नई दिल्ली, 29 मई 2026 | RI News Desk

भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल ने रूस में आयोजित एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा सम्मेलन में आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक लड़ाई को लेकर बड़ा संदेश दिया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि आतंकवाद के विरुद्ध संघर्ष में किसी भी प्रकार के “दोहरे मापदंड” स्वीकार नहीं किए जा सकते। डोभाल का यह बयान ऐसे समय आया है जब दुनिया के कई हिस्सों में आतंकवादी गतिविधियां, सीमा पार आतंकवाद और कट्टरपंथ से जुड़ी चुनौतियां लगातार बनी हुई हैं।
रूस में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मंच पर अपने संबोधन के दौरान डोभाल ने कहा कि आतंकवाद मानवता के लिए सबसे गंभीर खतरों में से एक है और इसके खिलाफ सभी देशों को बिना किसी राजनीतिक या रणनीतिक भेदभाव के एकजुट होकर कार्रवाई करनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि किसी आतंकवादी संगठन को “अच्छा” या “बुरा” मानने की प्रवृत्ति वैश्विक सुरक्षा के लिए खतरनाक साबित हो सकती है।
क्या कहा अजीत डोभाल ने?
डोभाल ने अपने संबोधन में कहा कि आतंकवाद का कोई धर्म, सीमा या राष्ट्रीयता नहीं होती। यदि कोई देश अपने राजनीतिक हितों के लिए आतंकवादी संगठनों को संरक्षण देता है या उनके प्रति नरम रुख अपनाता है, तो इसका दुष्परिणाम पूरी दुनिया को भुगतना पड़ता है।
उन्होंने जोर देकर कहा कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में सभी देशों को समान मानदंड अपनाने चाहिए। किसी क्षेत्र विशेष में आतंकवादी गतिविधियों की निंदा करना और दूसरे क्षेत्र में उसी प्रकार की गतिविधियों पर मौन रहना वैश्विक सुरक्षा प्रयासों को कमजोर करता है।
भारत का पुराना और स्पष्ट रुख
भारत लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय मंचों पर आतंकवाद के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग करता रहा है। विशेष रूप से सीमा पार आतंकवाद को लेकर भारत लगातार अपनी चिंताएं व्यक्त करता रहा है। पिछले तीन दशकों में भारत ने कई बड़े आतंकवादी हमलों का सामना किया है, जिनमें संसद हमला, मुंबई हमला, पठानकोट हमला और पुलवामा जैसी घटनाएं शामिल हैं।
भारत का मानना रहा है कि आतंकवाद को किसी भी परिस्थिति में वैधता नहीं दी जा सकती। चाहे वह राजनीतिक उद्देश्य के नाम पर हो, धार्मिक कट्टरता के नाम पर हो या क्षेत्रीय संघर्ष के नाम पर।
डोभाल का यह बयान उसी नीति का विस्तार माना जा रहा है जिसे भारत लगातार संयुक्त राष्ट्र और अन्य वैश्विक मंचों पर उठाता रहा है।
रूस में आयोजित सुरक्षा सम्मेलन का महत्व
रूस द्वारा आयोजित यह सुरक्षा सम्मेलन दुनिया के कई देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों, रक्षा विशेषज्ञों और रणनीतिक नीति निर्माताओं को एक मंच पर लाता है। यहां आतंकवाद, साइबर सुरक्षा, सीमा सुरक्षा, उभरते सुरक्षा खतरों और वैश्विक स्थिरता जैसे विषयों पर चर्चा होती है।
भारत की ओर से अजीत डोभाल की भागीदारी यह दर्शाती है कि नई दिल्ली अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा संवादों में सक्रिय भूमिका निभा रही है। भारत केवल क्षेत्रीय सुरक्षा तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि वैश्विक सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने में भी योगदान देना चाहता है।
आतंकवाद के बदलते स्वरूप पर चिंता
विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक समय में आतंकवाद का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। पहले जहां आतंकवादी संगठन पारंपरिक हथियारों और सीमित नेटवर्क का उपयोग करते थे, वहीं अब सोशल मीडिया, साइबर प्लेटफॉर्म, क्रिप्टोकरेंसी और डिजिटल संचार माध्यमों का व्यापक इस्तेमाल किया जा रहा है।
