PFBR Criticality: भारत के प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर ने हासिल की ऐतिहासिक सफलता

PFBR Criticality हासिल कर ली गई!

PFBR India 2026: भारत ने परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए तमिलनाडु के कल्पक्कम में 500 मेगावाट क्षमता वाले प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (PFBR) को सफलतापूर्वक क्रिटिकलिटी तक पहुंचा दिया है। यह वह अवस्था है जब रिएक्टर में नियंत्रित परमाणु श्रृंखला प्रतिक्रिया स्थिर रूप से चलने लगती है।

भारत का PFBR परमाणु रिएक्टर कल्पक्कम में

6 अप्रैल 2026 को रात 8:25 बजे हासिल की गई यह उपलब्धि भारत के तीन-चरणीय परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम के दूसरे चरण में प्रवेश का संकेत देती है और देश की ऊर्जा आत्मनिर्भरता को मजबूत करती है।

— RI News Desk

Published on: 14 April 2026

भारत ने विज्ञान और ऊर्जा क्षेत्र में एक ऐसा ऐतिहासिक मुकाम हासिल किया है, जो आने वाले कई दशकों तक देश की ऊर्जा सुरक्षा, आर्थिक विकास और पर्यावरणीय संतुलन की दिशा तय करेगा। 6 अप्रैल 2026 को शाम 8:25 बजे, कल्पक्कम (तमिलनाडु) में स्थित देश के पहले प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (PFBR) ने सफलतापूर्वक क्रिटिकलिटी (Criticality) प्राप्त कर ली। यह उपलब्धि भारत को उन चुनिंदा देशों की सूची में शामिल करती है, जो उन्नत फास्ट ब्रीडर परमाणु तकनीक में महारत हासिल कर चुके हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस उपलब्धि को “भारत की सिविल न्यूक्लियर यात्रा में एक परिभाषित कदम” बताया और वैज्ञानिकों, इंजीनियरों तथा देशवासियों को बधाई दी। यह सफलता वर्षों की अथक मेहनत, वैज्ञानिक अनुसंधान और स्वदेशी तकनीकी नवाचार का परिणाम है। भारतीय परमाणु ऊर्जा विभाग (DAE), इंडिरा गांधी सेंटर फॉर एटॉमिक रिसर्च (IGCAR) और भारतीय नाभिकीय विद्युत निगम लिमिटेड (BHAVINI) की टीमों ने यह उपलब्धि हासिल की।

PFBR क्या है और यह पारंपरिक रिएक्टरों से कैसे अलग है?

Prototype Fast Breeder Reactor (PFBR) एक 500 मेगावाट इलेक्ट्रिकल (MWe) क्षमता वाला अत्याधुनिक परमाणु रिएक्टर है, जिसे कल्पक्कम में BHAVINI द्वारा विकसित किया गया है। पारंपरिक प्रेसराइज्ड हैवी वॉटर रिएक्टर (PHWR) या लाइट वॉटर रिएक्टर जहां यूरेनियम ईंधन को जलाकर ऊर्जा पैदा करते हैं और ईंधन की खपत करते हैं, वहीं PFBR “ब्रीडर” तकनीक पर काम करता है।

इसका मूल सिद्धांत है — ईंधन का उपयोग करते हुए नया ईंधन भी उत्पन्न करना। PFBR में फास्ट न्यूट्रॉन (तेज न्यूट्रॉन) का उपयोग होता है, जो लिक्विड सोडियम कूलेंट के माध्यम से प्रबंधित किया जाता है। रिएक्टर के कोर में प्लूटोनियम-239 (Pu-239) को मुख्य ईंधन के रूप में इस्तेमाल किया जाता है, जबकि यूरेनियम-238 (U-238) को “ब्लैंकेट” में रखा जाता है। फास्ट न्यूट्रॉन Pu-239 से टकराकर U-238 को अतिरिक्त Pu-239 में बदल देते हैं। इस प्रकार, रिएक्टर जितना ईंधन खर्च करता है, उससे अधिक नया ईंधन तैयार कर लेता है।

PFBR की प्रमुख विशेषताएं:

  • ब्रीडिंग क्षमता: ब्रिडिंग रेशियो 1 से अधिक, अर्थात् अधिक ईंधन उत्पादन।
  • फास्ट न्यूट्रॉन स्पेक्ट्रम: थर्मल न्यूट्रॉन की बजाय तेज न्यूट्रॉन, जो बेहतर ईंधन उपयोग सुनिश्चित करता है।
  • लिक्विड सोडियम कूलेंट: उच्च तापमान पर कुशलतापूर्वक गर्मी निकालता है और दबाव कम रखता है, जिससे सुरक्षा बढ़ती है।
  • क्लोज्ड फ्यूल साइकिल: स्पेंट फ्यूल को रीप्रोसेस करके फिर उपयोग में लाया जाता है, जिससे अपशिष्ट कम होता है।
  • कम कार्बन उत्सर्जन: स्वच्छ ऊर्जा स्रोत के रूप में कोयला या गैस आधारित प्लांट्स का विकल्प।
  • थोरियम की तैयारी: भविष्य में थोरियम-232 को U-233 में बदलने की नींव रखता है।

