित अर्थव्यवस्था और रोजगार बाजार के लिए तैयार करेगा। इससे छात्रों में तार्किक सोच, नवाचार, डिजिटल कौशल और जिम्मेदार तकनीकी उपयोग की क्षमता विकसित होगी।
स्कूलों को भी अब कम्प्यूटेशनल थिंकिंग और AI आधारित गतिविधियों, परियोजनाओं तथा डिजिटल संसाधनों को अपने शिक्षण ढाँचे का हिस्सा बनाना होगा।
CBSE का उद्देश्य
CBSE का लक्ष्य ऐसे विद्यार्थियों का निर्माण करना है जो तकनीक का जिम्मेदारीपूर्वक उपयोग कर सकें, समस्याओं का समाधान खोज सकें, नवाचार कर सकें और समाज के विकास में सकारात्मक योगदान दे सकें। बोर्ड का मानना है कि भविष्य की दुनिया में तार्किक चिंतन और AI की समझ उतनी ही महत्वपूर्ण होगी जितनी आज पढ़ना-लिखना और गणित सीखना है।
स्रोत: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) द्वारा जारी Computational Thinking and Artificial Intelligence (CTAI) Curriculum 2026. :contentReference[oaicite:0]{index=0}
— RI News Education Desk



