दिल्ली भारत की राजधानी होने के बावजूद एक गंभीर और विरोधाभासी समस्या का सामना कर रही है। यहां बच्चे एक तरफ मोटापे की चपेट में हैं तो दूसरी तरफ कुपोषण भी झेल रहे हैं।
विस्तृत विश्लेषण: तेज शहरीकरण, जंक फूड की आसानी से उपलब्धता और पौष्टिक आहार तक असमान पहुंच ने यह डबल बोझ पैदा किया है। गरीब बच्चे प्रोटीन और विटामिन की कमी से स्टंटिंग-वेस्टिंग का शिकार हो रहे हैं, जबकि ऊपरी वर्ग के बच्चे हाई कैलोरी फास्ट फूड से मोटापे की समस्या में फंस रहे हैं। स्लम इलाकों और लड़कियों पर इसका सबसे ज्यादा असर पड़ रहा है।
प्रभाव: यह संकट बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास को रोक रहा है, स्वास्थ्य सेवाओं पर बोझ बढ़ा रहा है और भविष्य की कार्यशक्ति को कमजोर कर रहा है। मोटापे से डायबिटीज और हृदय रोग कम उम्र में बढ़ रहे हैं, जबकि कुपोषण से रोग प्रतिरोधक क्षमता घट रही है।
निष्कर्ष: सरकार, स्कूल और अभिभावकों को मिलकर संतुलित पोषण अभियान चलाना चाहिए। जंक फूड पर नियंत्रण, कम्युनिटी गार्डन और जागरूकता कार्यक्रम जरूरी हैं। दिल्ली अगर इस समस्या पर काबू पा ले तो पूरे देश के लिए मिसाल बनेगा। आप अपने घर में क्या बदलाव ला रहे हैं? कमेंट में बताएं।
Times of India
Rinews Desk | 27 अप्रैल 2026