24 दिसंबर 2025 RI News डेस्क
अरावली पहाड़ियों की पहचान और वर्गीकरण से जुड़ी ‘नई परिभाषा’ को लेकर देश भर में जारी विरोध और आशंकाओं के बीच, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने एक आधिकारिक बयान जारी किया है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि इस नई परिभाषा का मकसद पर्यावरण संरक्षण को कमजोर करना बिल्कुल नहीं है।
मंत्रालय का स्पष्टीकरण: भ्रम दूर करना लक्ष्य
सरकार का कहना है कि यह स्पष्टीकरण अरावली पहाड़ियों की पहचान और वर्गीकरण से जुड़े नियमों को लेकर पहले से मौजूद ‘भ्रम’ को दूर करने के लिए दिया गया है। मंत्रालय ने जोर देकर कहा है कि नई परिभाषा के बावजूद, पर्यावरण कानूनों, वन संरक्षण नियमों और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों में कोई बदलाव नहीं किया गया है और ये यथावत लागू रहेंगे।
मंत्रालय का आश्वासन: किसी भी विकास परियोजना को मंजूरी देने से पहले पर्यावरणीय प्रभाव आकलन (EIA) अनिवार्य रहेगा और पर्यावरण की दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्रों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
पर्यावरण कार्यकर्ता क्यों कर रहे हैं विरोध?
हालांकि, मंत्रालय के आश्वासन के बावजूद, पर्यावरण कार्यकर्ताओं और कई सामाजिक संगठनों ने इस परिभाषा पर गंभीर आपत्ति जताई है। उनका मानना है कि यह नई परिभाषा अरावली क्षेत्र के कुछ हिस्सों को संरक्षण के दायरे से बाहर कर सकती है।
कार्यकर्ताओं की मुख्य चिंता यह है कि इससे भविष्य में खनन और अनियंत्रित निर्माण गतिविधियों को बढ़ावा मिल सकता है, जिससे दुनिया की सबसे पुरानी पर्वत श्रृंखलाओं में से एक अरावली को भारी नुकसान होने का खतरा है।
🔍 आगे का प्रभाव
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निगरानी में वृद्धि: अरावली क्षेत्र में प्रस्तावित विकास और खनन परियोजनाओं पर केंद्र और राज्यों की निगरानी बढ़ सकती है।
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नीतिगत बहस: पर्यावरण संरक्षण नीतियों को लेकर सार्वजनिक और नीतिगत स्तर पर बहस तेज होने की संभावना है।
