ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे कलवट निर्माण मांग को लेकर ग्रामीणों का धरना
Local | Ghazipur
Avanish Kumar Rai | Bureau Chief (Local) | 10 जनवरी 2026, शाम 7:00 बजे

ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे कलवट मांग धरना उस समय शुरू हुआ, जब ऊंचाडीह क्षेत्र के ग्रामीणों ने वर्षों पुरानी पीडब्ल्यूडी सड़क पर आवागमन बंद होने से उत्पन्न समस्या को लेकर विरोध दर्ज कराया। यह धरना गाजीपुर से मांझीघाट जाने वाली ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे पर चेनज संख्या 32.7 किलोमीटर के पास आयोजित किया गया, जिसमें आसपास के लगभग 25 गांवों के सैकड़ों ग्रामीण शामिल हुए।
ग्रामीणों का कहना है कि करीमुद्दीनपुर को पातेपुर से जोड़ने वाली पीडब्ल्यूडी सड़क लंबे समय से क्षेत्र की मुख्य संपर्क सड़क रही है। इसी मार्ग से लोग करीमुद्दीनपुर रेलवे स्टेशन, गाजीपुर–बलिया मार्ग और स्थानीय बाजार तक आते-जाते रहे हैं। ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे निर्माण के दौरान इस सड़क को बंद कर दिए जाने से ग्रामीणों की दैनिक आवाजाही बाधित हो गई है।
ग्रामीणों के अनुसार, अब एक्सप्रेसवे पार करने के लिए लगभग 200 मीटर तक सर्विस रोड पर रॉन्ग साइड चलना पड़ता है, जिससे दुर्घटना का खतरा लगातार बना रहता है। इसी कारण कलवट निर्माण की मांग को लेकर ग्रामीण धरने पर बैठ गए और स्पष्ट किया कि ठोस आश्वासन मिलने तक आंदोलन जारी रहेगा।
सूचना मिलने पर डॉ. हर्षिता तिवारी तथा सुधाकर पांडेय मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों से बातचीत की। प्रशासन की ओर से समस्या के समाधान का आश्वासन दिए जाने के बाद ग्रामीणों ने धरना समाप्त कर दिया।
विश्लेषण
ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे जैसी बड़ी परियोजनाएं क्षेत्रीय विकास को गति देती हैं, लेकिन यदि स्थानीय संपर्क मार्गों को नजरअंदाज किया जाए तो इसका सीधा असर ग्रामीण जीवन पर पड़ता है। इस मामले में वर्षों से उपयोग में रही पीडब्ल्यूडी सड़क का बंद होना यह दर्शाता है कि परियोजना निर्माण के दौरान स्थानीय आवश्यकताओं और सुरक्षा पहलुओं पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया।
प्रभाव
यदि कलवट का निर्माण समय पर नहीं हुआ, तो ऊंचाडीह, चकफातिमा, पातेपुर, पैकवाली, मौरा, कुबरी, सलहरखान, चकबड़ी, बद्दोपुर, चकियां, बिंदावलिया, कामूपुर पलिया, उजारा, नारायनापुर, कंधौरा, अमीरहा राजापुर, सरेजा, भठवा, खड़ाहरा और असावर सहित लगभग 25 गांवों के लोगों को रोजमर्रा की आवाजाही में गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा। वहीं, समयबद्ध समाधान से ग्रामीणों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी और प्रशासन पर भरोसा भी मजबूत होगा।
