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पुणे हत्याकांड में बड़ा खुलासा: गूगल पर मौत का तरीका खोजा, पुलिस से बचने की पूरी थी तैयारी

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पुणे हत्याकांड में बड़ा खुलासा: गूगल पर मौत का तरीका खोजा, पुलिस से बचने की पूरी थी तैयारी - Uncategorized

RI News Desk | 28 जून 2026

महाराष्ट्र के पुणे में कारोबारी केतन अग्रवाल की कथित हत्या की जांच में रोज नए खुलासे सामने आ रहे हैं। पुलिस का दावा है कि इस मामले के दोनों आरोपियों ने वारदात को अंजाम देने से पहले कई दिनों तक योजना बनाई, इंटरनेट पर हत्या के तरीके खोजे, घटनास्थल का चयन किया, पुलिस पूछताछ के संभावित सवालों के जवाब तक तैयार किए और बाद में डिजिटल सबूत मिटाने की भी कोशिश की। हालांकि मामले की जांच अभी जारी है और अंतिम निष्कर्ष अदालत की प्रक्रिया के बाद ही सामने आएगा।

क्या है पूरा मामला?

पुलिस के अनुसार, रियल एस्टेट कारोबारी केतन अग्रवाल की मौत को शुरुआत में एक दुर्घटना माना गया था। लेकिन जांच आगे बढ़ने पर संदेह गहराया और पुलिस ने केतन की मंगेतर सिया गोयल तथा उसके कथित प्रेमी चेतन चौधरी को गिरफ्तार किया। जांच एजेंसियों का आरोप है कि दोनों ने पहले से साजिश रचकर वारदात को अंजाम दिया।

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गूगल पर खोजे हत्या से जुड़े तरीके

जांच में सामने आए डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर पुलिस का दावा है कि आरोपियों ने इंटरनेट पर हत्या करने के विभिन्न तरीकों की जानकारी जुटाई। कथित तौर पर उन्होंने यह भी खोजा कि किसी घटना को दुर्घटना जैसा कैसे दिखाया जा सकता है। पुलिस के अनुसार, गूगल पर ‘डेथ पॉइंट’ और लोहागढ़ किले के ऐसे स्थान भी खोजे गए जहां घटना को हादसे का रूप दिया जा सके।

पुलिस पूछताछ के जवाब भी पहले से किए थे तैयार

जांच अधिकारियों का कहना है कि दोनों आरोपियों ने केवल वारदात की योजना ही नहीं बनाई, बल्कि पुलिस पूछताछ के दौरान क्या कहना है और किन सवालों के क्या जवाब देने हैं, इसकी भी पहले से तैयारी की थी। पुलिस का दावा है कि शुरुआती पूछताछ के दौरान मिले विरोधाभासी बयानों के बाद जांच का दायरा और बढ़ाया गया।

रिहर्सल और घटनास्थल का चयन

पुलिस के मुताबिक, आरोपियों ने कथित तौर पर कई बार घटनास्थल का दौरा किया और वारदात की रिहर्सल भी की। जांच में यह भी दावा किया गया है कि इससे पहले भी कथित तौर पर प्रयास किए गए थे, लेकिन वे सफल नहीं हो सके। पुलिस का कहना है कि इससे यह मामला पूर्व नियोजित साजिश की ओर संकेत करता है।

डिजिटल सबूत मिटाने का आरोप

पुलिस का दावा है कि घटना के बाद मोबाइल फोन से चैट, कॉल रिकॉर्ड और अन्य डिजिटल जानकारी हटाने का प्रयास किया गया। जब्त किए गए मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की फोरेंसिक जांच कराई जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि किन-किन जानकारियों को हटाया गया और क्या उन्हें दोबारा प्राप्त किया जा सकता है।

क्राइम सीन रीक्रिएट कर रही है पुलिस

जांच को मजबूत बनाने के लिए पुलिस आरोपियों को लोहागढ़ किले ले जाकर घटनास्थल का पुनर्निर्माण (Crime Scene Recreation) भी करा चुकी है। अधिकारियों का मानना है कि इससे घटना के क्रम और दोनों आरोपियों की भूमिका को बेहतर तरीके से समझने में मदद मिलेगी।

RI News विश्लेषण

यह मामला केवल एक हत्या की जांच नहीं, बल्कि डिजिटल तकनीक के अपराधों में बढ़ते इस्तेमाल की भी गंभीर चेतावनी है। पुलिस जांच में यदि इंटरनेट सर्च हिस्ट्री, मोबाइल लोकेशन, चैट रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज और डिजिटल फोरेंसिक जैसे साक्ष्य एक-दूसरे की पुष्टि करते हैं, तो वे किसी भी आपराधिक मामले में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। हालांकि भारतीय न्याय व्यवस्था में केवल पुलिस का दावा किसी व्यक्ति को दोषी सिद्ध नहीं करता। अंतिम निर्णय अदालत उपलब्ध साक्ष्यों, गवाहों और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर ही देती है। इसलिए जांच पूरी होने और न्यायालय के फैसले तक सभी आरोप न्यायिक परीक्षण के अधीन माने जाते हैं।

आगे क्या?

फिलहाल दोनों आरोपी न्यायिक प्रक्रिया का सामना कर रहे हैं। पुलिस डिजिटल फोरेंसिक रिपोर्ट, कॉल डिटेल रिकॉर्ड, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य और अन्य गवाहों के बयान जुटा रही है। जांच पूरी होने के बाद आरोपपत्र अदालत में दाखिल किया जाएगा, जिसके बाद मामले की सुनवाई आगे बढ़ेगी।

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स्रोतः आरआई न्यूज फीड नेटवर्क (एकीकृत) | संपादक मंडल: आरआई न्यूज डेस्क (RI News Desk)

📅 प्रकाशित तिथि: 28 Jun 2026 को 09:13 PM बजे | गाजीपुर, उत्तर प्रदेश

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