RI NEWS DESK | Louwadih | 6 दिसंबर 2025
लउवाडीह में आज से सप्ताहव्यापी श्रीमद्भागवत कथा का शुभारंभ हुआ।
कथा की शुरुआत व्यासपीठ से मानस प्रवक्ता सुश्मिता राय जी ने अरण्य कांड की दिव्य कथा के साथ की। उनकी मधुर वाणी, तर्कपूर्ण व्याख्या और मार्मिक प्रस्तुतिकरण ने उपस्थित जनमानस को भाव-विभोर कर दिया।
सुश्मिता राय जी ने अपने प्रवचन में बताया कि—
- शिव कथा के मूल सृजक हैं,
- आदि कवि वाल्मीकि ने इसे प्रथम बार काव्य रूप दिया,
- तथा गोस्वामी तुलसीदास ने इसे जनभाषा में लोककल्याण हेतु अनुवादित किया।
उन्होंने श्रद्धालुओं से आग्रह किया कि “मानस गंगा में स्नान करने का अर्थ है—मन, वाणी और आचरण को पवित्र बनाना।”
कार्यक्रम का दूसरा चरण
इसके बाद कथा वाचक धर्मदूत स्वामी हरि प्रकाश जी महाराज ने व्यासपीठ संभाली और जीवनोपयोगी प्रसंगों एवं भक्ति मार्ग की सरल व्याख्या के साथ कथा को आगे बढ़ाया।
महाराज जी ने मानव जीवन में सदाचार, संयम, सेवा और सत्य की अनिवार्यता पर जोर देते हुए प्रथम दिवस की कथा को मंगलाचरण के साथ पूर्ण कराया।
आस्था और उत्साह से सराबोर वातावरण
पूरे परिसर में भक्ति, अनुशासन और आस्था का अद्भुत वातावरण बना रहा।
श्रद्धालुओं ने सजगता, सौम्यता और आत्मीयता के साथ कथा रस का आनंद लिया।
ग्रामीण क्षेत्र में धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के प्रति बढ़ती सहभागिता समाज में आध्यात्मिक जागरण का संकेत देती है।
RI NEWS विश्लेषण | जनमानस पर प्रभाव
ऐसे सांस्कृतिक एवं धार्मिक आयोजनों से न केवल सामाजिक सौहार्द बढ़ता है, बल्कि नई पीढ़ी को भारतीय ज्ञान परंपरा, लोकमानस और काव्य परंपरा की समझ भी मिलती है।
लउवाडीह में हो रही यह कथा गाँव के धार्मिक-सांस्कृतिक जीवन में एक नई ऊर्जा का संचार कर रही है।
