
दिल्ली AIIMS के वैज्ञानिकों का अध्ययन, सूक्ष्म प्रदूषण कणों और भ्रूण विकास के बीच मिला सीधा संबंध
नई दिल्ली, 3 जून 2026 | RI News
देश की राजधानी दिल्ली में स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) के शोधकर्ताओं ने वायु प्रदूषण को लेकर एक महत्वपूर्ण अध्ययन प्रस्तुत किया है। इस अध्ययन में बताया गया है कि वातावरण में मौजूद सूक्ष्म प्रदूषण कण गर्भस्थ शिशुओं के विकास को प्रभावित कर सकते हैं और गर्भावस्था के दौरान मां तथा शिशु दोनों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकते हैं।
शोधकर्ताओं के अनुसार लंबे समय तक प्रदूषित वातावरण में रहने वाली गर्भवती महिलाओं के शरीर में पहुंचने वाले सूक्ष्म कण भ्रूण के विकास को प्रभावित कर सकते हैं। अध्ययन के निष्कर्षों ने सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों और नीति निर्माताओं का ध्यान एक बार फिर बढ़ते वायु प्रदूषण की ओर आकर्षित किया है।
क्या कहता है AIIMS का अध्ययन?
AIIMS के वैज्ञानिकों ने अपने शोध में यह समझने का प्रयास किया कि वातावरण में मौजूद सूक्ष्म प्रदूषण कण (Particulate Matter) गर्भस्थ शिशु तक किस प्रकार पहुंचते हैं और उनके विकास को कैसे प्रभावित करते हैं। अध्ययन में पाया गया कि अत्यंत सूक्ष्म कण शरीर के भीतर प्रवेश कर रक्त प्रवाह को प्रभावित कर सकते हैं, जिससे भ्रूण के विकास पर नकारात्मक प्रभाव पड़ने की आशंका बढ़ जाती है।
शोधकर्ताओं का कहना है कि गर्भावस्था के दौरान प्रदूषण का अधिक संपर्क शिशु के जन्म वजन, शारीरिक विकास तथा कुछ स्वास्थ्य जटिलताओं से जुड़ा हो सकता है।
भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह शोध?
भारत दुनिया के उन देशों में शामिल है जहां कई बड़े शहर लगातार वायु प्रदूषण की समस्या का सामना कर रहे हैं। दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, लखनऊ, कानपुर और अन्य महानगरों में प्रदूषण का स्तर समय-समय पर चिंताजनक श्रेणी तक पहुंच जाता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि गर्भवती महिलाओं पर प्रदूषण के प्रभाव को लेकर जागरूकता नहीं बढ़ाई गई तो भविष्य में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य से जुड़ी चुनौतियां और गंभीर हो सकती हैं।
डॉक्टरों की क्या सलाह है?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि गर्भवती महिलाओं को प्रदूषण वाले क्षेत्रों में लंबे समय तक रहने से बचना चाहिए। आवश्यकता पड़ने पर मास्क का उपयोग, घर के भीतर स्वच्छ वातावरण बनाए रखना और नियमित स्वास्थ्य जांच कराना लाभकारी हो सकता ह



