सहकारी बैंक कर्मचारी आंदोलन गाजीपुर 2026: वेतन, बोनस विवाद बढ़ा

Awanish Kumar Rai | Bureau Chief, Ghazipur March 22, 2026

सहकारी बैंक कर्मचारी आंदोलन गाजीपुर 2026 बैठक
जिला सहकारी बैंक यूसुफपुर शाखा में बैठक करते कर्मचारी यूनियन सदस्य

मुहम्मदाबाद (गाजीपुर): सहकारी बैंक कर्मचारी आंदोलन गाजीपुर 2026 के तहत कोऑपरेटिव बैंक इम्पलाइज यूनियन गाजीपुर की कार्यकारिणी की बैठक रविवार को जिला सहकारी बैंक की यूसुफपुर शाखा परिसर में आयोजित हुई। बैठक में जनपद के विभिन्न क्षेत्रों से आए कार्यकारिणी सदस्यों ने भाग लिया। बैठक का मुख्य उद्देश्य कर्मचारियों से जुड़ी लंबित समस्याओं पर चर्चा करना और आगे की रणनीति तय करना रहा।

बोनस और वेतन वृद्धि न मिलने पर आक्रोश

बैठक में कर्मचारियों ने इस वर्ष बोनस न मिलने, समय से वेतन वृद्धि नहीं होने और समयमान वेतनमान लागू न किए जाने पर गहरा आक्रोश व्यक्त किया। कर्मचारियों का कहना है कि लगातार महंगाई बढ़ने के बावजूद उनकी आय में कोई संतुलित वृद्धि नहीं हुई है, जिससे आर्थिक दबाव बढ़ता जा रहा है।

चार वर्षों से लंबित मांगें

यूनियन के पदाधिकारियों ने बताया कि कर्मचारियों से संबंधित कई महत्वपूर्ण मांगें पिछले चार वर्षों से बैंक प्रबंधन, सहकारिता विभाग और शीर्ष बैंक स्तर पर लंबित हैं। इन मांगों में वेतनमान पुनरीक्षण, सेवा शर्तों में सुधार और कार्यस्थल की सुविधाओं का विस्तार प्रमुख हैं। कई बार ज्ञापन देने और वार्ता करने के बावजूद कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है।

कमेटी बनी, लेकिन निर्णय लागू नहीं

सहकारिता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) के निर्देश पर एक कमेटी का गठन किया गया था, जिसमें यूनियन के प्रतिनिधियों को भी विशेष आमंत्रित सदस्य के रूप में शामिल किया गया। कमेटी ने कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए, लेकिन शीर्ष बैंक द्वारा न तो बैठक का कार्यवृत्त जारी किया गया और न ही उन निर्णयों को लागू किया गया। इससे कर्मचारियों में निराशा और असंतोष बढ़ा है।

भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितताओं के आरोप

बैठक में आरोप लगाया गया कि पिछले 16 वर्षों में कंप्यूटरीकरण और आधुनिकीकरण के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए, लेकिन भ्रष्टाचार और लापरवाही के कारण बैंक लगभग 10 वर्ष पीछे चले गए हैं। सीबी प्लस, माइक्रो एटीएम और चीनी मिलों के वित्त पोषण में भी भारी अनियमितताओं की बात सामने आई है। कर्मचारियों का कहना है कि इन गड़बड़ियों के कारण बैंकों की वित्तीय स्थिति कमजोर हुई है।

ग्रामीण बैंकिंग पर असर

जिला सहकारी बैंक ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों और छोटे व्यापारियों के लिए वित्तीय सहायता का प्रमुख माध्यम हैं। यदि इन बैंकों की स्थिति कमजोर होती है, तो इसका सीधा असर कृषि, लघु उद्योग और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। कर्मचारियों ने चेतावनी दी कि यदि समय रहते सुधार नहीं किया गया, तो यह संकट और गहरा सकता है।

CBI और ED जांच की मांग

यूनियन ने इन मामलों की जांच सीबीआई और ईडी जैसी केंद्रीय एजेंसियों से कराने की मांग की है। साथ ही कहा गया कि इलाहाबाद उच्च न्यायालय, सेबी और NCLT के निर्णयों से भी वित्तीय अनियमितताओं की पुष्टि होती है। यूनियन का आरोप है कि बड़े स्तर पर हुए घोटालों की निष्पक्ष जांच आवश्यक है।

आंदोलन का निर्णय

बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि लंबित मांगों के समर्थन में आंदोलन शुरू किया जाएगा। आंदोलन की तिथि और कार्यक्रम का अंतिम निर्णय यूनियन के केंद्रीय कार्यालय द्वारा लिया जाएगा। यूनियन ने स्पष्ट किया कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई, तो व्यापक स्तर पर विरोध प्रदर्शन किया जाएगा।

संभावित प्रभाव

यदि कर्मचारी आंदोलन शुरू होता है, तो जिला सहकारी बैंकों के दैनिक कार्य प्रभावित हो सकते हैं। इससे किसानों को मिलने वाले ऋण, जमा-निकासी और अन्य बैंकिंग सेवाओं पर असर पड़ सकता है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों की गति धीमी होने की आशंका है।

बैठक में ये रहे उपस्थित

बैठक में संरक्षक आनंद कुमार त्रिपाठी, प्रवीण कुमार शशी, दिग्विजय सिंह यादव, त्रियोगी नारायण चतुर्वेदी, शरद द्विवेदी, संदीप कुमार, सुनील वर्मा, संजय सिंह, अभिलाष कुमार सहित कई सदस्य उपस्थित रहे। अध्यक्षता यूनिट अध्यक्ष जयबीर सिंह और संचालन मंत्री विजय कृष्ण यादव ने किया।

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