कट्टरपंथी विचारधाराओं का प्रसार अब इंटरनेट के माध्यम से अधिक तेजी से हो रहा है। ऐसे में आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई केवल सैन्य कार्रवाई तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि इसमें साइबर सुरक्षा, वित्तीय निगरानी और अंतरराष्ट्रीय खुफिया सहयोग भी शामिल हो गया है।
डोभाल ने अपने संबोधन में इन उभरती चुनौतियों की ओर भी संकेत किया और देशों के बीच अधिक समन्वय की आवश्यकता पर बल दिया।
भारत की सुरक्षा रणनीति में बदलाव
पिछले कुछ वर्षों में भारत ने अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति में कई महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। सीमा सुरक्षा को मजबूत करने, आधुनिक तकनीकों के उपयोग, आतंकवादी वित्तपोषण पर निगरानी और अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया गया है।
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA), प्रवर्तन निदेशालय (ED) और विभिन्न खुफिया एजेंसियों के बीच समन्वय को मजबूत किया गया है। इसके साथ ही डिजिटल निगरानी और साइबर खतरों से निपटने की क्षमता में भी उल्लेखनीय वृद्धि की गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक मंचों पर भारत की सक्रियता उसकी बढ़ती रणनीतिक भूमिका को दर्शाती है।
क्या दुनिया एकजुट हो पाएगी?
आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक एकजुटता की बात दशकों से की जा रही है, लेकिन व्यवहारिक स्तर पर कई बार राजनीतिक हित इसमें बाधा बनते रहे हैं। विभिन्न देशों की अलग-अलग रणनीतिक प्राथमिकताएं और क्षेत्रीय समीकरण अक्सर आतंकवाद विरोधी प्रयासों को प्रभावित करते हैं।
यही कारण है कि डोभाल ने अपने संबोधन में दोहरे मापदंडों के खतरे की ओर विशेष रूप से ध्यान आकर्षित किया। उनका संदेश था कि यदि आतंकवाद को वास्तव में समाप्त करना है तो सभी देशों को बिना किसी भेदभाव के एक समान दृष्टिकोण अपनाना होगा।
भारत की वैश्विक भूमिका और बढ़ती प्रतिष्ठा
आज भारत दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं और उभरती सामरिक शक्तियों में शामिल है। G20 की अध्यक्षता, वैश्विक दक्षिण की आवाज बनने की पहल और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मुद्दों पर सक्रिय भागीदारी ने भारत की प्रतिष्ठा को और मजबूत किया है।
अजीत डोभाल का रूस में दिया गया यह बयान केवल एक सुरक्षा टिप्पणी नहीं बल्कि भारत की व्यापक विदेश और सुरक्षा नीति का प्रतिबिंब भी माना जा रहा है।
विश्लेषकों के अनुसार आने वाले वर्षों में आतंकवाद, साइबर सुरक्षा और उभरते भू-राजनीतिक तनाव वैश्विक एजेंडा के प्रमुख मुद्दे बने रहेंगे। ऐसे में भारत की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो सकती है।
निष्कर्ष
रूस में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा सम्मेलन में NSA अजीत डोभाल का बयान आतंकवाद के खिलाफ भारत के स्पष्ट और सख्त रुख को फिर से रेखांकित करता है। उन्होंने दुनिया को याद दिलाया कि आतंकवाद के विरुद्ध लड़ाई में किसी भी प्रकार के दोहरे मापदंड अंततः वैश्विक शांति और सुरक्षा के लिए नुकसानदायक हैं।
आतंकवाद के बदलते स्वरूप, डिजिटल खतरों और बढ़ती अंतरराष्ट्रीय चुनौतियों के बीच भारत लगातार एक ऐसी वैश्विक व्यवस्था की वकालत कर रहा है जहां सुरक्षा, सहयोग और समान दृष्टिकोण को प्राथमिकता दी जाए। डोभाल का यह संदेश आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा बहस का महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकता है।
स्रोत: Press Trust of India (PTI), रूस अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मंच में NSA अजीत डोभाल का संबोधन
— RI News Desk



