पंडरिया/कवर्धा: छत्तीसगढ़ के सुदूर और ग्रामीण क्षेत्रों के होनहार युवाओं के प्रशासनिक और प्रतियोगी परीक्षाओं के सपनों को अब नई उड़ान मिल रही है। पंडरिया विधानसभा क्षेत्र में स्थानीय विधायक भावना बोहरा द्वारा शुरू किया गया ‘लक्ष्य’ निशुल्क कोचिंग सेंटर ग्रामीण, गरीब और विशेष रूप से बैगा जनजाति जैसी अति पिछड़ी जातियों के छात्र-छात्राओं के लिए उम्मीद की एक नई किरण बनकर उभरा है। इस पहल से अब उन छात्रों को बड़े शहरों का रुख नहीं करना पड़ रहा है जो आर्थिक तंगहाली के कारण भारी-भरकम फीस चुकाने में असमर्थ थे।
लाखों रुपये का खर्च और बड़े शहरों की निर्भरता हुई खत्म
आमतौर पर छत्तीसगढ़ में सीजीपीएससी (CGPSC) प्री और मेंस की तैयारी के लिए बिलासपुर या रायपुर जैसे बड़े शहरों में जाना पड़ता है, जहाँ कोचिंग की फीस ही 70 से 80 हजार रुपये तक होती है। इसके अलावा रहने-खाने और रूम रेंट को मिलाकर छात्रों का करीब 2 से ढाई लाख रुपये का खर्च बैठता है। ‘लक्ष्य’ कोचिंग सेंटर ने पंडरिया और बोड़ला ब्लॉक के दूर-दराज के 15 से 20 किलोमीटर के दायरे में आने वाले गरीब परिवारों के युवाओं के लिए यह पूरी तैयारी स्थानीय स्तर पर मुफ्त कर दी है। वर्तमान में यहाँ 100 से अधिक छात्र सीजीपीएससी और नीट (NEET/JEE) जैसी परीक्षाओं की उच्च स्तरीय तैयारी कर रहे हैं।
हाउसवाइव्स और स्थानीय बेटियों के लिए वरदान
इस निशुल्क संस्थान का सबसे बड़ा फायदा क्षेत्र की बेटियों और शादीशुदा महिलाओं को मिल रहा है। कोचिंग में पढ़ने वाली एक छात्रा ने बताया कि उनका लक्ष्य डिप्टी कलेक्टर बनना है और इस केंद्र की वजह से वे घर के नजदीक रहकर बिना किसी वित्तीय बोझ के तैयारी कर पा रही हैं। वहीं, एक अन्य विवाहित छात्रा (हाउसवाइफ) ने कहा कि सामाजिक बंधनों या पारिवारिक जिम्मेदारियों के चलते जिन महिलाओं को बाहर जाने की अनुमति नहीं मिलती, उनके लिए यह अपनी प्रतिभा साबित करने का एक बेहतरीन प्लेटफॉर्म है।
तीन स्तर के फिल्टर से चुने जाते हैं शिक्षक, जल्द बनेगा नालंदा परिसर
गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए कोचिंग में शिक्षकों का चयन कड़े मानदंडों के आधार पर किया जाता है। इंटरव्यू, लिखित परीक्षा और वन-टू-वन डिस्कशन के तीन स्तरीय फिल्टर के बाद ही योग्य फैकल्टी को नियुक्त किया जाता है। इसके साथ ही, पंडरिया क्षेत्र के युवाओं को और बेहतर सुविधाएं देने के लिए मुख्यमंत्री की ओर से करीब 4.5 करोड़ रुपये की लागत से ‘नालंदा परिसर’ की सौगात दी गई है, जिससे यहाँ एक आधुनिक लाइब्रेरी और एजुकेशन हब का निर्माण होगा।
स्रोतों का विश्लेषण और प्रभाव (Analysis & Impact): ग्रामीण अंचलों में निशुल्क कोचिंग की यह नीति न केवल शिक्षा के लोकतंत्रीकरण को बढ़ावा देती है, बल्कि शहरी और ग्रामीण छात्रों के बीच के संसाधनों के अंतर को भी पाटती है। जब सुदूर वनांचल और आदिवासी क्षेत्रों के बच्चे डिप्टी कलेक्टर या डॉक्टर जैसे पदों पर चयनित होंगे, तो इसका असर पूरे सामाजिक ताने-बाने पर पड़ेगा। शिक्षा के क्षेत्र में स्थानीय स्तर पर किया जा रहा यह निवेश आने वाले समय में कबीरधाम जिले की प्रशासनिक रीढ़ तैयार करने में मील का पत्थर साबित हो सकता है।
(इनपुट सोर्स: एएनआई न्यूज / ANI)
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अभी शॉप करेंस्रोतः आरआई न्यूज फीड नेटवर्क (एकीकृत) | संपादक मंडल: आरआई न्यूज डेस्क (RI News Desk)
📅 प्रकाशित तिथि: 28 Jun 2026 को 09:31 PM बजे | गाजीपुर, उत्तर प्रदेश