यह रिएक्टर भारत के तीन-चरणीय परमाणु कार्यक्रम का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसकी कल्पना डॉ. होमी जहांगीर भाभा ने की थी।

भारत का तीन-चरणीय परमाणु कार्यक्रम: PFBR का स्थान

भारत के पास यूरेनियम सीमित है, लेकिन थोरियम के विशाल भंडार (दुनिया के कुल थोरियम का लगभग 25%) हैं। इसलिए तीन-चरणीय कार्यक्रम डिजाइन किया गया:

  1. प्रथम चरण: प्रेसराइज्ड हैवी वॉटर रिएक्टर (PHWR) — प्राकृतिक यूरेनियम से बिजली और प्लूटोनियम-239 उत्पन्न करना। वर्तमान में भारत में कई PHWR चल रहे हैं।
  2. द्वितीय चरण: फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (FBR) जैसे PFBR — प्लूटोनियम से अधिक प्लूटोनियम बनाना और थोरियम को U-233 में बदलने की प्रक्रिया शुरू करना। PFBR की क्रिटिकलिटी इसी चरण की शुरुआत है।
  3. तृतीय चरण: थोरियम आधारित रिएक्टर — U-233 को ईंधन बनाकर दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना।

PFBR इस कार्यक्रम का “पुल” है, जो सीमित यूरेनियम से अधिक ऊर्जा निकालने और थोरियम युग की ओर ले जाने में मदद करेगा।

“क्रिटिकलिटी” का मतलब और इसका महत्व

क्रिटिकलिटी वह अवस्था है जब रिएक्टर में न्यूक्लियर फिशन की श्रृंखला प्रतिक्रिया स्वतः और नियंत्रित रूप से चलने लगती है। न्यूट्रॉन की संख्या स्थिर रहती है — जितने न्यूट्रॉन पैदा होते हैं, उतने ही खपत या भाग जाते हैं।

इसकी अहमियत:

  • रिएक्टर अब तकनीकी रूप से “सक्रिय” हो चुका है।
  • यह ऊर्जा उत्पादन की दिशा में पहला निर्णायक कदम है।
  • आगे लो-पावर टेस्टिंग, फुल-पावर ऑपरेशन और ग्रिड कनेक्शन के चरण आएंगे।
  • Atomic Energy Regulatory Board (AERB) की कड़ी सुरक्षा समीक्षा के बाद यह मंजूरी मिली।

यह वैज्ञानिकों के लिए वर्षों की मेहनत का फल है। क्रिटिकलिटी के बाद रिएक्टर को पूर्ण क्षमता तक पहुंचाने में कुछ महीने लग सकते हैं, उसके बाद व्यावसायिक बिजली उत्पादन शुरू होगा।

भारत के लिए यह उपलब्धि क्यों ऐतिहासिक है?

PFBR की क्रिटिकलिटी केवल तकनीकी सफलता नहीं, बल्कि रणनीतिक, आर्थिक और पर्यावरणीय जीत है:

  • ऊर्जा आत्मनिर्भरता: भारत आयातित यूरेनियम और जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम कर सकेगा। बंद फ्यूल साइकिल से ईंधन दक्षता कई गुना बढ़ेगी।
  • पर्यावरण संरक्षण: न्यूनतम कार्बन उत्सर्जन। भारत के 2070 तक नेट-जीरो लक्ष्य को समर्थन।
  • आर्थिक मजबूती: सस्ती और स्थिर बिजली से उद्योग, कृषि और घरेलू क्षेत्र लाभान्वित होंगे। लंबे समय में बिजली की लागत प्रतिस्पर्धी बनेगी।
  • वैश्विक प्रतिष्ठा: भारत अब रूस, फ्रांस और चीन जैसे देशों के साथ उन्नत फास्ट ब्रीडर तकनीक वाले चुनिंदा देशों में शामिल हो गया है। रूस BN-800 जैसे रिएक्टर चला रहा है, जबकि अन्य देशों में कई परियोजनाएं बंद हो गईं।

यह उपलब्धि आत्मनिर्भर भारत (Atmanirbhar Bharat) की भावना को मजबूत करती है, क्योंकि PFBR पूरी तरह स्वदेशी डिजाइन और निर्माण का परिणाम है।

