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कागजों पर बदले गए खंभे, जमीन पर बांस के सहारे दौड़ रहा मौत का तार

गाजीपुर: बिजली निगम की ओर से जिले में जर्जर तारों को बदलने और नए बिजली के खंभे लगाने के नाम पर पिछले तीन वर्षों में पानी की तरह पैसा बहाया गया है, लेकिन जमीनी हकीकत आज भी जस की तस बनी हुई है। बिजली निगम का दावा है कि जनपद में बेहतर बिजली आपूर्ति व्यवस्था और लोगों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए तीन साल में कुल 54 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। लेकिन गाजीपुर के जगदीशपुर विद्यापति गांव समेत कई इलाकों में बांस-बल्ली के सहारे खींचे गए बिजली के तार इन बड़े-बड़े दावों की सरेआम पोल खोल रहे हैं।

सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि मानसून का समय बिल्कुल नजदीक आ चुका है। ऐसे में भारी बारिश और तेज हवाओं के दौरान करंट इन गीले बांस-बल्लियों के सहारे जमीन पर उतरने का पूरा खतरा है, जिससे राहगीरों और स्थानीय ग्रामीणों की जान पर चौबीसों घंटे मौत का साया मंडराने लगा है। सरकारी आंकड़ों की मानें तो जिले में पिछले एक वर्ष के भीतर करंट लगने से 8 से ज्यादा मासूम लोगों की जान जा चुकी है।

RDSS योजना के करोड़ों रुपये कहां गए? आंकड़ों और दावों का खेल

बिजली विभाग के दस्तावेजों के अनुसार, आरडीएसएस योजना (पुनर्गठित वितरण क्षेत्र योजना) के तहत बिजली निगम ने साल 2022 से 2025 के बीच गाजीपुर जिले में 54 करोड़ रुपये का भारी-भरकम बजट खर्च किया है। विभाग का दावा है कि इस बजट से:

  • जिले के विभिन्न क्षेत्रों में कुल 2553 किलोमीटर जर्जर बिजली के तारों को बदला गया है।
  • ग्रामीण और शहरी इलाकों में सामान्य एलटी लाइन के 16,831 खंभे नए लगाए गए हैं।
  • हाई वोल्टेज 11,000 केवी के 5,350 खंभे और 33 केवी के 687 खंभे बदले गए हैं।

लेकिन विभाग के इन चमचमाते आंकड़ों के बीच गाजीपुर की कड़वी सच्चाई यह है कि आज भी दर्जनों गांवों में मुख्य सड़कों और घरों के ऊपर से गुजरने वाले हाई-टेंशन तार लोहे या सीमेंट के खंभों पर नहीं, बल्कि कमजोर और सड़े हुए बांस के डंडों पर टिके हुए हैं।

RI विश्लेषण: बजट का ‘शॉर्ट सर्किट’ और प्रशासनिक लापरवाही

गाजीपुर से सामने आई यह तस्वीर केवल बिजली विभाग की तकनीकी विफलता नहीं है, बल्कि यह सीधे तौर पर एक बड़े प्रशासनिक भ्रष्टाचार या घोर लापरवाही की ओर इशारा करती है। जब कागजों पर 16 हजार से ज्यादा खंभे लगाने और 54 करोड़ रुपये खर्च करने का दावा किया जा रहा हो, तब ग्रामीण इलाकों का बांस-बल्ली के भरोसे छूटना यह बताता है कि बजट का बंदरबांट किस स्तर पर हुआ है। ठेकेदारों और स्थानीय इंजीनियरों की सांठगांठ के कारण सरकारी योजनाओं का लाभ अंतिम छोर पर बैठे ग्रामीण तक नहीं पहुंच पा रहा है।

आरआई न्यूज़ के विश्लेषण के अनुसार, मानसून के ठीक पहले पूर्वांचल के जिलों में बिजली का यह बुनियादी ढांचा किसी बड़े हादसे को आमंत्रण दे रहा है। आंधी और पानी के दिनों में जब ये बांस टूटेंगे या गीले होकर करंट फैलाएंगे, तब विभाग मौतों के बाद केवल मुआवजे का ऐलान करके अपना पल्ला झाड़ लेगा। आरडीएसएस (RDSS) जैसी महत्वाकांक्षी योजना की उच्च स्तरीय भौतिक जांच (Physical Verification) होनी बेहद जरूरी है ताकि पता चल सके कि कागजी खंभे आखिर जमीन पर क्यों गायब हैं।

निष्कर्ष

अंततः, गाजीपुर के नागरिकों को बुनियादी सुविधाएं और सुरक्षा देना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है। बिजली विभाग को मानसून के सक्रिय होने से पहले युद्धस्तर पर अभियान चलाकर इन बांस-बल्लियों को हटाना चाहिए और वहां पक्के खंभे गाड़ने चाहिए। जनता टैक्स देती है ताकि उन्हें सुरक्षित जीवन मिल सके, न कि इसलिए कि वे विभाग की लापरवाही के कारण करंट की चपेट में आकर जान गंवाएं। प्रशासन को इस मामले को संज्ञान में लेकर तत्काल एक्शन मोड में आना होगा।

 


स्रोतः आरआई न्यूज फीड नेटवर्क (एकीकृत) | संपादक मंडल: आरआई न्यूज डेस्क (RI News Desk)

📅 प्रकाशित तिथि: 16 Jun 2026 को 09:30 PM बजे | गाजीपुर, उत्तर प्रदेश

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