ओस्लो/नई दिल्ली, 18 मई 2026: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सोमवार को नॉर्वे पहुंचे, जहां पिछले 43 वर्षों में किसी भारतीय प्रधानमंत्री की यह पहली द्विपक्षीय यात्रा मानी जा रही है। इसी सप्ताह ओस्लो में 2022 के बाद पहला नॉर्डिक शिखर सम्मेलन भी आयोजित हो रहा है, जिससे भारत और नॉर्डिक देशों के बीच रणनीतिक संबंधों को नई दिशा मिलने की संभावना बढ़ गई है।
इस यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण केंद्र व्यापार, ऊर्जा सुरक्षा, हरित प्रौद्योगिकी और नई तकनीकी साझेदारी को मजबूत करना है। नॉर्वे दुनिया के प्रमुख तेल और गैस निर्यातकों में शामिल है, इसलिए वैश्विक ऊर्जा संकट और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच यह दौरा भारत के लिए विशेष महत्व रखता है।
TEPA समझौते की प्रगति होगी मुख्य चर्चा
प्रधानमंत्री मोदी नॉर्वे के प्रधानमंत्री जोनास गाहर स्टोरे के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। दोनों नेता भारत-EFTA Trade and Economic Partnership Agreement (TEPA) की प्रगति की समीक्षा भी करेंगे। यह समझौता अक्टूबर 2025 से लागू हुआ था और इसमें नॉर्वे, स्विट्ज़रलैंड, आइसलैंड और लिकटेंस्टीन शामिल हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता भारतीय उद्योगों, स्टार्टअप्स, फार्मा, डिजिटल सेवाओं और ग्रीन टेक सेक्टर के लिए यूरोपीय बाजारों के नए अवसर खोल सकता है।
ऊर्जा सुरक्षा पर भारत का बड़ा रणनीतिक कदम
वैश्विक स्तर पर ऊर्जा आपूर्ति को लेकर बढ़ती अनिश्चितताओं के बीच भारत अब वैकल्पिक और स्थिर ऊर्जा साझेदारों की ओर तेजी से बढ़ रहा है। नॉर्वे जैसे देशों के साथ संबंध मजबूत होने से भारत को तेल, गैस और हरित ऊर्जा क्षेत्र में दीर्घकालिक सहयोग मिल सकता है।
हाल के महीनों में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और पश्चिम एशिया में बढ़े तनाव ने दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति पर दबाव बढ़ाया है। ऐसे समय में नॉर्डिक देशों के साथ सहयोग भारत की ऊर्जा सुरक्षा नीति को अधिक स्थिर आधार दे सकता है।
ग्रीन टेक्नोलॉजी और AI सहयोग पर भी नजर
नॉर्डिक देश ग्रीन टेक्नोलॉजी, डिजिटल प्रशासन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्लीन एनर्जी और समुद्री अनुसंधान में विश्व स्तर पर अग्रणी माने जाते हैं। भारत इस साझेदारी के माध्यम से ग्रीन हाइड्रोजन, सेमीकंडक्टर, नवीकरणीय ऊर्जा और स्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे क्षेत्रों में निवेश और तकनीकी सहयोग बढ़ाना चाहता है।
विश्लेषकों के अनुसार यह यात्रा केवल कूटनीतिक औपचारिकता नहीं बल्कि भारत की “उत्तर दिशा कूटनीति” का हिस्सा है, जिसके तहत भारत यूरोप के तकनीकी रूप से विकसित देशों के साथ दीर्घकालिक रणनीतिक साझेदारी मजबूत कर रहा है।
RI News विश्लेषण
यह दौरा भारत की विदेश नीति में एक महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत देता है। लंबे समय तक भारत की यूरोपीय रणनीति मुख्यतः फ्रांस, ब्रिटेन और जर्मनी जैसे बड़े देशों तक केंद्रित रही, लेकिन अब भारत छोटे लेकिन अत्यधिक विकसित और तकनीकी रूप से मजबूत देशों के साथ भी गहरे संबंध बना रहा है।
नॉर्डिक देशों के साथ बढ़ती निकटता भारत को केवल ऊर्जा सुरक्षा ही नहीं बल्कि उच्च तकनीक, रक्षा सहयोग, आर्कटिक अनुसंधान, जलवायु नीति और डिजिटल नवाचार में भी नई शक्ति प्रदान कर सकती है। आने वाले वर्षों में यह साझेदारी भारतीय उद्योगों, रोजगार, स्टार्टअप इकोसिस्टम और ग्रीन अर्थव्यवस्था पर बड़ा प्रभाव डाल सकती है।
स्रोत: The Hindu
— RI News Desk
Published: 18 May 2026



