33% महिला आरक्षण और लोकसभा की 850 सीटें: संसद विशेष सत्र 2026 में क्यों उठ रहे सवाल?

By: rinews Desk
Published: April 15, 2026 | 09:27 PM IST

33% महिला आरक्षण और लोकसभा की 850 सीटें: संसद विशेष सत्र 2026 में क्यों उठ रहे सवाल?

33% महिला आरक्षण और लोकसभा की 850 सीटें बढ़ाने का बड़ा प्रस्ताव केंद्र सरकार संसद के विशेष सत्र में ला रही है। 16 से 18 अप्रैल 2026 तक चलने वाले इस विशेष सत्र में तीन महत्वपूर्ण बिल पेश किए जाएंगे, जिनमें लोकसभा की कुल सीटों को 543 से बढ़ाकर 850 करने और महिलाओं को 33% आरक्षण देने का प्रावधान शामिल है।

सरकार इसे महिलाओं की राजनीतिक सशक्तिकरण की दिशा में ऐतिहासिक कदम बता रही है, लेकिन विपक्ष इसे “सत्ता कब्जाने की कोशिश” करार दे रहा है। खासकर परिसीमन को लेकर उठ रहे सवालों ने पूरे राजनीतिक गलियारे में हलचल मचा दी है।

33% महिला आरक्षण और लोकसभा की 850 सीटें – प्रस्ताव क्या है?

33% महिला आरक्षण और लोकसभा की 850 सीटें बढ़ाने का प्रस्ताव मुख्य रूप से तीन विधेयकों के रूप में आ रहा है:

  1. संविधान (131वां संशोधन) विधेयक – लोकसभा की सीटें बढ़ाकर 850 करने का प्रावधान।
  2. परिसीमन विधेयक – 2011 जनगणना के आधार पर नए सिरे से चुनाव क्षेत्रों की सीमाएं तय करना।
  3. केंद्र शासित प्रदेशों में भी 33% महिला आरक्षण लागू करने संबंधी संशोधन।

सरकार का तर्क है कि बिना सीटें बढ़ाए 33% महिला आरक्षण लागू करना मुश्किल है। मौजूदा 543 सीटों में से एक तिहाई आरक्षित करने पर पुरुष सांसदों के लिए सीटें काफी कम हो जाएंगी। इसलिए लोकसभा की कुल सीटों को 850 करने का फैसला लिया गया है।

33% महिला आरक्षण और लोकसभा की 850 सीटें के तहत लगभग 280-283 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। यह आरक्षण 15 साल के लिए होगा और 2029 के लोकसभा चुनाव से लागू होने की संभावना है।

क्यों उठ रहे सवाल? परिसीमन पर विवाद

33% महिला आरक्षण और लोकसभा की 850 सीटें बढ़ाने के प्रस्ताव में सबसे बड़ा विवाद परिसीमन को लेकर है।

विपक्ष (कांग्रेस, DMK, TMC, RJD, SP आदि) 33% महिला आरक्षण का समर्थन कर रहा है, लेकिन परिसीमन विधेयक का पुरजोर विरोध कर रहा है। राहुल गांधी ने इसे साफ शब्दों में “सत्ता कब्जाने की कोशिश” बताया है।

मुख्य कारण:

  • दक्षिण भारतीय राज्य (तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक, आंध्र) ने परिवार नियोजन में बेहतर काम किया। उनकी जनसंख्या वृद्धि कम है। नई जनगणना या 2011 डेटा के आधार पर परिसीमन होने से इन राज्यों को कम सीटें मिल सकती हैं।
  • वहीं उत्तर भारत (उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान आदि) की आबादी ज्यादा बढ़ने के कारण इनकी लोकसभा सीटें काफी बढ़ जाएंगी।
  • विपक्ष का आरोप है कि 33% महिला आरक्षण और लोकसभा की 850 सीटें के नाम पर असल में उत्तर भारत में BJP की ताकत बढ़ाने की रणनीति है।

मल्लिकार्जुन खड़गे की बैठक में विपक्ष ने फैसला किया है कि 33% महिला आरक्षण का समर्थन करेंगे, लेकिन परिसीमन का एकजुट विरोध करेंगे।

संविधान संशोधन की चुनौती

33% महिला आरक्षण और लोकसभा की 850 सीटें वाले बिल को पास करने के लिए लोकसभा और राज्यसभा दोनों में दो-तिहाई बहुमत की जरूरत है। सरकार के पास लोकसभा में बहुमत है, लेकिन राज्यसभा में स्थिति कड़ी है। कई राज्यसभा सदस्य परिसीमन के खिलाफ हैं।

33% महिला आरक्षण और लोकसभा की 850 सीटें के संभावित प्रभाव

सकारात्मक प्रभाव:

  • महिलाओं की लोकसभा में भागीदारी 14-15% से बढ़कर 33% हो जाएगी।
  • महिलाओं से जुड़े मुद्दों (शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा, पोषण) पर ज्यादा ध्यान मिलेगा।
  • राजनीति में महिला नेतृत्व बढ़ेगा।

चुनौतियां और चिंताएं:

  • दक्षिण भारत में असंतोष बढ़ सकता है।
  • परिसीमन प्रक्रिया लंबी और विवादास्पद हो सकती है।
  • नए क्षेत्रों में जाति-धर्म आधारित राजनीति तेज हो सकती है।
  • संसद भवन विस्तार और अतिरिक्त खर्च का बोझ।

विशेष सत्र में क्या होगा?

16 अप्रैल को बिल पेश किए जाएंगे। 17 और 18 अप्रैल को चर्चा और वोटिंग की संभावना है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह सदन को संबोधित कर सकते हैं।

सरकार सभी दलों से सहयोग की अपील कर रही है, जबकि विपक्ष साफ कह चुका है – 33% महिला आरक्षण हां, लेकिन परिसीमन के साथ नहीं।

निष्कर्ष

33% महिला आरक्षण और लोकसभा की 850 सीटें बढ़ाने का प्रस्ताव महिलाओं की सशक्तिकरण की दिशा में सकारात्मक कदम हो सकता है, लेकिन परिसीमन को लेकर उठे सवालों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

लोकतंत्र में संघीय भावना का सम्मान जरूरी है। क्या सरकार विपक्ष की चिंताओं को दूर कर पाएगी? या यह मुद्दा 2029 के चुनाव तक राजनीतिक ध्रुवीकरण बढ़ाएगा? आने वाले विशेष सत्र के नतीजे बहुत महत्वपूर्ण होंगे।

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