पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 अब अपने अंतिम और निर्णायक चरण में पहुंच गया है। राज्य की २९४ सीटों पर दो चरणों में मतदान हो रहा है। पहले चरण (२३ अप्रैल) में १५२ सीटों पर रिकॉर्ड ९३% से ज्यादा मतदान हुआ। अब २९ अप्रैल को दूसरे चरण की १४२ सीटों पर वोटिंग होगी।
विस्तृत विश्लेषण: प्रचार अपने चरम पर है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मटुआ बेल्ट में लगातार रैलियां कर रहे हैं। उन्होंने कहा, “मुझे वोट दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा”। अमित शाह ने पार्टी कार्यकर्ताओं को हर सीट पर २०,००० अतिरिक्त वोट लाने का टारगेट दिया। भाजपा TMC पर ‘जंगलराज’, भ्रष्टाचार और तुष्टिकरण के आरोप लगा रही है।
ममता बनर्जी अपनी योजनाओं — कन्याश्री, लक्ष्मीर भांडार और १०० दिन काम — का बचाव कर रही हैं। उन्होंने EVM पर सवाल उठाए और ‘लोड शेडिंग’ का हवाला देते हुए विपक्ष पर हमला बोला। मटुआ समुदाय, CAA, आदिवासी इलाके और स्थानीय मुद्दे इस बार सबसे अहम बन गए हैं।
चुनाव आयोग ने दूसरे चरण के लिए अभूतपूर्व सुरक्षा व्यवस्था की है। २,३२१ कंपनियां CAPF (केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल) तैनात की गई हैं। १६० मोटरसाइकिल पेट्रोलिंग, ड्रोन सर्विलांस और संवेदनशील इलाकों में एरिया डोमिनेशन का प्लान तैयार है। कोलकाता में सबसे ज्यादा २७३ कंपनियां लगाई गई हैं।
प्रभाव: पहले चरण में उच्च मतदान ने लोकतंत्र की ताकत दिखाई, लेकिन हिंसा की घटनाएं भी हुईं। दूसरे चरण के नतीजे सिर्फ बंगाल की सत्ता नहीं, पूरे पूर्वी भारत की राजनीति, रोजगार, शिक्षा, उद्योग और केंद्र-राज्य संबंधों को बदल सकते हैं। अगर भाजपा अच्छा प्रदर्शन करती है तो २०२९ के लोकसभा चुनावों पर भी इसका असर पड़ेगा। TMC की जीत हुई तो क्षेत्रीय दलों की ताकत और बढ़ेगी।
निष्कर्ष: वोटरों को अब रेटिंग या वादों के बजाय पिछले ५ साल के काम, भविष्य की दिशा और विकास देखकर फैसला करना चाहिए। शांतिपूर्ण, निष्पक्ष और भयमुक्त मतदान ही सच्ची लोकतांत्रिक जीत होगी। हर मतदाता को बिना किसी दबाव या डर के अपने मताधिकार का इस्तेमाल जरूर करना चाहिए। बंगाल का यह फैसला पूरे देश की राजनीति की दिशा तय करेगा।
स्रोत: The Hindu, India Today, PTI, Election Commission of India (27 अप्रैल 2026) |
Rinews Desk | 27 अप्रैल 2026