चुनौतियां: वास्तविकता का सामना

किसी भी बड़ी तकनीकी सफलता के साथ चुनौतियां भी जुड़ी होती हैं:

  • लागत और समय में देरी: PFBR की अनुमानित लागत ₹3,500 करोड़ से बढ़कर ₹6,800 करोड़ या उससे अधिक हो गई। निर्माण 2004 में शुरू हुआ था, लेकिन कई तकनीकी चुनौतियों (सोडियम सिस्टम, फ्यूल हैंडलिंग आदि) के कारण 16 वर्ष से अधिक की देरी हुई।
  • परमाणु सुरक्षा: लिक्विड सोडियम हवा या पानी से हिंसक प्रतिक्रिया दे सकता है, इसलिए अत्याधुनिक सुरक्षा प्रणालियां जरूरी हैं। AERB की निगरानी सख्त है।
  • तकनीकी स्थिरता: फास्ट न्यूट्रॉन भौतिकी जटिल है। लंबे समय तक स्थिर संचालन का परीक्षण करना होगा।
  • विस्तार की जटिलता: PFBR प्रोटोटाइप है। भविष्य में कई FBR बनाने, फ्यूल रीप्रोसेसिंग प्लांट स्थापित करने और मानव संसाधन विकसित करने की चुनौती है।
  • जन स्वीकृति और अपशिष्ट प्रबंधन: परमाणु ऊर्जा से जुड़ी चिंताओं को दूर करना और अपशिष्ट का सुरक्षित प्रबंधन।

इन चुनौतियों का समाधान निरंतर अनुसंधान, अंतरराष्ट्रीय सहयोग (सुरक्षा मानकों में) और पारदर्शी नीतियों से संभव है।

भविष्य: थोरियम युग की ओर भारत की यात्रा

भारत दुनिया के सबसे बड़े थोरियम भंडारों में से एक रखता है, मुख्य रूप से केरल और ओडिशा के समुद्री रेत में। PFBR की सफलता से अब थोरियम-232 को U-233 में बदलने की प्रक्रिया तेज हो सकेगी।

आगे की संभावनाएं:

  • और अधिक फास्ट ब्रीडर रिएक्टरों का निर्माण (BHAVINI द्वारा योजना)।
  • थोरियम आधारित एडवांस्ड हेवी वॉटर रिएक्टर (AHWR) का विकास।
  • क्लोज्ड फ्यूल साइकिल को मजबूत करना, जिससे ईंधन उपयोग 60-70 गुना तक बढ़ सकता है।
  • ऊर्जा मिश्रण में न्यूक्लियर का हिस्सा बढ़ाना — वर्तमान में भारत की कुल बिजली उत्पादन में न्यूक्लियर का योगदान लगभग 3-4% है, जिसे बढ़ाने की क्षमता है।
  • स्वच्छ ऊर्जा के साथ सौर, पवन और हाइड्रो का संतुलित विकास।

यदि सफल रहा, तो भारत ऊर्जा क्षेत्र में वैश्विक नेता बन सकता है और विकासशील देशों को सस्ती, स्वच्छ ऊर्जा का मॉडल प्रदान कर सकता है।

निष्कर्ष: नई ऊर्जा क्रांति की शुरुआत

PFBR की क्रिटिकलिटी भारत के लिए केवल एक वैज्ञानिक उपलब्धि नहीं है, बल्कि स्वावलंबन, पर्यावरण संरक्षण और तकनीकी स्वाभिमान की नई ऊर्जा क्रांति की शुरुआत है। यह कदम डॉ. भाभा के दूरदर्शी विजन को साकार करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।

अब नजर इस पर है कि PFBR कब पूर्ण क्षमता से बिजली उत्पादन शुरू करता है, आगे के FBR प्रोजेक्ट कितनी तेजी से आगे बढ़ते हैं और भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को किस हद तक स्वदेशी स्रोतों से पूरा कर पाता है।

यह उपलब्धि युवा वैज्ञानिकों और इंजीनियरों को प्रेरित करेगी कि कठिन चुनौतियों के बावजूद दृढ़ता से काम करने पर सपने साकार होते हैं। भारत अब परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में न केवल उपभोक्ता, बल्कि नवाचारकर्ता के रूप में उभर रहा है।

संदर्भ और स्रोत: यह लेख सरकारी घोषणाओं, DAE, PIB और विश्वसनीय समाचार स्रोतों पर आधारित है। भविष्य में PFBR के प्रदर्शन पर नजर रखना जरूरी होगा, क्योंकि यह पूरे कार्यक्रम की सफलता की कुंजी है।

यह उपलब्धि भारत को टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में आगे ले जाएगी, जैसा कि एआई और क्वांटम टेक्नोलॉजी 2026 में भी देखा जा रहा है।

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