UP SIR 2026 voter list
उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची के Special Intensive Revision (SIR 2026) को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है। राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिनवा ने लखनऊ में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बताया कि मतदाता सूची की गहन जांच प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ रही है और अब तक करोड़ों मामलों की सुनवाई पूरी हो चुकी है।

3.26 करोड़ वोटरों को जारी किए गए नोटिस
चुनाव आयोग के अनुसार, राज्य में 3.26 करोड़ मतदाताओं को नोटिस जारी किए गए थे। इन नोटिसों का उद्देश्य मतदाता सूची में मौजूद त्रुटियों, डुप्लीकेट प्रविष्टियों और पुराने रिकॉर्ड की जांच करना था।
इनमें दो प्रमुख श्रेणियां शामिल थीं:
- लगभग 1.04 करोड़ वोटर जिनका रिकॉर्ड 2003 के पुनरीक्षण से मैप नहीं हो पाया था
- करीब 2.22 करोड़ वोटर जिनके रिकॉर्ड में नाम या उम्र से जुड़ी विसंगतियां थीं
2.80 करोड़ मामलों की सुनवाई पूरी
मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि अब तक करीब 2.80 करोड़ मामलों की सुनवाई पूरी हो चुकी है, जो कुल मामलों का लगभग 85% से अधिक है।
राज्यभर में इस प्रक्रिया को पूरा करने के लिए 5621 स्थानों पर सुनवाई केंद्र बनाए गए, जहां मतदाता अपने दस्तावेज जमा कर सत्यापन करवा रहे हैं।
70 लाख से ज्यादा नए वोटर आवेदन
SIR 2026 के दौरान मतदाता सूची में नाम जोड़ने के लिए बड़ी संख्या में आवेदन भी आए हैं।
- 70.69 लाख Form-6 आवेदन नए मतदाता जोड़ने के लिए प्राप्त हुए
- इनमें महिलाओं के आवेदन पुरुषों से अधिक रहे
- तृतीय लिंग के मतदाताओं के भी आवेदन दर्ज किए गए
चुनाव आयोग के अनुसार यह संकेत है कि युवा और महिला मतदाताओं की भागीदारी लगातार बढ़ रही है।
ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में 12.55 करोड़ मतदाता
6 जनवरी 2026 को जारी ड्राफ्ट मतदाता सूची के अनुसार, उत्तर प्रदेश में कुल 12.55 करोड़ मतदाता दर्ज किए गए थे।
- 6.88 करोड़ पुरुष मतदाता
- 5.67 करोड़ महिला मतदाता
- 4119 तृतीय लिंग मतदाता
क्लेम और ऑब्जेक्शन प्रक्रिया के बाद इस संख्या में बदलाव संभव है।
10 अप्रैल को जारी होगी अंतिम मतदाता सूची
चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि किसी भी मतदाता का नाम बिना नोटिस और सुनवाई के नहीं हटाया जाएगा।
SIR 2026 की पूरी प्रक्रिया पूरी होने के बाद अंतिम मतदाता सूची 10 अप्रैल 2026 को जारी की जाएगी।
ऐसे चेक करें अपना नाम
मतदाता अपनी जानकारी चुनाव आयोग की आधिकारिक वेबसाइट voters.eci.gov.in पर जाकर जांच सकते हैं।
- EPIC नंबर दर्ज करें
- नाम या मोबाइल से सर्च करें
- अगर नाम नहीं मिले तो Form-6 से आवेदन करें
चुनाव आयोग ने नागरिकों से अपील की है कि समय रहते अपना नाम मतदाता सूची में अवश्य जांच लें।
संपादकीय: मतदाता सूची की पारदर्शिता लोकतंत्र की आधारशिला
उत्तर प्रदेश जैसे विशाल राज्य में मतदाता सूची का गहन पुनरीक्षण केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं बल्कि लोकतंत्र की विश्वसनीयता से जुड़ा हुआ महत्वपूर्ण कदम है। भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में चुनाव तभी निष्पक्ष माने जा सकते हैं जब मतदाता सूची सटीक और पारदर्शी हो। इसलिए Special Intensive Revision (SIR) जैसी प्रक्रिया चुनाव आयोग की जिम्मेदारी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
पिछले कुछ वर्षों में कई राज्यों में मतदाता सूची से नाम हटने या डुप्लीकेट प्रविष्टियों को लेकर विवाद सामने आते रहे हैं। ऐसे में उत्तर प्रदेश में 3.26 करोड़ मतदाताओं को नोटिस जारी कर दस्तावेज सत्यापन की प्रक्रिया शुरू करना एक व्यापक प्रशासनिक अभ्यास है। अब तक 2.80 करोड़ मामलों की सुनवाई पूरी होना यह दिखाता है कि चुनाव आयोग इस प्रक्रिया को गंभीरता से पूरा करने की कोशिश कर रहा है।
इस प्रक्रिया का एक सकारात्मक पहलू यह भी है कि बड़ी संख्या में नए मतदाता सामने आए हैं। 70 लाख से अधिक Form-6 आवेदन प्राप्त होना यह संकेत देता है कि युवाओं और महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी लगातार बढ़ रही है। लोकतंत्र की मजबूती के लिए यह एक शुभ संकेत माना जा सकता है।
हालांकि, इस तरह के पुनरीक्षण के दौरान सबसे बड़ी चुनौती यह होती है कि किसी भी वास्तविक मतदाता का नाम अनावश्यक रूप से सूची से न हटे। चुनाव आयोग ने यह स्पष्ट किया है कि बिना नोटिस और सुनवाई के किसी मतदाता का नाम नहीं हटाया जाएगा। यह आश्वासन लोकतांत्रिक विश्वास को मजबूत करने के लिए जरूरी है।
आगामी 10 अप्रैल 2026 को जब अंतिम मतदाता सूची जारी होगी, तब यह स्पष्ट हो जाएगा कि पुनरीक्षण प्रक्रिया ने मतदाता सूची को कितना अधिक सटीक और विश्वसनीय बनाया है। नागरिकों के लिए भी यह आवश्यक है कि वे अपनी जानकारी समय रहते जांच लें और यदि कोई त्रुटि हो तो निर्धारित प्रक्रिया के तहत उसे ठीक कराएं।
लोकतंत्र केवल चुनाव कराने से मजबूत नहीं होता, बल्कि हर नागरिक के मताधिकार की सुरक्षा से मजबूत होता है। इसलिए मतदाता सूची की पारदर्शिता और सटीकता लोकतांत्रिक व्यवस्था की आधारशिला है।
— RI News Desk
