RI News National Desk | 22 March 2026

गैस की कमी के चलते कई शहरों में विरोध प्रदर्शन तेज
मुख्य खबर
ईरान-इजरायल और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर अब सीधे भारत की घरेलू रसोई तक पहुंचने लगा है। वैश्विक LNG (लिक्विफाइड नैचुरल गैस) सप्लाई में बाधा आने के कारण देश में LPG (कुकिंग गैस) की उपलब्धता पर दबाव बढ़ गया है। 22 मार्च 2026 को कई बड़े शहरों—दिल्ली, मुंबई, लखनऊ और पटना—में लोगों ने सिलेंडर की कमी को लेकर विरोध प्रदर्शन किया।
स्थानीय वितरकों के अनुसार, पिछले कुछ दिनों में सप्लाई चेन बाधित हुई है और मांग के मुकाबले सिलेंडरों की उपलब्धता कम हो गई है। कई उपभोक्ताओं ने शिकायत की कि बुकिंग के बावजूद समय पर सिलेंडर नहीं मिल रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति और गंभीर बताई जा रही है, जहां पहले से ही वितरण नेटवर्क सीमित है।
सरकार ने इस संकट को देखते हुए कमर्शियल LPG सिलेंडरों के कोटा में 20% की बढ़ोतरी कर कुल आवंटन 50% तक पहुंचा दिया है। यह कदम होटल, रेस्तरां और फूड इंडस्ट्री को राहत देने के लिए उठाया गया है, लेकिन घरेलू उपभोक्ताओं पर दबाव अब भी बना हुआ है।
वैश्विक कारण और भारत पर असर
विशेषज्ञों के अनुसार, हॉर्मुज स्ट्रेट क्षेत्र में बढ़ते तनाव के कारण ऊर्जा आपूर्ति पर सबसे ज्यादा असर पड़ा है। यह समुद्री मार्ग दुनिया की लगभग 20% तेल और गैस सप्लाई के लिए अहम है। यहां किसी भी प्रकार का सैन्य तनाव या अवरोध सीधे वैश्विक कीमतों और सप्लाई को प्रभावित करता है।
भारत अपनी LPG जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में हलचल का असर तुरंत घरेलू बाजार में दिखता है। हाल के दिनों में LNG की कीमतों में तेजी आई है और सप्लाई अनिश्चित बनी हुई है।
सरकार के कदम और रणनीति
केंद्र सरकार ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए कई स्तरों पर प्रयास शुरू किए हैं। कमर्शियल LPG कोटा बढ़ाने के अलावा, वैकल्पिक सप्लाई स्रोतों पर भी काम किया जा रहा है। ऊर्जा मंत्रालय के अनुसार, रूस और अन्य देशों से अतिरिक्त आपूर्ति की संभावनाएं तलाश की जा रही हैं।
इसके साथ ही, राज्यों को निर्देश दिया गया है कि वे वितरण व्यवस्था को बेहतर बनाएं और जमाखोरी या कालाबाजारी पर सख्त कार्रवाई करें। सरकार यह भी सुनिश्चित करने की कोशिश कर रही है कि घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता के आधार पर गैस उपलब्ध कराई जाए।
विश्लेषण
यह संकट केवल अस्थायी सप्लाई समस्या नहीं है, बल्कि वैश्विक ऊर्जा निर्भरता की वास्तविकता को भी उजागर करता है। भारत जैसे देश, जो आयात पर निर्भर हैं, उन्हें ऐसे संकटों का अधिक सामना करना पड़ता है। हॉर्मुज स्ट्रेट की स्थिति और पश्चिम एशिया की राजनीति भविष्य में भी ऊर्जा सुरक्षा के लिए चुनौती बनी रह सकती है।
दीर्घकालिक समाधान के लिए भारत को घरेलू ऊर्जा स्रोतों, बायोगैस और वैकल्पिक ईंधनों पर अधिक निवेश करना होगा। साथ ही, ऊर्जा भंडारण और रणनीतिक रिजर्व को मजबूत करना भी आवश्यक है।
प्रभाव
इस LPG संकट का सबसे बड़ा असर आम लोगों की जेब पर पड़ेगा। कुकिंग गैस की कीमतों में संभावित बढ़ोतरी से घरेलू बजट बिगड़ सकता है। होटल और रेस्तरां उद्योग में लागत बढ़ने से खाने-पीने की चीजें महंगी हो सकती हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों में यह संकट और गंभीर हो सकता है, जहां पहले से ही संसाधनों की कमी है। इसके अलावा, महंगाई बढ़ने से समग्र अर्थव्यवस्था पर भी दबाव पड़ेगा।
आगे क्या?
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पश्चिम एशिया में तनाव जल्द कम नहीं हुआ, तो आने वाले हफ्तों में LPG और अन्य ऊर्जा उत्पादों की स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो सकती है। ऐसे में सरकार और उपभोक्ताओं दोनों को सतर्क रहने की आवश्यकता है।
ऊर्जा संकट के इस दौर में संतुलित खपत और वैकल्पिक उपायों को अपनाना ही सबसे बड़ा समाधान साबित हो सकता है।
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Tags: LPG संकट, ईरान युद्ध, गैस कमी, महंगाई, ऊर्जा संकट, भारत 2026
